पटना(ईएमएस)। संशोधित वक्फ विधेयक को लेकर जदयू में घमासान मच गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है। अब तक दो मुस्लिम नेताओं ने नीतीश का साथ छोड़ते हुए जेडीयू से इस्तीफे की घोषणा कर दी है। इनमें पूर्वी चंपारण के मोहम्मद कासिम अंसारी और जमुई से नवाज मलिक का नाम शामिल है। हालांकि, जेडीयू ने इस पर सफाई देते हुए इन दोनों के पार्टी के पदाधिकारी होने से इनकार कर दिया। दूसरी ओर, जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने दावा किया कि न तो पूर्वी चंपारण के रहने वाले मोहम्मद कासिम अंसारी और न ही जमुई निवासी नवाज मलिक पार्टी के पदाधिकारी हैं। जब अंसारी के बारे में पूछा गया तो रंजन ने कहा कि उन्हें कोई नहीं जानता है। वे कभी जेडीयू में महत्वपूर्ण पदों पर नहीं रहे। यहां तक कि जिला स्तर पर भी कोई पद नहीं संभाला।वहीं, सीएम नीतीश कुमार के करीबी एवं वरिष्ठ जेडीयू नेता विजय कुमार चौधरी ने कहा कि पार्टी के अंदर वक्फ बिल को लेकर कोई भ्रम नहीं है। उन्होंने यह टिप्पणी जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव गुलाम रसूल बलियावी समेत अन्य मुस्लिम नेताओं द्वारा वक्फ बिल का सार्वजनिक रूप से विरोध करने के सवाल पर की गई। बलियावी ने गुरुवार को कहा कि वक्फ बिल के खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। पूर्वी चंपारण में जेडीयू के चिकित्सा प्रकोष्ठ का अध्यक्ष होने का दावा करने वाले मोहम्मद कासिम अंसारी ने गुरुवार को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने वक्फ बिल का समर्थन करने के जेडीयू के रुख की आलोचना की। इस संबंध में कासिम ने जेडीयू अध्यक्ष सह बिहार के सीएम नीतीश कुमार को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने कहा कि वक्फ बिल पर समर्थन करके जेडीयू ने लाखों मुसलमानों का भरोसा तोड़ दिया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के लोकसभा में दिए भाषण पर भी निराशा जताई। इसी तरह नवाज मलिक ने भी खुद को जेडीयू के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का सचिव बताते हुए गुरुवार को पार्टी से इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने अपने पत्र में आरोप लगाया कि मुसलमान और उनके जैसे कार्यकर्ताओं को वक्फ बिल पर जेडीयू के समर्थन से झटका लगा है। वीरेंद्र/ईएमएस/04अप्रैल2025