अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ मामले में जो कहा वह करके दिखला दिया है। इसे लेकर दुनियां के अनेक देश दोस्ती और दुश्मनी वाला फार्मूला तलाशने में लग गए हैं। बताया जा रहा है कि ट्रंप के टैरिफ से किसे क्या नुक्सान और क्या फायदा होगा, लेकिन इतना तो तय है कि ट्रंप ने एक बार फिर अपनी व्यापारिक नीतियों से वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है। हाल ही में उन्होंने चीन, भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत कई देशों पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की है। चीन पर 34 प्रतिशत, बांग्लादेश पर 37 प्रतिशत और पाकिस्तान पर 29 प्रतिशत टैरिफ लगाने के अलावा, भारत से अमेरिका में आयात होने वाले सामानों पर 26 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने की घोषणा की गई। ट्रंप का कहना है कि यह कदम अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा के लिए आवश्यक है। जहां तक भारत की बात है तो ट्रंप ने यहां के लिए 26 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा करते हुए दावा किया कि भारत अमेरिकी आयात पर 52 प्रतिशत टैरिफ लगाता है। हालांकि, भारतीय व्यापार नीति और अमेरिकी निर्यात पर लगाए गए करों का विश्लेषण करने पर यह आंकड़ा अतिशयोक्तिपूर्ण प्रतीत होता है। इसलिए यदि यह कहा जा रहा है कि ट्रंप की यह नई घोषणा भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को प्रभावित कर सकती है, तो गलत नहीं है। देखने वाली बात तो यह भी है कि जिस तरह से ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको को लेकर बयान दिए थे, उसके बाद यही कहा जा रहा था कि इन देशों पर सौ फीसद टैरिफ लगाया जा सकता है, लेकिन इसके उलट व्हाइट हाउस ने कनाडा और मैक्सिको को इस टैरिफ से छूट दे दी। इसकी वजह इन दोनों देशों के साथ अमेरिका के मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौते लागू होने को बताया जा रहा है। मतलब यह हुआ कि ट्रंप बयान कुछ देते हैं और नीति कुछ और लागू करते हैं, जिसका उदाहरण ये दो देशों को टैरिफ से छूट और भारत को दोस्त बताने के बावजूद टैरिफ में शामिल करना है। इस स्थिति में ट्रंप के अन्य देशों पर लगाए गए नए शुल्क वैश्विक व्यापार पर महत्वपूर्ण असर डालने वाले साबित हो सकते हैं, जिससे विश्व अर्थव्यवस्था अस्थिर हो सकती है। ट्रंप की नई टैरिफ नीति के चलते वैश्विक व्यापारिक संतुलन बिगड़ सकता है। विचार करने वाली बात है कि कोविड-19 महामारी के बाद से दुनिया की अर्थव्यवस्था अभी बमुश्किल संभलने का प्रयास कर रही थी कि यह नया झटका निवेशकों की चिंता बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। यह टैरिफ वैश्विक व्यापारिक वृद्धि को धीमा कर सकते हैं, कॉर्पोरेट आय पर असर डाल सकते हैं और महंगाई बढ़ा सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं हुआ कि अमेरिका दुनियां के अन्य देशों से हटकर मंदी की मार से बच रहेगा। बल्कि इसका बुरा असर उस पर भी पड़ेगा। इसका आंकलन करते हुए ही इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल एडवाइजर्स के सीईओ जय हैटफील्ड कहते हैं, कि यह सबसे बुरी स्थिति है, जिसकी बाजार को उम्मीद थी। अमेरिका को मंदी में धकेलने के लिए यह टैरिफ काफी हैं, और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी। इसी प्रकार नोमूरा रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख अर्थशास्त्री ताकाहिदे कियुची ने भी ट्रंप की इस नीति को ग्लोबल फ्री ट्रेड के लिए खतरा बताया है। उनका मानना है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अमेरिका ही वैश्विक मुक्त व्यापार का नेतृत्व कर रहा था, लेकिन इस तरह के टैरिफ से यह प्रणाली बुरी तरह प्रभावित होगी। ऐसे में भारत समेत दुनियां के अनेक देशों के लिए यह नई टैरिफ नीति चिंता का विषय बनी हुई है। भारतीय निर्यातकों को डर है कि इससे उनके उत्पादों की अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता घट जाएगी। अगर अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाया, तो भारतीय व्यापारियों को अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी, जिससे उनकी मांग कम हो सकती है। मांग घटने पर आपूर्ति घट जाएगी और उत्पादन पर विपरीत असर पड़ेगा। कंपनी व उद्योग जगत को खासा नुक्सान उठाना पड़ेगा। ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि अमेरिका के ये कड़े कदम वैश्विक व्यापार युद्ध को और भड़का सकते हैं। यूरोपीय संघ और चीन जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार अमेरिका की इस नीति के खिलाफ जवाबी टैरिफ लगा सकते हैं, जिससे वैश्विक व्यापार और अधिक जटिल हो सकता है। कुल मिलाकर ट्रंप के टैरिफ से केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनियां के अन्य देश भी बुरी तरह प्रभावित होंगे, जिससे अमेरिका खुद भी अछूता नहीं रह पाएगा। अब यदि अमेरिका ने अपनी टैरिफ नीति में नरमी नहीं दिखाई, तो भारत को इसका संतुलित जवाब तो देना ही होगा। गौर करने वाली बात यह है कि भारत अमेरिका से कई महत्वपूर्ण तकनीकी और रक्षा उपकरण आयात करता आया है, और यदि यह व्यापार प्रभावित हुआ तो इससे दोनों देशों के संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। इससे पहले भी, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार विवाद सामने आए हैं। जैसे कि 2019 में ट्रंप प्रशासन ने भारत को ‘जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेस’ से बाहर कर दिया था, जिससे भारत को अमेरिका में व्यापारिक छूट मिलना बंद हो गई थी। अब नए टैरिफ के चलते व्यापारिक रिश्ते और अधिक जटिल होने की आंशका है। डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ दुनिया के व्यापारिक संतुलन को बदल सकते हैं। जहां अमेरिका इसे अपनी आर्थिक स्वतंत्रता की घोषणा मान रहा है, तो वहीं भारत और अन्य देश इसे व्यापारिक संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाला कदम बता रहे हैं। बावजूद इसके टैरिफ पर अमेरिका से लगातार बातचीत होनी चाहिए और व्यापारिक रिश्तों को बचाए रखने के साथ व्यापार को सुगम बनाने की पहल होती रहनी चाहिए। क्योंकि बिना बातचीत के यदि अन्य देश भी जवाबी टैरिफ लगाने जैसा सख्त कदम उठाते हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी के बादल और गहरा सकते हैं। इस मामले में वाकई अमेरिका को नरमी दिखाने की आवश्यकता है। ईएमएस / 03 मार्च 25