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(विचार-मंथन) मोदी सरकार का भ्रामक प्रचार भाजपा के लिए नुक्सानदेह?

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- डॉ हिदायत अहमद खान 
इसमें शक नहीं कि आज केंद्र में यदि भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है तो वह सिर्फ और सिर्फ तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के चुंबकत्व व्यक्तित्व और उनकी चुनाव प्रचार की आक्रामक शैली का ही परिणाम है। संभवत: यही वजह रही है कि तब से अभी तक भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने प्रधानमंत्री मोदी के हर उस फैसले को मान्यता प्रदान की जिनसे उनके हाथ मजबूत होते हों और उनकी भावी योजनाओं को क्रियांवित करने में सहायता मिलती हो। इसका सबसे बड़ा उदाहरण गुजरात के मुख्यमंत्रित्व काल से उनके सखा की तरह हमेशा साथ रहने और अपनी राजनीतिक जमावट से लगातार जीत दिलवाने वाले अमित शाह को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। पिछले साढ़े तीन सालों में इस जोड़ी ने जहां खुद को विश्वस्तर पर स्थापित किया वहीं पार्टी को विजयपथ पर लगातार अग्रसर रखा है। अब जबकि वर्ष 2019 में मोदी सरकार का कार्यकाल पूर्ण होने के साथ ही आम चुनाव होना तय है तो बतौर प्रधानमंत्री उनके कार्यों की समीक्षा भी होने लगी है। इसी के चलते बताया जाने लगा है कि अभी तक मोदी सरकार द्वारा जो भी योजनाएं क्रियांवित हुई हैं वो जल्दवाजी में लिए गए निर्णयों के तहत हुई हैं। इनमें अधिकांश योजनाएं तो यूपीए काल की हैं, जिन्हें नाम बदलकर आगे बढ़ाने का काम मोदी सरकार ने किया है। इसलिए अब इन योजनाओं के परिणामों को लेकर जो बात मोदी सरकार आमजन के बीच में करती है उसका काट विपक्षियों के पास पहले से ही तैयार मिलता है। हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि केंद्र सरकार जिन उपलब्धियों को अपने नाम कर रही है उन्हें विरोधी सिरे से खारिज करते हुए असलियत जनता के सामने लाने का काम भी बड़ी मुश्तैदी से करते नजर आ रहे हैं। इसी तरह का एक मामला 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के बयान के बाद सामने आया। दरअसल साल 2017 के अंत में अंतिम बार 'मन की बात' कार्यक्रम में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने संपूर्ण देश को गौरव महसूस कराने की मुद्रा में बताया कि अब भारत से हज के लिए जाने वाली मुस्लिम महिलाओं को महरम के साथ जाना अनिवार्य नहीं होगा और वो अब अकेले भी हज कर सकेंगी। सरकार ने इस फैसले को मुस्लिम महिलाओं की भलाई और उनके अधिकार क्षेत्र में बढ़ोत्तरी के तहत लिया गया अपने खुद का फैसला बताया। इस बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि हज यात्रा पर मुस्लिम महिलाओं को अकेले यात्रा करने के बारे में नियम बदलने का काम सऊदी अरब सरकार द्वारा लिया गया है। इस फैसले को लेने या देश-विदेश की महिलाओं को अधिकार संपन्न बनाने जैसे फेसले के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई रोल नहीं रहा है। इस प्रकार प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हज पर मुस्लिम महिलाओं को अकेले भेजने के लिए नियम में बदलाव करने वाला दावा झूठा साबित करते हुए कांग्रेस नेता ने बड़ा बयान दिया। इससे यह साबित होता है कि कांग्रेस समेत संपूर्ण विपक्ष अब केंद्र सरकार के बयानों और उनके किए गए कार्यों को बारीक नजर से देख रही है और लगातार उन गल्तियों को भी उजागर कर रही है जो कि सरकार द्वारा की जा रही हैं या पहले की जा चुकी हैं। इसलिए प्रधानमंत्री द्वारा भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए विरोधी यहां तक कह जाते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी यह श्रेय लेकर अपने समर्थकों को गुमराह कर रहे हैं। नियम बदलने का काम उन्होंने नहीं सऊदी अरब सरकार ने किया है। वैसे हज मामले को यदि छोड़ दिया जाए तो देश की तमाम महिलाओं को अकेले विदेश जाने या आने की पूर्ण स्वतंत्रता रही है। जहां तक हज का सवाल है तो सऊदी अरब की सरकार यह तय करती है कि उसके देश में विदेश से आने वाले लोग किन नियमों का पालन करेंगे, यदि उन नियमों का पालन नहीं किया गया तो सऊदी अरब से उन्हें यात्रा का वीजा ही नहीं मिलेगा। ऐसे में यह कहना कि हज के लिए मेहरम वाली पाबंदी को मोदी सरकार ने अपने स्तर पर हटाया है कहीं से सही नहीं लगता है। इसलिए कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार यदि इस प्रकार के भ्रामक प्रचार करेगी तो इसका नुक्सान पार्टी को अगले आम चुनाव में देखने को मिल सकते हैं। यह समय सच्चाई को बयान करने का है। इसमें दोराय नहीं  कि सरकार को अपने लोकहितकारी फैसलों और योजनाओं को प्रचारित और प्रसारित करना चाहिए, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि उनके बयानों और कार्यों से पार्टी को आगे चलकर कोई नुक्सान न होने पाए। क्योंकि इसके बाद भी पार्टी को चुनाव में उतरना ही है, जिसकी तैयारी भी जरुरी हो जाती है। 
ईएमएस/ 03 जनवरी 2018
 
Admin | Jan 03, 2018 11:24 AM IST
 

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