अंतर्राष्ट्रीय
03-Apr-2025
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वाशिंगटन (ईएमएस)। आने वाले समय में झील,नदियां और समुद्र अपना अस्तित्व खो दें तो हैरान होने की जरुरत नहीं है। चीनी एकेडमी ऑफ साइंसेज की नई स्टडी कुछ इसी तरह का इशारा कर रही है। जिसमें कहा गया है कि झीलों और नदियों से ऑक्सीजन खत्म हो रही है।1980 से 2017 के बीच झीलों की सतह के पानी में 5.5 प्रतिशत और गहरे पानी में 18.6 प्रतिशत तक ऑक्सीजन की कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट नदियों और समुद्रों में भी देखी गई है, लेकिन कुछ झीलों में ऑक्सीजन स्तर समुद्रों से नौ गुना तेजी से गिरा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले दशकों में झीलों का पारिस्थितिकी तंत्र गंभीर खतरे में पड़ सकता है। इस कमी के पीछे कई वजहें हैं, जिनमें ग्लोबल वार्मिंग सबसे अहम है। 2003 से 2023 के बीच 85प्रतिशत झीलों में हीटवेव्स की संख्या बढ़ी है। पानी का तापमान बढ़ने से उसमें ऑक्सीजन घुलने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे ऑक्सीजन स्तर में गिरावट आती है। इस प्रक्रिया के कारण 7.7प्रतिशत ऑक्सीजन लॉस दर्ज किया गया है। झीलों में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की मात्रा बढ़ी दूसरी बड़ी वजह एल्गल ब्लूम यानी शैवाल का तेजी से फैलना है। खेतों में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों और पशुओं के मल से झीलों में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की मात्रा बढ़ गई है, जिससे शैवाल पनप रहे हैं। ये शैवाल झीलों की ऑक्सीजन सोखकर डेड जोन बना रहे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, एल्गल ब्लूम्स ने कुल 10प्रतिशत ऑक्सीजन लॉस में योगदान दिया है। तीसरी और सबसे बड़ी वजह लॉन्ग-टर्म वार्मिंग है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 55प्रतिशत ऑक्सीजन लॉस का कारण लगातार बढ़ता वैश्विक तापमान है। यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो 2100 तक झीलों में 9प्रतिशत और ऑक्सीजन खत्म हो सकती है। झीलें धरती की किडनी ऑक्सीजन की इस कमी का सीधा असर जलीय जीवों पर पड़ रहा है। न्यूजीलैंड में ईल, ऑस्ट्रेलिया में मरे कॉड और यूरोप में मसल्स की मौत हो रही है। समुद्री जीवों के मारे जाने से मत्स्य उद्योग और पर्यटन प्रभावित हो रहा है। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी झील अराल सी पहले ही पूरी तरह खत्म हो चुकी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि झीलें धरती की किडनी की तरह काम करती हैं, जो पानी को शुद्ध रखती हैं। अगर इनकी ऑक्सीजन खत्म हो गई, तो पीने का पानी, मछलियों की आबादी और संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में आ सकता है। इस गंभीर स्थिति को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। वीरेंद्र/ईएमएस 03 अप्रैल 2025