राष्ट्रीय
04-Apr-2025
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नई दिल्ली (ईएमएस)। आगरा के ताजमहल को वक्फ संपत्ति घोषित करने के कई दावे हुए, लेकिन बोर्ड में दर्ज नहीं हो सका। बताया जाता हैं कि एक बार सुन्नी वक्फ बोर्ड ने ताजमहल को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कर लिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के सामने शाहजहां के दस्तखत वाला वक्फनामा पेश नहीं कर सके। इसके बाद वक्फ बोर्ड ने अपना दावा स्वयं वापस ले लिया था। वहीं पूर्व मंत्री और सपा नेता मो. आजम खां ने भी 2014 में ताज को वक्फ संपत्ति घोषित करने की मांग उठा दी थी। 1998 में कारोबारी इरफान बेदार ने यूपी सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड से मांग की थी कि ताजमहल को वक्फ की संपत्ति घोषित कर बोर्ड उन्हें वहां का मुतवल्ली (केयर टेकर) बना दे। यह एएसआई के तहत आता था। इसलिए सुन्नी वक्फ बोर्ड ने एएसआई को नोटिस जारी किया था। इसके बाद बेदार खुद 2004 में मामले को लेकर इलाहबाद हाईकोर्ट पहुंचे और ताजमहल का मुतवल्ली बनाने की मांग की। 2005 में यूपी सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड ने ताज को वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत करने का फैसला किया। इधर, एएसआई ने वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवाद के सभी मामलों के लिए प्रथम अपीलीय प्राधिकरण-वक्फ न्यायाधिकरण के पास जाने के स्थान पर सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्ड के इस निर्णय पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्ड से सुबूत मांगे कि कैसे दावा कर रहा है। बता दें कि बोर्ड ने दावा किया था कि मुगल बादशाह शाहजहां ने बोर्ड के पक्ष में ताजमहल का वक्फनामा किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शाहजहां ने वक्फनामे पर दस्तखत कैसे किए। वे जेल में थे। वह हिरासत से ही ताज देखते थे। वहीं, एएसआई की ओर से एडीएन राव एडवोकेट ने कहा था कि बोर्ड ने जैसा दावा किया है, वैसा कोई वक्फनामा नहीं है। वर्ष 2014 में आजम खान ने कहा था कि दुनिया के अजूबों में से एक ताजमहल को वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित करना चाहिए। तब उन्होंने कहा था कि यह जायज इसलिए है क्योंकि ताजमहल दो मुसलमानों शाहजहां और उनकी पत्नी मुमताज का मकबरा है। खान ने दलील दी थी कि हर जगह मुसलमानों की कब्रें सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधीन हैं। हालांकि उनकी मांग को ये कहते हुए खारिज कर दिया गया था कि ये राष्ट्रीय स्मारक के रूप में दर्ज है। आशीष/ईएमएस 04 अप्रैल 2025