ढाका (ईएमएस)। छात्र आंदोलन के बाद पूर्व पीएम शेख हसीना को बांग्लादेश की सत्ता से बेदखल करने के बाद इस्लामी कट्टरपंथी अब अपने असली मकसद पर लौट आए हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सामने इस्लामी कट्टरपंथी फिर से सक्रिय हो गए हैं। एक शहर में धार्मिक कट्टरपंथियों ने घोषणा की कि युवा महिलाएं अब फुटबॉल नहीं खेल सकतीं। दूसरे शहर में, उन्होंने पुलिस को एक उस व्यक्ति को छोड़ने के लिए मजबूर किया जिसने सार्वजनिक रूप से अपने बाल न ढकने के कारण एक महिला को परेशान किया था, फिर उस शख्स को फूलों की माला पहनाई। ढाका में एक रैली में कट्टरपंथी प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार इस्लाम का अपमान करने वाले किसी भी व्यक्ति को मौत की सजा नहीं देती है, तब वे अपने हाथों से उस मौत की सजा दी जाएगी। नए संविधान का मसौदा तैयार कर रहे विभिन्न राजनीतिक दलों के अधिकारियों ने माना कि दस्तावेज में बांग्लादेश की परिभाषित विशेषता के रूप में धर्मनिरपेक्षता को समाप्त किया जाएगा। इसके स्थान पर बहुलवाद को स्थापित किया जाएगा बांग्लादेश में हसीना की सरकार गिरने के बाद रात को देशभर में अहमदिया मुस्लिम संप्रदाय के पूजा स्थलों पर भीड़ ने हमले किए। अहमदिया समुदाय अभी भी डर में जी रहा है। उनके प्रार्थना हॉल में उपस्थिति लगभग आधी रह गई है। कट्टरपंथियों की मनमानी से सबसे ज्यादा दुखी छात्राएं हैं, जिन्होंने हसीना को सत्ता से हटाने के आंदोलन में साथ दिया था। उन्हें उम्मीद थी कि एकदलीय शासन की जगह लोकतांत्रिक खुलेपन की व्यवस्था लाएगा, लेकिन अब वे ठगा हुआ महसूस कर रही हैं। छात्रा शेख तस्नीम अफरोज एमी ने कहा, हम विरोध प्रदर्शनों में सबसे आगे थे। हमने सड़क पर अपने भाइयों की रक्षा की। अब 5-6 महीने बाद पूरी बात बदल गई है।’ बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में महिलाओं का अहम स्थान हैं। देश के वर्क फोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत हैं, जो दक्षिण एशिया में सबसे अधिक है। आशीष दुबे / 02 अप्रैल 2025