- क्या फिर से मंदी दस्तक दे रही है? नई दिल्ली (ईएमएस)। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। शुक्रवार को ट्रंप द्वारा लागू की गई रेसिप्रोकल टैरिफ (पारस्परिक शुल्क) नीति के चलते अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई। डॉव जोन्स, एसएंडपी 500 और नैस्डैक जैसे प्रमुख सूचकांकों में 5% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह कोरोना महामारी के बाद का सबसे बुरा दिन बन गया। डॉव जोन्स 5.50% लुढ़क गया, जबकि एसएंडपी 500 में करीब 6% और नैस्डैक में 5.73% की गिरावट आई। यह गिरावट केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रही, बल्कि ब्रिटेन के एफटीएसई 100 और जर्मनी के डीएक्स इंडेक्स में भी 4.95% की गिरावट देखी गई। भारत के बाजार भी इस संकट से अछूते नहीं रहे, जहां सेंसेक्स 930 अंकों की गिरावट के साथ 75,364.69 पर बंद हुआ और निफ्टी 1.49% गिरकर 22,904.45 पर आ गया। - व्यापार युद्ध तेज डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति के तहत अमेरिका ने सभी आयातों पर 10% शुल्क लगाया है, जो 9 अप्रैल से और अधिक बढ़कर 20% हो जाएगा। इसके जवाब में चीन ने अमेरिकी वस्तुओं पर 34% शुल्क लगाने की घोषणा की। इससे वैश्विक व्यापार में तनाव और अधिक बढ़ गया है। ट्रंप ने चीन पर पैनिक करने का आरोप लगाया और कहा कि यह अमेरिका की मजबूती का प्रमाण है। -मंदी के साथ महंगाई की आशंका एएसके प्राइवेट वेल्थ की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह व्यापार नीति अमेरिका को 1800 के दशक जैसी व्यापार बाधाओं की ओर ले जा सकती है। रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि अमेरिका में स्टैगफ्लेशन (मंदी के साथ महंगाई) की स्थिति बन सकती है। - बाजार में घबराहट, निवेशकों में चिंता ट्रंप के इन फैसलों से निवेशकों में भारी घबराहट है। एक अनुमान के मुताबिक, ट्रंप के कार्यकाल के बाद अमेरिकी शेयर बाजारों से 9 ट्रिलियन डॉलर की बाजार पूंजी साफ हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन नीतियों से अमेरिका में स्टैगफ्लेशन यानी महंगाई और मंदी का मिला-जुला प्रभाव पड़ सकता है। - ट्रंप की प्रतिक्रिया ट्रंप ने बाजार की गिरावट को लेकर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि वह शुक्रवार को फ्लोरिडा स्थित अपने गोल्फ क्लब में देखे गए। हालांकि, उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि यह धन कमाने का सबसे अच्छा समय है। उन्होंने फेडरल रिजर्व चेयरमैन जेरोम पॉवेल पर ब्याज दरें घटाने का दबाव भी डाला। ट्रंप प्रशासन के भीतर भी इस नीति को लेकर मतभेद हैं। लेकिन ट्रंप के करीबी सलाहकार पीटर नवारो और एरिक ट्रंप जैसे समर्थकों के कारण यह नीति लागू कर दी गई। -कॉरपोरेट की असहमति कई अमेरिकी कंपनियों और उद्योगपतियों ने इन टैरिफ्स पर नाराजगी जताई है। कई कंपनियों ने अपने उत्पादनों को चीन से वियतनाम में स्थानांतरित किया था, लेकिन अब वियतनाम पर भी 46% शुल्क लगाने की घोषणा ने उन्हें एक बार फिर असमंजस में डाल दिया है। ऐसे में कंपनियां कीमतें बढ़ाने या उत्पादन घटाने पर विचार कर रही हैं। -क्या फिर से मंदी की आहट है? अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ सकती है। बाजार में अस्थिरता, नीति की अस्पष्टता और वैश्विक व्यापार में तनाव इसके प्रमुख कारण बन सकते हैं।