राष्ट्रीय
03-Apr-2025


नई दिल्ली,(ईएमएस)। शादी का वादा करके संबंध बनाने के नाम पर दुष्कर्म का मामला दर्ज कराए जाने के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंतित है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति बन गई है कि जो रिश्ते शादी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, उनमें केस दर्ज हो रहे हैं। ऐसा होना गलत है। ऐसी स्थिति बन गई है कि रिलेशनशिप में रहना ही एक अपराध हो गया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने कहा कि रोमांस खत्म होने या फिर ब्रेकअप होने का यह मतलब नहीं है कि मामला दुष्कर्म का हो जाए। कोर्ट ने कहा कि अब समाज में जिस तरह से मूल्य बदल रहे हैं। हमें यह समझना होगा कि रिलेशनशिप टूटने का मतलब दुष्कर्म केस ना बन जाए। कोर्ट ने यह टिप्पणी एक शख्स की अर्जी पर सुनवाई करते हुए की, जिसने दुष्कर्म केस खारिज करने की बात कही गई थी। कोर्ट ने कहा कि मान लीजिए कि कॉलेज के दो स्टूडेंट्स के बीच प्यार है। लड़की पीछे हटती है और युवक कहता है कि मैं तुमसे अगले सप्ताह शादी कर लूंगा। फिर वह बाद में ऐसा नहीं करता है। क्या ऐसा करना अपराध माना जाएगा? बेंच ने यह भी कहा कि यह परंपरागत नजरिया है, जिसमें पूरी अपेक्षाएं पुरुषों पर ही डाल दी जाती हैं। इस पर महिला की वकील ने कहा कि यह मामला तो अरेंज मैरिज का है। हालांकि बेंच ने कहा कि आप ही बताएं कि क्या सिर्फ शादी न हो पाना दुष्कर्म मान लिया जाए। हम इस मामले को सिर्फ एक तरीके से नहीं देख सकते। हमें किसी एक जेंडर से ही अटैचमेंट नहीं है। मेरी भी बेटी है। यदि वह भी इस स्थिति में होती तो मैं भी इस व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखता। अब खुद ही बताइए कि क्या इतनी कमजोर दलीलों के आधार पर यह केस बनता है। जस्टिस बिंदल ने कहा कि शिकायतकर्ता को पता था कि यह रिश्ता खत्म हो सकता है। फिर भी उन्होंने संबंध बनाए। कोर्ट ने युवक की अर्जी पर सुनवाई के लिए अगली तारीख तय की है। सिराज/ईएमएस 03अप्रैल25