राष्ट्रीय
04-Apr-2025
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नई दिल्ली (ईएमएस)। राजधानी, दुरंतो या शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों के साथ ही अब सामान्य मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में चैन की नींद आएगी। लंबे सफर के बाद भी थकावट महसूस नहीं होगी। ट्रेनों की यात्रा लग्जरी कार जैसी होगी। इसके लिए पटरी पर रेल मिलिंग मशीन उतारी गई है। अत्याधुनिक मशीन से न केवल रेलवे ट्रैक को चिकना बनाए रखने में मदद मदद मिलेगी, बल्कि उसकी मजबूती भी बढ़ेगी। भारतीय रेल की इकलौती मशीन धनबाद रेल मंडल को दी गई है। रेल मिलिंग मशीन ने काम करना शुरू कर दिया है। 18 फरवरी से 31 मार्च के दौरान अलग-अलग रेलखंडों में 11.3 ट्रैक किमी पटरी को ठीक किया जा चुका है। लंबे समय तक यात्री ट्रेन या मालगाड़ी चलने से पहिए से ट्रैक घिस जाते हैं। गर्मी में ट्रैक के टेढ़ होने या जाड़े में दरार पड़ने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। पहले ऐसी स्थिति में ट्रैक को काट कर उस स्थान पर नए ट्रैक जोड़ने पड़ते थे। लंबी रेल पटरी बिछाने के लिए वेल्डिंग की जाती है। लेकिन अब रेल मिलिंग मशीन से अब ऑन स्पॉट मरम्मत की जा सकेगी। ट्रैक के ऊपरी हिस्से से 1.5 एमएम गहराई तक मशीन से दुरुस्त किया जा सकेगा। प्रति शिफ्ट 300 से 500 मीटर तक ट्रैक को समतल बनाने में कारगर बार-बार ट्रैक के प्रभावित या क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाने की समस्या नहीं होगी। इससे रेलवे का खर्च बचेगा। ट्रैक फैक्चर होने या वेल्डिंग फेल होने की घटनाएं कम हो सकेंगी। मशीन ईको फ्रेंडली होने से न तेज आवाज न ही कंपन करती है। आशीष/ईएमएस 04 अप्रैल 2025