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(विचार-मंथन) सर्वोच्च सदन में प्रधान सेवक की महिला विरोधी टिप्पणी के निहितार्थ (लेखक-डॉ हिदायत अहमद खान/ईएमएस)

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भारतीय जनता पार्टी और शीर्ष पार्टी नेतृत्व पर सदा से महिला विरोधी विचारधारा के पोषक होने के आरोप लगते रहे हैं। इसलिए विरोधी कहते हैं कि भाजपा में महिला नेत्रियों को कभी भी वो जगह नहीं मिल पाती जिसकी कि वो हकदार होती हैं। इसके साथ ही महिला आरक्षण को लेकर भी खूब बातें की जाती हैं, लेकिन यहां इन सब बातों से हटकर देश के सर्वोच्च सदन में जो घटा उसे लेकर नारी सम्मान के साथ ही साथ देशहित में विचार-विमर्श करने की आवश्यकता महसूस हो गई है। दरअसल हमारे प्रधान सेवक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सर्वोच्च सदन में सदन की महिला सदस्य रेणुका चौधरी की हंसी पर ऐसी टिप्पणी करते नजर आए जिससे विवाद खड़ा हो गया है। जहां तक घटनाचक्र का सवाल है तो राज्यसभा में जबकि प्रधानमंत्री मोदी भाषण दे रहे थे तभी कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी के हंसने की आवाज सुनकर राज्यसभा अध्यक्ष वेंकैया नायडु ने कहा कि 'आपको क्या हो गया है, अगर आपको समस्या है तो डॉक्टर के पास जाइए।' अध्यक्ष की इस टिप्पणी के बीच ही प्रधानमंत्री मोदी मुस्कुराए और बुलंद आवाज में कहना शुरु कर दिया कि 'सभापति रेणुका जी को आप कुछ मत कहिए, रामायण सीरियल के बाद ऐसी हंसी सुनने का आज सौभाग्य मिला है।' इस द्विअर्थी वाक्य ने जहां सीधे-सीधे महिला सांसद को निशाने पर ले लिया, वहीं संपूर्ण महिला समाज को अपमानित करने जैसा संदेश भी दे दिया।  जहां तक रेणुका चौधरी के हंसने की बात है तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि 'प्रधानमंत्री मोदी हमें बता रहे थे कि आधार कार्ड का बीज उस समय बोया गया था जब आडवाणी जी थे, मुझे इस बात पर हंसी आ गई। इतना 360 डिग्री मुकर जाते हैं।' बहरहाल यह तो सीधी प्रतिक्रिया थी, जिसे सुना गया और समझ लिया गया कि कहीं कोई गंभीरता वाली बात नहीं है, लेकिन इसमें जो पैंच था वह अन्य लोगों की टिप्पणियों से उजागर हुआ। इसे समझने के लिए मशहूर शायर कैफ भोपाली की गजल की ये दो पंक्तियां देखें, जिसमें वो कहते हैं, 'तिरछे तिरछे तीर नजर के चलते हैं, सीधा सीधा दिल पे निशाना लगता है।' मतलब साफ है कि जो कहा गया उसके मायने अनेक थे। इसलिए इसकी मारकशक्ति ने वहीं असर दिखाया जिनके लिए इस तीर को छोड़ा गया था। इस बात को पुख्ता करने के लिए भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय के ट्वीट को भी देख सकते हैं। दरअसल उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का हिस्सा ट्वीट कर लोगों से पूछा कि आपको किस किरदार की याद आई। इसके साथ ही उन्होंने रामायण में शूर्पणखा की नाक काटे जाने का दृश्य भी ट्विटर पर पोस्ट कर दिया। इसने भी रेणुका चौधरी के कहे को सही साबित कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने उनके ऊपर निजी टिप्पणी की है। वो कहती हैं कि 'जो प्रधानमंत्री ने कहा उस पर बाहर क़ानून लागू हो सकता है। यह महिलाओं की सामाजिक स्थिति की निंदा है।' इस पर अगर बात न भी की जाए तो सवाल यह उठता है कि प्रधानमंत्री मोदी जी सर्वोच्च सदन में महिलाओं की हंसी पर टिप्पणी के साथ ही  कांग्रेस की बुराई क्योंकर कर रहे थे? उन्होंने पूर्व की सरकारों को कोसने का काम यहां पर भी क्योंकर जारी रखा? आखिर सरकार ने क्या अपने कार्यकाल में जनहित के कार्य नहीं किए हैं जिन्हें की सदन में बताया जा सके? ये तमाम सवाल संसद में प्रधानमंत्री मोदी के डेढ़ घंटे के भाषण को सुनने के बाद उठे हैं और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इशारों ही इशारों में उन्हें उठाने का काम भी कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने पूछा है कि किसान, रोजगार पर मोदी जी चुप क्यों हैं। इसका तो यही मतलब हुआ कि उनके पास देश की बेहतरी के साथ ही साथ हमारे गरीब किसान को आत्महत्या से रोकने के लिए कोई योजना है ही नहीं। गौरतलब है कि मोदी सरकार ने नोटबंदी करके देश को बताया था कि इससे आतंकवादियों को होने वाली फंडिंग रुक जाएगी, लेकिन उसके बाद आतंकवादी गतिविधियों समेत आतंकी हमले भी बढ़ गए, इस प्रकार सरकार का यह दावा फेल हो गया। इसी प्रकार उन्होंने कहा था कि कालाधन जो कि विदेश में जमा है उसे वापस लाया जाएगा, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ। यही नहीं बल्कि उन्होंने कहा था कि मध्यम वर्ग पर लगने वाला आयकर हटा दिया जाएगा, लेकिन सभी जानते हैं कि इस समय सबसे ज्यादा करों की जद में मध्यवर्ग ही है, जबकि गरीब और अमीर को राहत मिल चुकी है। रही बात चुनाव जीतने के बाद देश की तरक्की के लिए योजनाओं को जनता के सामने लाने की तो वह भी इस सरकार ने नहीं किया, बल्कि जो एजेंडे में नहीं था उसे इस सरकार ने जरुर लागू किया और पूरी ताकत के साथ किया। इसमें जीएसटी से लेकर आधार कार्ड की अनिवार्यता और तीन तलाक के मामले को लिया जा सकता है। यह तो सभी को याद ही होगा कि जीएसटी के खिलाफ खुद मोदी जी थे, तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी और मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री। तब उन्होंने इसे व्यापारियों के लिए सबसे घातक निर्णय निरुपित किया था, लेकिन सरकार में आने के बाद उन्होंने इसे लागू किया और इस बात की भी अनदेखी की कि उनके अपने गृहराज्य गुजरात के व्यापारी इसके खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। अब चूंकि इन तमाम खामियों और सरकार की नाकामियों की तरफ देश की जनता का ध्यान दिलाए जाने का समय है तो इस तरह के बेसिरपैर की बातें करके देश की जनता को उलझाने का काम किया जा रहा है।  सरकार यहां-वहां की बात कर रही है और फिजूल के मामलों में समय नष्ट कर रही है। फिर चाहे वह पकौड़ा बेचने की बात हो या फिर मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के नाम पर तीन तलाक के जरिए विवाद खड़ा करने की बात हो, यहां पद्मावती की भी याद दिलाई जा सकती है। अंतत: सर्वोच्च सदन में महिला विरोधी टिप्पणी की जहां तक बात है तो यह नारी का अपमान जैसा तो है, लेकिन इसे लेकर विवाद खड़ा करने की बजाय विपक्ष को चाहिए कि सरकार की नाकामियों पर देश की आवाम का ध्यान केंद्रित करें। यही सरकार को घेरने का सही तरीका है और होना भी यही चाहिए। 
09फरवरी/ईएमएस
 
Admin | Feb 09, 2018 11:25 AM IST
 

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