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" संसार एक चक्की के समान है" : आचार्य गूरूवर 108 श्री आर्जव सागर

भोपाल (ईएमएस)। आचार्य गूरूवर 108 श्री आर्जव सागर जी महाराज जी के मंगल सानिध्य में अशोका गार्डन में चल रहे चतुर्मास में श्रद्धालु संयम ,भक्ति साधना में लीन हैं। अध्यक्ष सुनील जैन ने बताया कि आज आचार्य श्री विधासागर महामुनि राज के अवतरण दिवस पर बहार से पधारे श्रद्धालु ओं द्वारा दीपप्रज्जवलन किया गया।आज आचार्य गूरूवर 108 श्री आर्जव सागर जी महाराज जी के संध विराजमान नव दीक्षित मुनि श्री विशोध सागर जी ने आचार्य श्री विधासागर महामुनि राज के अवतरण दिवस पर विशेष महापूजा करवाई गई एवं मंम्बई से आईं गायक श्रीमती रचना जी द्वारा मंगलाचरण करा गया जिसे सुन सभी श्रद्धालु जुम जुम पड़े एवं नृत्य के साथ बहार से पधारे श्रद्धालुओं को आचार्य विधासागर महामुनि राज के अवतरण दिवस के उपलक्ष्य पर अशोका गार्डन जैन मंदिर कमेटी द्वारा 501 पंचमेवा का वितरण किया गया। आज आचार्य श्री ने आशीष वचनों में संत कबीर दास जी पंक्तियों में बोला- "चलती चक्की देखकर, दिया कबीरा रोय दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोय " उन्होंने कहा कि संत कबीर दास जी कि पंक्तियां अक्सर अपने भी जीवन में बहुत मर्तबा सुनी व पढ़ी होगी परन्तु क्या कभी इन पंक्तियों के भावार्थ पर आत्म चिंतन किया? सच यही है कि यह संसार एक चक्की के समान है।जिसमें अनादिकाल से राग द्वेष रूपी दो पाटों के बीच जीव पिसता है। आचार्य श्री ने आगे बताते हुए कहा कि आज भी यही हो रहा है और आत्मा बार बार मरण को प्राप्त कर संसार में परिभ्रमण कर रही है। कभी सोचा की संसार रूपी इस चक्की से हम कैसे बचे? क्या बचने का कोई उपाय है? चलती चक्की में पिसने से बचने का जो पुरुषार्थ कर पाता है,वह मुक्त हो जाता है या आगे भी हो सकता है।चलती हुई चक्की में भी अनाज के वे दाने बच जाते हैं जो च...