नई दिल्ली (ईएमएस)। अलग-अलग सूबों में फसल उत्पादन की अलग लागत आने के बावजूद केंद्र देश भर के लिए एक ही न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी तय करती है। हालांकि, कोई भी राज्य एमएसपी के ऊपर जरूरत के हिसाब से बोनस दे सकता है, लेकिन केंद्र इस तरह की किसी भी कोशिश को ठीक नहीं मानती। बहरहाल, मुद्दा यह है कि केंद्र सरकार एमएसपी एक ही तय करती है लेकिन क्या राज्य सरकारें इसके लिए अपनी ओर से कोई प्रस्ताव भेजती हैं? हां बिल्कुल ऐसा ही है। अब सवाल यह आता है किस किस राज्य ने धान, गेहूं जैसी प्रमुख फसलों के लिए केंद्र को कितनी एमएसपी का प्रस्ताव दिया है। केंद्र ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2024-25 के लिए धान की एमएसपी 2300 रुपये क्विंटल तय की थी। जबकि उस साल के लिए महाराष्ट्र ने धान की एमएसपी 4661 रुपये प्रति क्विंटल मांगी थी। केरल ने 3690 रुपये और कर्नाटक सरकार ने 3426 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की मांग की थी। उत्तर प्रदेश ने 3000 और बिहार सरकार ने 3201 रुपये की मांग की थी। तेलंगाना ने 5428 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी मांगी थी। राज्य सरकारों ने केंद्र से अपने सूबे के लिए चाहे जितनी भी एमएसपी का प्रस्ताव दिया हो, लेकिन केंद्र ने प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया। केंद्र ने देश में धान की संपूर्ण लागत महज 2008 रुपये प्रति क्विंटल मानी। ताज्जुब यह है कि सी-2 कॉस्ट बताने के बावजूद केंद्र सरकार ने इस बात को माना नहीं। केंद्र सरकार ने ए2+एफएल फार्मूले के आधार पर धान की उत्पादन लागत को प्रति क्विंटल 1533 रुपये बताया और उस पर न्यूनतम 50 फीसदी मुनाफा जोड़कर 2300 रुपये एमएसपी तय कर दी। वहीं गुजरात सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर एक अप्रैल 2025 से शुरू हुए रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 के लिए गेहूं की एमएसपी 4050 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग उठाई थी। पश्चिम बंगाल ने 3350 और महाराष्ट्र ने गेहूं की एमएसपी भी 4461 रुपये मांगी। जबकि केंद्र ने एमएसपी 2425 रुपये तय की है। यानी इन सूबों की मांग के मुकाबले एमएसपी बहुत कम है। राज्यों से आए प्रस्तावों को दरकिनार कर केंद्र ने एक औसत निकलकर यह बताया कि गेहूं की संपूर्ण लागत 1720 रुपये प्रति क्विंटल आई है। हालांकि सरकार ने सी-2 कॉस्ट के आधार पर एमएसपी तय नहीं किया। केंद्र सरकार ने गेहूं की ए2+एफएल फार्मूले के आधार पर उत्पादन लागत 1182 रुपये ही मानी। इस पर 105 फीसदी का मुनाफा देकर पूरे देश के लिए 2425 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी तय कर दी। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के अनुसार रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 के दौरान गेहूं की एमएसपी के लिए आठ राज्यों ने सिफारिश दी है, लेकिन चार सूबों ने कोई प्रस्ताव नहीं दिया। इसमें गेहूं का सबसे बड़ा उत्पादक उत्तर प्रदेश भी शामिल है। इसके अलावा राजस्थान, हरियाणा और छत्तीसगढ़ से भी गेहूं की एमएसपी को लेकर केंद्र सरकार को कोई प्रस्ताव या सुझाव नहीं दिया है। आशीष दुबे / 02 अप्रैल 2025