नई दिल्ली (ईएमएस)। धरती पर समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं, लेकिन यह प्राकृतिक आपदा कब और कितनी तीव्रता से आएगी, इसका पूर्वानुमान लगाना अभी संभव नहीं हुआ है। भूकंप का मुख्य कारण पृथ्वी की टैक्टोनिक प्लेट्स का हिलना होता है। हमारी धरती चार परतों में बंटी हुई है इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैनटल को मिलाकर लिथोस्फेयर कहा जाता है, जो कई प्लेट्स में विभाजित है। ये प्लेट्स बहुत धीमी गति से हिलती रहती हैं, लेकिन जब ये आपस में टकराती हैं या अचानक खिसकती हैं, तब ऊर्जा निकलती है, जिसे हम भूकंप के रूप में महसूस करते हैं। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर मापी जाती है। अगर यह 3.0 से कम होता है, तब महसूस करना मुश्किल होता है, लेकिन 4.0 से 5.0 के भूकंप से खिड़कियां और दरवाजे हिल सकते हैं। 6.0 से 7.0 की तीव्रता वाले भूकंप से इमारतें गिर सकती हैं और जान-माल का नुकसान हो सकता है। 8.0 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंप पूरी तरह से विनाशकारी होते हैं, जो पुलों, ऊंची इमारतों और सड़कों को तहस-नहस कर सकते हैं। अगर भूकंप समुद्र के अंदर आता है, तब इससे सुनामी भी आ सकती है, जो तटीय इलाकों में भारी तबाही मचा सकती है। बताया जाता हैं कि जानवरों को भूकंप का पहले से आभास हो जाता है। इतिहास में भी इसतरह के कई उदाहरण मिलते हैं, जहां भूकंप से पहले जानवर असामान्य व्यवहार करने लगते हैं। 373 ईसा पूर्व ग्रीस में आए भूकंप से पहले चूहे, सांप और कीड़े-मकोड़े अपने बिलों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे थे। वैज्ञानिकों ने इस विषय पर शोध कर पाया है कि कुछ जानवर भूकंप से पहले बेचैन हो जाते हैं, लेकिन यह सिद्ध नहीं हो पाया कि वे वास्तव में भूकंप की भविष्यवाणी कर सकते हैं। अब तक कोई वैज्ञानिक यह सटीक रूप से नहीं बता सका है कि भूकंप कब और कहां आएगा। अमेरिका के भूगर्भीय सर्वेक्षण विभाग के वैज्ञानिक केवल यह गणना कर सकते हैं कि किसी क्षेत्र में भूकंप आने की संभावना है, लेकिन इसकी सटीक तारीख, समय और तीव्रता का अनुमान लगाना संभव नहीं है। कुछ लोगों का मानना था कि मौसम का भी भूकंप से संबंध होता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इस धारणा को खारिज किया है। प्राचीन समय में अरस्तू ने कहा था कि जब हवाओं को आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिलता, तब वे दबाव बनाकर भूकंप ला सकती हैं, लेकिन आधुनिक शोधों ने अरस्तू की इस बात को गलत साबित किया है। भूकंप पूरी तरह से टैक्टोनिक गतिविधियों का परिणाम होते हैं और इनका मौसम से कोई लेना-देना नहीं है। भूकंप से बचाव के लिए मजबूत भवन निर्माण, जागरूकता और सतर्कता ही सबसे प्रभावी उपाय हैं। आशीष/ईएमएस 02 अप्रैल 2025