नई दिल्ली (ईएमएस)। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, भारत में वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान बच्चों को गोद लेने की संख्या रिकॉर्ड 4,515 रही, जो बीते 12 वर्षों में सबसे अधिक है। इसमें से 4,155 बच्चों को घरेलू स्तर पर अपनाया गया, जिससे देश में कानूनी गोद लेने की बढ़ती स्वीकार्यता दिखाई देती है। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) ने प्रभावी पहचान अभियान के तहत 8,598 नए बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया में शामिल किया, जिससे और अधिक जरूरतमंद बच्चों को परिवार मिल सके। गोद लेने की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकारों के सहयोग से 245 नई एजेंसियां स्थापित की गईं। कारा ने बताया कि अक्टूबर 2024 से जनवरी 2025 तक गोद लेने को लेकर जागरूकता अभियान चलाया और 16 राज्यों में दत्तक माता-पिता के साथ बैठकें आयोजित कीं। नवंबर 2024 में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर की उपस्थिति में वार्षिक सम्मेलन हुआ, इसमें 500 से अधिक हितधारकों ने भाग लिया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत, कारा ने एक व्यापक बाल पहचान अभियान शुरू किया, जिसमें बच्चों को पांच श्रेणियों—अनाथ, त्यागे हुए, आत्मसमर्पित, बिना किसी मुलाकाती वाले और अनुपयुक्त अभिभावकों वाले बच्चों में वर्गीकृत किया गया। गोद लेने की प्रक्रियाओं को तेज करने के लिए डिजिटल हस्तक्षेप किए गए, जिससे औसत प्रसंस्करण समय 3-4 महीने तक कम हो गया। रिश्तेदारों और सौतेले माता-पिता के लिए नए गोद लेने के मॉड्यूल जोड़े गए, जिससे प्रक्रिया अधिक सहज हुई। वित्त वर्ष 2024-25 की ये उपलब्धियां भारत के गोद लेने के ढांचे को मजबूत करने में कारा की सक्रिय भूमिका को दर्शाती हैं। केंद्रीय और राज्य स्तर पर निरंतर सहयोग के साथ, कारा हर जरूरतमंद बच्चे को सुरक्षित और स्नेहमय परिवार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। आशीष/ईएमएस 03 अप्रैल 2025