लेख
04-Apr-2025
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बिहार में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसे देखते हुए तमाम सियासी दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। बिहार में इस बार का चुनाव भी मुख्यै तौर पर दो धड़ों के बीच है। एक तरफ सत्तापरूढ़ एन डीए है तो दूसरी तरफ महागठबंधन है। 30मार्च 25 क़ो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ एनडीए के बाकी साथियों की मीटिंग हुई। इसमें सभी की आमराय है कि बिहार का विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के ही नेतृत्व में लड़ा जाएगा इससे पहले हाल में ही बिहार में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार न को भागलपुर में पीएम किसान सम्मान निधि की 19वीं किस्त जारी करने के कार्यक्रम में बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अब इधर-उधर नहीं जाएंगे, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिहार का विकास करेंगे। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को लेकर काफी चर्चा हो रही है नीतीश कुमार वो शख्शियत है जो किसी के कारण नहीं अपने काम के लिए जाने जाते हैं क्योंकि जब लालू यादव की सरकार थी तो सरेआम बिहार में लूटपाट हिंसा, अपहरण, फिरौती, गुंडा गर्दी व किचरों से लहूलुहान सड़क, जुआ, रंगदारी इस कदर हावी थी कि किसी औऱ का डर से वोट डालना भी मुश्किल है लेकिन जब 2005 में एनडीए की सरकार आयी तो ख़राब स्तिथि को सुधारना एक मुश्किल काम था जो बाद में नीतीश कुमार की सरकार ने दिखा दिया कि लूटा हुआ बिहार फिर चमकने लगा अतः बिहार में जद( यू ) अगले विधानसभा चुनाव तक पुरी मजबूती से टिके रहेगी इसका कारण यह है की बिहार का राजनीति समीकरण ऐसा है कि वहाँ मुख्य रूप से तीन पार्टी है जो इस प्रकार है बीजेपी, आरजेडी व जद (यू ) जब भी क़ोई दो पार्टी मिलती है तभी सरकार बनती है वहाँ का जातियों का समीकरण ही कुछ इसी तरह का है बीच में लोजपा भी है और जो दो गुटों में है वो भी इधर मजबूत हो रही है और खासकर लोजपा (रामविलास ) के प्रमुख केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान जो किसी का भी खेल बिगाड़ सकती है क्योंकि वहाँ जीत का मार्जिन बहुत ही कम वोटो के अंतर से होता है और बीजेपी 2015 के विधानसभा में अपने कुछ छोटी छोटी सहयोगी पार्टियों के सहारे केवल 55सीट पर सिमट गई थी और जद (यू ) व आरजेडी को 71 व 80सीट मिले थे बिहार के मुख्यमंत्री को इतनी आसानी से समझना किसी के बस की बात नहीं है यदि कहीं वो फिर से पाला बदलेंगे तो बीजेपी अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती है क्योंकि आज भी मुख्य मंत्री नीतीश कुमार का अच्छा जनाधार है एक बार जब जद (यू ) व आरजेडी का गठबंधन बना था तो मैं रिक्शा से रिक्शावाला से पूछा कि क्या भाई आप किस को वोट दे रहें हैं कहा देना तो था लालूजी को लेकिन जब गठबंधन बना है तो जद (यू ) को ही सब मिलकर वोट करेंगे अतः जब तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के रूप में हैं तो ऐसे में बीजेपी क़ोई भी रिस्क लेना नहीं चाहेगी वहाँ अभी भी बाहुबली का राज है तभी तो लोकसभा में जेल से पेरोल पर चुनाव में बुलाया गया और बीजेपी भी जद (यू ) को तोड़ने का क़ोई प्रयास नहीं करेगी क्योंकि अगर उसे तोड़ दी तो उसी का नुकसान हो सकता है क्योंकि बाहुबली सब आरजेडी या निर्दलीय चुनाव लड़ कर एक अच्छा वोट बैंक ला सकती है नीतीश कुमार पाला बदलने में माहिर हैं इसलिए इन सब बदलाव पर कुछ बोल नहीं रहें है लेकिन पर्दे के पीछे उन्हें भी पार्टी के बारे में मालूम हो रहा होगा चूंकि केंद्र में बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं है और सरकार एनडीए की है अतः क़ोई भी रिस्क नहीं लेना चाहेगी क्योंकि श्री नीतीश कुमार जब सारा विपक्ष को एक कर दी थी ऐ सही बात है कि इंडिया गठबंधन के लोगों ने उन्हें भाव नहीं दिया और पाला बदलकर पुनः एनडीए में शामिल हो गए नीतीश कुमार को जब लगा कहीं जद(यू ) में टूट होकर कहीं पीएम के चक्कर में सीएम की कुर्सी भी तेजस्वी को ना चला जाए तो प्रधानमंत्री मोदीजी के पास अन्य लोगों के माध्यम से लोकसभा चुनाव हेतु लगा कि जद (यू ) की सीट आरजेडी और कॉंग्रेस व अन्य के साथ गठबंधन से 4 से 5 सीट से ज्यादा नहीं मिलेगा और ऐसे में जद(यू ) का वजूद ना ख़त्म हो जाए तभी बीजेपी को भी लगा अकेले अधिक सीट मिलना मुश्किल है तो एनडीए में जद(यू ) प्रधान मंत्री श्री मोदीजी के कहने पर ही शामिल हो गई और उसे सम्मानजनक सीट मिला और आरजेडी देखते रह गई और एनडीए ने चिराग और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को मिलकर चुनाव लड़े और बिहार के 40सीट में से एनडीए को बिहार में 40 सांसदों के चुनाव में । बीजेपी , 17। जद (यू ), 16, ।एलजेपी , 6 हम 1सीट,आरएलएम यानि एन डी ए ने कुल 40 सीट पर उम्मीदवार उतारा और जिसमें से बीजेपी , 12 जद (यू ), 12, ।एलजेपी , 5 और हम 1सीट यानि कुल 30 सीट झटक लिए जिसमें जद यू को 16 में से 12सीट मिला कुछ सीटों पर बहुत टफ फाइट था कुछ मुस्लिम बाहुल्य इलाका है जहाँ जद (यू ) सीट लेती है अतः नीतीश कुमार जब तक हैं पार्टी आराम से चलेगी क्योंकि बीजेपी में स्व सुशील मोदी जैसा क़ोई चेहरा नहीं जो सीट ले सके और जनाधार नीतीश कुमार जैसा नहीं है जंगलराज से बिहार को बाहर लाने में जिस तरह नीतीश कुमार ने बिहार को निकाला है वैसे में जद(यू ) के अस्तित्व पर फिलहाल क़ोई खतरा नहीं दिख रहा है अब जब पुल के बारे में एनडीए में बीजेपी कुछ नहीं बोलती है तो कुछ समय बाद उनके राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ के सी त्यागी को भी सोच समझ कर बोलना चाहिए ख़ासकर उससमय जब चुनाव परिणाम के बाद सब की धड़कन रूकी थी तभी उनका बयान आता है कि श्री नीतीश कुमार को पीएम पद का ऑफर मिला था और बाद में राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से हटा दिया गए और तभी तेजस्वी यादव उसका मज़ाक उड़ाते नजर आते हैं कि ऐसा क़ोई बयान नहीं आया था ऐसे में पार्टी के अंदर लगता है अनर्थ हो रहा है अब जब श्री ललन सिंह जद यू के कैबिनेट मंत्री बन गए और विपक्ष का संसद में मुँह बन्द कर देते हैं वैसा तालमेल की कमी पार्टी को लगी होगी और फिर अग्निवीर और जातीय जनगणना पर बेबजह बोलने लगते हैं तो विरोधाभास होने लगता है जंगल त्याग ख़त्म तो बिहार से लगभग ख़त्म हो गया लेकिन बाहुबली का दबदबा अभी भी बिहार में है जैसे श्री आनंद मोहन जिसके लिए श्री नीतीश कुमार ने उम्र कैद की सज़ा को जेल मैनुअल बदल कर जेल से निकाले और जद (यू ) ने उनकी पत्नी लवली आनंद को चुनाव में उतारा और जीत मिली और बीजेपी क़ो भी जब जद यू के नेतृत्व में पुनः सत्ता में 2024 में गठबंधन हुआ तो आनंद मोहन के बेटे चेतन आंनद ने विधानसभा में स्पीकर के विपक्ष में वोट किया और ठाठ से विरोधी दल क़ो दरकिनार कर सत्ता पक्ष में बैठे जबकी वो आरजेडी के विधायक थे ऐ खेल उस समय हुआ जब आनंद मोहन जेल से रिहा होने के बाद लालू जी से मिलने गए और उसने मिलने से मना कर दिया और इधर उनके राज्य सभा के सांसद मनोज झा ने पार्लियामेंट में ठाकुर का कुँआ।। और बाद में उस कविता में सीना ठोक कर कहा -अपने अंदर से मारो ठाकुर क़ो, उनके इस बयान से लालू जी खुश हुए और कहा कि मनोज झा विद्यवान हैं काफी पढ़े लिखें हैं इससे न सिर्फ आंनद मोहन में गुस्सा हुआ पूरा राजनीती क्रम ही बदल गया,एक औऱ बाहुबली अनंत सिंह उर्फ छोटे सरकार पटना से सटे मोकामा में रॉबिनहुड की छवि रखते हैं। अनंत सिंह को एके 47 कांड में सजा हुई जिसके बाद उन्होंने अपनी विधायिकी गंवा दी। लेकिन मोकामा सीट पर उपचुनाव में इनकी पत्नी ने विधायक की कुर्सी बरकरार रखी।वैसे भी बिहार में जब भी सत्ता और सियासत की बात चलती है तो वहां बाहुबलियों का जिक्र जरूर होता है। ये बाहुबली जब तक कुर्सी पर रहे सत्ता के केंद्र में छाए रहे। ऐसे में बीजेपी टिकट देकर अपनी छवि ख़राब नहीं करना चाहेगी और बिहार में जब ढेरों परियोजना का एनडीए द्वारा शुभारम्भ हुआ है तो सत्ता भी नहीं जाने देगी औऱ जद(यू) को संजीवनी देकर एनडीए सरकार को बनाए रखना चाहेगी ताकि बिहार में इन्वेस्टमेंट हो औऱ रोजगार मिल सके।अतः बिहार में बहार है जब तक नीतीश कुमार है।क्योंकि बिहार में अभी भी नीतीश कुमार क़ो सुशासन बाबू के नाम से जाना जाता है। ईएमएस / 04 अप्रैल 25