नई दिल्ली,(ईएमएस)। केंद्र सरकार ने संसद में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों और जमीनों को लेकर नया बिल पेश कर दिया। वक्फ की संपत्तियों के साथ ही आमजन के मन में मंदिरों की जमीनों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर देश में मंदिरों के पास कुल कितनी जमीनें हैं और उन जमीनों का मालिक कौन है। क्या मंदिर के पुजारी को ही इन जमीनों का मालिक माना जाता है या फिर किसी को मालिकाना हक दिया गया है। देश में मंदिरों की कुल जमीनों का सही-सही आंकड़ा तो मौजूद नहीं है, लेकिन कुछ राज्य सरकारों ने जरूर मंदिरों के अधीन आने वाली जमीनों का आंकड़ा जारी किया है। इस बारे में कैग रिपोर्ट भी मंदिरों के अधीन आने वाली जमीनों का आंकड़ा पेश करती हैं। रिपोर्ट की मानें तो सिर्फ 4 राज्यों में ही मंदिरों के पास जमीनें हैं, जितनी वक्फ बोर्ड के पास देशभर में नहीं हैं। कैग रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण भारत के चार प्रमुख राज्यों में सबसे ज्यादा मंदिर हैं और उनके पास जमीनें भी काफी हैं। इस मामले में दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य की सरकार ने भी आंकड़े जारी कर बताया कि उनके यहां करीब 44 हजार मंदिर हैं, जिनके पास करीब 5 लाख एकड़ जमीन है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश के इंडोमेंट विभाग ने बताया है कि उनके यहां मंदिरों के पास 4.6 लाख एकड़ जमीन होने का खुलासा किया है। इसके अलावा तेलंगाना में 87 हजार एकड़ तो ओडिशा में करीब 13 हजार एकड़ जमीनें मंदिरों के अधीन हैं। इस तरह यह आंकड़ा 10 लाख एकड़ को भी पार कर जाता है। सिर्फ दक्षिण भारत में ही मंदिरों के पास जमीनें हैं। यूपी में भी मंदिरों के पास करीब 4.6 लाख एकड़ जमीन है, जिसमें से 1 लाख एकड़ सिंचाई वाली जमीन है। पश्चिम बंगाल में भी मंदिरों के अधीन हजारों एकड़ जमीन है तो महाराष्ट्र भी इस मामले में पीछे नहीं है। मोटा आंकड़ा देखें तो देशभर में मंदिरों के पास करीब 20 लाख एकड़ से भी ज्यादा जमीन होने का अनुमान है। मंदिरों के मुकाबले वक्फ बोर्ड के पास देशभर में कुल 9.4 लाख एकड़ जमीन है, जबकि चर्च के पास 2 से 3 लाख एकड़ जमीन होने का दावा है। अगर इन संपत्तियों की कीमत का अंदाजा लगाएं तो वक्फ बोर्ड की कुल संपत्ति का बाजार मूल्य करीब 1.2 लाख करोड़ रुपए तो चर्च की संपत्ति का अनुमान 1 लाख करोड़ से ज्यादा है। इसी लिहाज से मंदिरों की संपत्ति का अंदाजा लगाएं तो सिर्फ तिरुपति बाजाली मंदिर के पास ही करीब सवा 2 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति होने का अनुमान है। देश में मंदिरों के पास सबसे ज्यादा जमीनें हैं, लेकिन सवाल ये है कि इन जमीनों का मालिक कौन है। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस हेमंत गुप्ता और एएस बोपन्ना ने फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि मंदिर का पुजारी उसकी जमीनों या संपत्तियों का मालिक नहीं है। उसका काम सिर्फ इन संपत्तियों और जमीनों के प्रबंधन करने का है। इन जमीनों और संपत्तियों पर उन देवी-देवताओं का मालिकाना हक माना जाएगा, जिनका वह मंदिर होगा। सिराज/ईएमएस 02अप्रैल25