मनोरंजन
03-Apr-2025
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मुंबई (ईएमएस)। जब कोई कलाकार किसी विशेष संस्कृति से जुड़े किरदार को निभा रहा होता है, तो उसके हावभाव, भाषा और व्यवहार को आत्मसात करना जरूरी हो जाता है। टीवी शो ‘रिश्तों से बंधी गौरी’ में गौरी की भूमिका निभा रहीं ईशा पाठक भी यही मानती हैं। उनका कहना है कि अभिनय में वास्तविकता लाने के लिए लोगों को देखना और समझना सबसे प्रभावी तरीका है। ईशा पाठक ने बताया कि किसी भी किरदार को जीवंत बनाने के लिए आसपास के लोगों का अवलोकन करना जरूरी होता है। उन्होंने कहा, जब हम लोगों को ध्यान से देखते हैं, तो उनकी बोली, हाव-भाव और भावनाओं को व्यक्त करने के तरीके को समझ पाते हैं। कई बार हमारी शूटिंग असली लोकेशन पर होती है, जहां हमें स्थानीय लोगों को देखने और समझने का बेहतरीन अवसर मिलता है। यह हमें अपने किरदार को अधिक वास्तविक रूप से निभाने में मदद करता है। अभिनेत्री ने आगे बताया कि उनके लिए यह प्रक्रिया आसान रही, क्योंकि वह मध्य प्रदेश से आती हैं। उन्होंने बचपन से ही वहां की भाषा, परंपराओं और जीवनशैली को करीब से देखा और समझा है। जब उन्हें ऐसे किरदार निभाने का मौका मिलता है, जो उनकी संस्कृति और क्षेत्र से संबंधित होते हैं, तो उन्हें सहजता से संवाद स्थापित करने में मदद मिलती है। ईशा ने यह भी बताया कि उन्होंने दो साल तक इंदौर में समय बिताया, जिससे वहां की बोली और शब्दावली को और भी गहराई से समझने का अवसर मिला। किसी खास भाषा और संस्कृति के वातावरण में रहने से अभिनय में सहजता आ जाती है और यह स्वाभाविक रूप से वास्तविक लगता है। ईशा पाठक, सावी ठाकुर और स्वाति शाह द्वारा अभिनीत ‘रिश्तों से बंधी गौरी’ एक प्रेरणादायक कहानी है, जो गौरी नाम की एक बहादुर और समझदार लड़की के संघर्ष और साहस को दर्शाती है। इस शो में गौरी की कहानी दिखाई गई है, जो अनचाहे विवाह के बाद बुंदेला परिवार की बहू बनती है। सुदामा/ईएमएस 03 अप्रैल 2025