पसीना निकलना हमारे शरीर की स्वाभाविक और अनिवार्य प्रक्रिया है। पसीने के रूप में हमारे शरीर की गंदगी और विषैले तत्व हमारे शरीर से बाहर निकल जाते हैं ।यह पसीना गर्मियों के दिनों में हमारे शरीर को ठंडा रखने में मददगार रहता है । लेकिन अब भारत में गर्मी का मौसम आते ही समाचार पत्र, पत्रिकाओं से लेकर चैनलो पर आने वाले आकर्षक और भ्रामक विज्ञापनों से प्रभावित होकर पसीने की दुर्गंध से छुटकारा दिलाने वाले टेलकम पावडर और क्रीम के उपयोग का चलन बढ़ रहा है। लोग पसीने और इसकी दुर्गंध से छुटकारा पाने के लिए विभिन्न प्रकार के सुगन्धित टेलकम पाउडरों और दुर्गन्धनाशक क्रीमों का उपयोग करना प्रारंभ कर देते हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में ऐसे क्रीम, टेलकम पाउडर का भारतीय बाजार चार गुना बढ़ चुका है। पसीने की दुर्गन्ध नाशक क्रीम -पावडर तेजी से लोकप्रिय हो इसमें शक नहीं कि बहुत कम लोग यह जानते है कि ये टेलकम पाउडर और क्रीम उनके शरीर की त्वचा के साथ-साथ गुर्दे और फेफड़े जैसे महत्वपूर्ण अंगों को क्षति पहुंचा सकते हैं। अधिकांश टेलकम पाउडर और दुर्गंध नाशक क्रीम पसीनारोधी होते हैं। इसमें काम आने वाले रसायन त्वचा के छिद्रों को बंद कर देते हैं। जिससे प्रत्यक्ष रूप से पसीने का निकलना तो बंद हो जाता है ।यह परोक्ष रूप से तमाम सारी खतरनाक बीमारियों को आमंत्रित करने के लिए अग्रसर हो जाता है ।यदि त्वचा के छिद्र बंद हो जाए तो गुर्दे और त्वचा से निकलने वाले विषाक्त पदार्थ का बाहर निकलना पूरी तरह बंद हो जाएगा। बिषात पदार्थों के नहीं निकलने से गुर्दे को भी ज्यादा काम करना पड़ेगा और फिर इसमें भी खराबी आने का अंदेशा बना रहता है ।इतना ही नहीं ,त्वचा से पसीना निकलने की प्रक्रिया रक्त में ऑक्सीजन पहुंचकर इसके शुद्धिकरण में भी मददगार होती है और यदि ये छिद्र बंद हो जाए तो यह प्रक्रिया भी निश्चित रूप से अवरोधित होगी और बदले में फेफड़ों को ज्यादा काम करना पड़ सकता है ।बाजार में बिकने वाले तमाम दुर्गंध नाशक क्रीमों एवं टेलकम पाउडर में प्रयुक्त होने वाली सुगंधित पदार्थों के प्रभाव से पसीने की बदबू तो दूर हो जाती है। लेकिन पाउडर बनाने वाली कंपनियां इसमें ऐसी सुगंधों का इस्तेमाल करती है, जो मोहक होती है और मस्तिष्क के एक खास हिस्से के न्यूरानों को अपनी गिरफत में कर लेती हैं ।इसका इस्तेमाल करने से पसीना ठीक ढंग से बाहर नहीं निकल पाता और यदि थोड़ा बहुत निकलता भी है तो वह भी हवा में मैं नहीं मिल पाने के कारण ठीक तरह से सुख नहीं पाता ,परिणाम स्वरुप इसके आसपास मौजूद तमाम सारे बैक्टीरिया की गतिविधियों से और अधिक दुर्गन्ध जन्म ले लेती है। जो कि हानिकारक होती है। वैसे तो टेलकम पाउडर कई तरह के होते हैं, जो अत्यंत महीन चूर्ण से बने होते हैं। इसका सर्वाधिक भाग मैग्नीशियम सिलिकेट से बना होता है, लेकर अच्छे टेल कम पाउडर सफेद रंग के गंधहीन चूर्ण से बने होते हैं ।इसे अगर चुटकी में लिया जाए तो यह फिसलता है । महंगे टेलकम पाउडर में सिलिकेट के अलावा काओलिन , कैल्शियम कार्बोनेट, जिंक ऑक्साइड, जिंक स्टीयरेट, मैग्नीशियम कार्बोनेट के साथ-साथ सुगंधित पदार्थ मिश्रित होते हैं । यह सभी जानते हैं कि जिंक ऑक्साइड एक जीवाणु नाशक रसायन है। अनेक टेलकम पाउडर में तो टिटेनियम ऑक्साइड और चाक मिट्टी भी मिलाई जाती है । इसी तरह सुगंध के लिए आमतौर पर पौधों के रस से तैयार क्रिस्टल पावडर मिश्रित किया जाता है। जबकि क्रीम वाले दुर्गंधनाशक में मुख्य रूप से आक्सीकिवनोलिन सल्फेट नामक विषैले केमिकल को मिलाया जाता है जो केंद्रीय तंत्र का तंत्र को उत्तेजित करता है ।इसमें प्रसिद्ध विषैला केमिकल फॉर्मलडिहाईड की मात्रा भी युक्त होती है ।यह सर्वविदित है कि इस केमिकल का इस्तेमाल पोस्टमार्टम के पश्चात शव लेपन में किया जाता है ।यह दुर्गंध नाशक के निर्माण में एक अन्य केमिकल जिंक सल्फो कैबिनिट भी प्रयुक्त होता है ,जो बहुचर्चित कीटनाशक है। इसका उपयोग इसके संकुचन गुण को मध्य नजर रखते हुए किया जाता है। पेंसिलनुमा दुर्गन्ध नाशक तो शरीर के लिए और भी अधिक हानिकारक हो सकता है। पेंसिलनुमा दुर्गन्ध नाशकों में आमतौर पर पेटोलेकटम, सोडियम हाईड्रोआकसाईड,बेजोइक अम्ल और क्लोरेट हाइड्रेट प्रयुक्त होता है, जो त्वचा में खुजली और जलन उत्पन्न करता है। उक्त जलन त्वचा के अनेक रोगों को जन्म देती है। सोडियम हाइड्रोक्साइड, यह कास्टिंक सोडा का ही रूप है। जिसका उपयोग कपड़े धोने में किया जाता है। यह त्वचा को जला सकता है। इसी तरह बेजोइक अम्ल अत्यंत जहरीला और क्लोरेट हाइड्रेट क्षतिकारक है। इसमें इतनी ताकत होती है कि यह कपड़ा और और सख्त से सख्त धातु को भी गला सकता है। यदि भूलवश बेजोइक अम्ल अथवा क्लोरेट हाइड्रेट की कुछ बूंदों को आदमी गटक ले तो बेहोशी आने लगती है यह तक कि कभी कभी तो मौत तक हो सकती है। जो व्यक्ति इन सब का उपयोग नहीं करते, उन्हें इन सबके इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति से दूर रहना चाहिए। क्योंकि गर्मी के साथ दिनों में ये विषैले पदार्थ वाष्पीकृत होकर विषैली गैस में तब्दील हो जाती है,जो सांसों के माध्यम से शरीर के भीतर पहुंचकर क्षति पहुंचा सकती है। बाजार में बिकने वाले दुर्गन्ध नाशक क्रीम - पाउडर का काफी लम्बे समय तक इस्तेमाल करने से त्वचा के साथ साथ शरीर के अन्य अंगों पर भी काफी दुष्प्रभाव पड़ सकता है। (लेखक के विषय में -मध्यप्रदेश शासन से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं) ईएमएस / 02 अप्रैल 25