रायपुर(ईएमएस)। महादेव सट्टा ऐप मामले को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में उबाल आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ CBI द्वारा FIR दर्ज किए जाने के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस जहां इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, वहीं भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करार दे रही है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने पीसीसी चीफ दीपक बैज के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि कानून से बड़ा कोई नहीं होता। उन्होंने कहा सरकार सभी घोटालों की मॉनिटरिंग कर रही है। सत्ता का दुरुपयोग कर गलत काम करने वालों पर कार्रवाई सुनिश्चित है। कांग्रेस को इस पर खुश होना चाहिए कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो रही है, उन्हें जांच में सहयोग करना चाहिए। वहीं, पीसीसी चीफ दीपक बैज ने CBI की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि CBI ने महादेव सट्टा मामले में 21 से ज्यादा लोगों पर FIR दर्ज की, लेकिन सरकार का मकसद असली सरगनाओं को बचाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि महादेव सट्टा ऐप के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को 8वें नंबर पर और भूपेश बघेल को 6वें नंबर पर नामित कर सरकार असली गुनहगारों को बचाने का प्रयास कर रही है। CBI ने महादेव सट्टा ऐप मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को छठवें आरोपी के रूप में नामित किया है। इस मामले में कुल 21 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जिनमें ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल भी शामिल हैं। महादेव सट्टा ऐप को ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए बनाया गया था, जिसके जरिए क्रिकेट, बैडमिंटन, टेनिस, फुटबॉल और चुनावों तक में अवैध सट्टा लगाया जाता था। इसका नेटवर्क तेजी से फैलते हुए छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक खाता धारकों तक पहुंच गया। इस मामले की जांच सबसे पहले आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की थी। बाद में राज्य सरकार ने इस केस को CBI को सौंप दिया, जिससे जांच व्यापक स्तर पर हो सके। CBI की छापेमारी में भूपेश बघेल के निवास समेत कई ठिकानों से बड़ी मात्रा में डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जब्त किए गए हैं। जब्त दस्तावेजों में वित्तीय लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं। सत्यप्रकाश(ईएमएस)02 अप्रैल 2025