क्षेत्रीय


खदान की ब्लास्टिंग से कांप रहे गांव

- कालरी प्रबंधन को जन समस्या से कोई सरोकार नहीं शहडोल (ईएमएस)। एसईसीएल के सोहागपुर एरिया अंतर्गत आने वाली कोयला खदानों में उत्पादन के लिए जो तरीके अपनाए जा रहे हैं उसके कारण आस-पास के गांवों के रहवासियों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन कालरी प्रबंधन इस ओर ध्यान देने की वजाय केवल अपना कोयला उत्पादन करने में लगा हुआ है, ऐसा लगता है कि उसे जन समस्याओं को कोई सरोकार नहीं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कोयला खदानों में जब कोयला उत्पादन के लिए हैवी ब्लास्टिंग की जाती है तो उसका असर कारण आस-पास के गांवों में भी पड़ता है। घरों की दीवारों में दरार आ जाती है। बताते हैं कि कई मर्तबा तो घरों में रखे सामान भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। आस-पास के गांव पूरी तरह से सहम जाते हैं। धनपुरी ओसीएम बी सेक्टर एवं अमलाई ओसीएम में कोयला उत्पादन के लिए हैवी ब्लास्टिंग की जाती है वह इतनी तेज होती है कि उसके आस-पास जो घर मौजूद हैं उन घरों को व वहाँ रखे सामानों को काफी नुकसान होता है। संजय नगर के ठीक बगल में स्थित देवहरा गांव व बंगवार से लगे हुए मोरिया गांव के लोग इस हैवी ब्लास्टिंग के कारण सबसे अधिक परेशान हैं, जिसे लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है जो किसी भी समय आंदोलन का रूप ले सकता है। सालों से यह समस्या देखने को मिल रही है और लोग इसका समाधान के लिए कालरी प्रबंधन से मांग करते आ रहे हैं किंतु प्रबंधन उदासीन रवैया अपनाए हुए है। -नियमों की उड़ रही धज्जियां अमलाई ओसीएम अमरकंटक मेन रोड से लगभग 100 मीटर से कम दूरी पर कोयला खदान चलाने के लिए प्राइवेट कंपनी द्वारा ओबी मिट्टी निकाली जा रही है जबकि कालरी श्रमिकों का मानना है कि कालरी रूल के अनुसार सड़क से 500 मीटर दूर खदान व ब्...