पल भर में ही लाशों के ढेर लग गए और जिन्दा मानव चिथड़ों में बदल गए शव क्षत विक्षत हो गएl चारों तरफ चीखो पुकार मच गई लोग एकदम दफन हो गए धार्मिक नगरी श्मशान बन गईl कैसी विडंबना है की नवरात्रि के पहले दिन धार्मिक मनीकरण में छः लोग काल के गाल में समा गए बंगलुरु से घूमने आये पर्यटकों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा की उनकी इतनी दर्दनाक मौत होगी l फितरती व लालची मानव पहाड़ों का सीना छलनी कर रहा है और दरकते पहाड़ लोगों की जिंदगी लील रहे हैं पहाड़ों से छेड़छाड़ मत कीजिये अगर छेड़छाड़ बंद नहीं की तो प्रतिदिन हादसे होते रहेंगे l चट्टाने काल बनकर बेकसूर लोगों को मौत के घाट उतार रही हैंl भरमौर से लेकर किन्नौर तक पहाड़ो से चट्टानें गिर रही हैं और लोग बेमौत मारे जा रहे हैं l ताज़ा घटनाक्रम में कल रविवार को मनीकरण में पहाड़ी से अचानक विशालकाय पेड़ गिरने से छः लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और छः लोग घायल हो गए यह हादसा गुरुद्वारा साहिब के नजदीक हुआ इस पेड़ की चपेट में आने से बेमौत मारे गए मरने वालों में ज्यादातर पर्यटक थे कुछ स्थानिय लोग भी हैं यह पर्यटक बंगलुरु के रहने वाले थे इनमें तीन महिलाएं और तीन पुरुष हैं l यह कोई पहला हादसा नहीं है इससे पहले काफ़ी दर्दनाक हादसे हो चुके हैं लेकिन कोई सबक नहीं सीख रहा है अगर पिछले हादसों से सबक लिया होता तो आज यह हादसा नहीं होता और लोग असमय नहीं मारे जाते l 2024 में चंडीगढ़ -मनाली हाईवे पर नौ मील के पास देर रात हादसा हो गया केलांग से शिमला जा रही सरकारी बस पर चट्टान गिरने से तीन सवारियां घायल हो गई थी बस का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था l गनीमत रही की कोई बड़ा हादसा होने से टल गया था l साल 2023 में भी एक कार पर बड़ी चट्टान गिरने से एक बच्चे की मौत हो गई थी l किन्नौर में भी ऐसा ही हादसा हुआ था जहाँ दो लोग चट्टान के नीचे दब कर मारे गए थे l हनोगी के पास भी एक कार पर विशालकाय पत्थर गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी lभरमौर में भी ऐसा दर्दनाक हादसे में तीन लोग मारे गए थे l यह हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं सरकार व प्रशासन को इन हादसों पर संज्ञान लेना चाहिए ताकि भविष्य में इन दर्दनाक हादसों पर रोक लग सके l फोरलेन के लिए.सड़क को चौड़ा करने के लिए पहाड़ों को मशीनों से काटा जा रहा और पहाड़ से बड़े बड़े पत्थर गिर रहे हैं l गत वर्ष बरसात में काफ़ी लोग अपनी जान गंवा चुके हैं लेकिन यह कार्य नहीं रुक रहे हैं lगत वर्ष 12 अगस्त 2017 की रात को कोटरोपी में प्रकृति ने अपना रौद्र रुप दिखाकर ऐसी खौफनाक तबाही मचाई थी की रौगटे खडे हो गए थे कोटरोपी में हुए इस हादसे ने पूरे हिमाचली समुदाय को झझकोर दिया था।पल भर में लाशों के ढेर लग गए लाशों का ढांपने के लिए कफन कम पड़ गए थे।मौत का यह मंजर सदियों तक याद रहेगा। 12 अगस्त 2017 काली रात को कोटरोपी में प्रकृति का कहर सैकडों अनमोल जिंदगियां लील गया था।पठानकोट -मंडी नेशनल हाईवे 154 के कोटरोपी में चलती बसों पर पहाड़ गिरने से 48 लोगों की दर्दनाक मौत से हर हिमाचली गमगीन था।12 अगस्त की काली रात को प्रकृति ने ऐसा कहर मचाया की पल भर में यात्रियों को मौत की नींद सुला दिया था।यात्रियों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि कोटरोपी में मौत उनका इंतजार कर रही है।पहाड़ गिरने से चंबा से मनाली तथा मनाली से कटडा़ जा रही दो बसे दब गई थी। सैंकडों यात्री जमीदोज हो गए थे बसों में लाशे क्षत-विक्षत हो चुकी थी तथा टुकडों में तब्दील हो चुकी थी।चारों तरफ चीखो पुकार मची हुई थी लोग अपनांे को बदहवाश होकर ढूढ रहे थे मगर उनके सगे-संम्बधी चिर निंद्रा में सो चुके थे।हर तरफ लाशें दफन हो चुकी थी। प्रकृति ने ऐसी तबाही मचाई थी कि जीते जागते इंसान चिथडों में बदल गए थे तबाही का ऐसा मंजर बहुत ही भयानक था जिसे लोग ताउम्र नहीं भूल सकते आखों के सामने देखते ही देखते लोग मौत के आगोश में समा गए थे बसंे जमीदोज हो गई थी । 46 शव निकाले गए थे। पहाड़ के मलवे से लोगों के आशियाने धरसशाही हो गए थे गनीमत रही की किसी की जान नहीं गइ थी।अभागे यात्री अपने गतब्व पर पहुचने से पहले ही हादसे का शिकार हो गए थे।उनका सफर कोटरोपी में खत्म हो गया था। 12 अगस्त की काली रात प्रदेश वासियों को कभी नहीं भूलेगी।इस हादसे में कुल्लु की महिला ने अपने तीन बच्चे खो दिये थे वे अपने दादा के पास चंबा गए थे। ।इस विनाशकारी प्रकृति के कहर से जनमानस खौफजदा है। कही फिर से पहाड़ का मलवा न आ जाए लोग खौफ के साए में राते काट रहे हैं। इससे पहले हिमाचल में प्रकृति के कहर से हजारों लोग मारे जा चुके हैं।बरसात में देश में कई भीषण त्रासदियां हो चूकी है। कहीं मकानों के ढहने से बच्चे मारे गए तो कहीं सैंकडों पशुओं की दबकर मौत हो गई।दर्जनों लोग पानी में बह गए और करोडों की संपति तबाह हो गई। पहाड के मलवे की चपेट में आने से काफी जानमाल का नुक्सान हो रहा है।प्रकृति की इस विभिषिका में हजारों लोग अपंग हो गए है बच्चे अनाथ हो जाते है लाशे मलवे में दफन हो गई है। सरकार को चाहिए की प्रत्येक गांव से लेकर शहरो तक आपदा प्रबंधन कमेटियां गठित करनी चाहिए जिसमें डाक्टर नर्स व अन्य प्रशिक्षित स्टाफ रखना चाहिए ताकि व त्वरित कारवाई करके लोगों केा मौत के मुंह से बचा सके ।अक्सर देखा गया है कि जब तक आपदा प्रबंधन की टीमें घटना स्थनों पर पहुचती है तब तक बची हुई सासंे उखड़ जाती है लाशों के ढेर लग जाते है।अगर समय पर आपदा ग्रस्त लोगों को प्राथमिक सहायता मिल जाए तो हजारों जिदंगियां बचाई जा सकती हैं। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सरकार को कालेजों व स्कूलों में भी माकड्रिल जैसे आयोजन करने चाहिए ताकि अचानक होने वाली आपदाओं से अपना व अन्य का बचाव किया जा सके।स्कूलो व कालेजों मे चल रहे राष्ट्रीय सेवा योजना व स्काउट एंड गाइड के स्वंयसेवियों को आपदा से निपटने के लिए पारगंत किया जाए।अगर यही स्वयसेवी अपने घर व गांवों में लोगों को आपदा से बचने के तरीके बताए तो काफी हद तक नुक्सान को कम किया जा सकता है। सरकार को चाहिए कि आपदा से बचाव के लिए प्रत्येक विभाग के कर्मचारियों को पूर्वाभ्यास करवाया जाए ताकि समय पर काम आ सके।पुलिस व अग्शिमन के कर्मचारियों को भी समय ≤ पर ऐसे आयोजन करते रहना चाहिए।अगर सभी लोग आपदा से बचाव के तरीके समझ जाएगें तो तबाही कम हो सकती है।प्रकृति के प्रकोप से बचना है तो हमें अपनी जीवन शैली बदलनी होगी,छेड़छाड़ बंद करनी होगी।अगर अब भी मानव ने प्रकृति पर अत्याचार बंद नहीं किया तो प्रकृति अपना बदला लेती रहेगी और मानव को सबक सीखाती रहेगी। बादल फटते रहेंगे, बाढ़े आती रहेगी वक़्त अभी संभलने का है lचंडीगढ़ मनाली मार्ग पर पंडोह के पास बहुत ही खतरा बना रहता है की कब कहाँ से पत्थर मौत बनकर आ जाये इसकी कोई गारंटी नहीं होती प्रतिदिन हो रहे हादसों से लोग खौफ में हैं l जुलाई में बरसात शुरू हो जाएगी फिर यह पत्थर गिरना शुरू हो जाते हैं और लोग बेमौत मारे जाते हैं l पहाड़ों का काटना बंद कीजिये l सरकार को चाहिए की खतरे वाले स्थानों पर आपदा सुरक्षा टीम तैनात करनी चाहिए और खतरे के समय लोगों को आगाह करती रहे ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके l (वरिष्ठ पत्रकार) (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 2 अप्रैल /2025