व्यक्तित्व

पुण्यतिथि विशेष

Posted by Divyansh Joshi on

सादगी, संजीदगी और विनम्रता की प्रतिमूर्ति , कद छोटा लेकिन हौसले बुलंद। कुछ ऐसा ही शख्सियत थी लाल बहादुर शास्त्री की । उनके इरादे इतने बुलंद थे कि दुश्मनों को निस्तानाबूत कर दें।
11 जनवरी, 1966 को भारत से दूर सोवियत रूस में संदिग्ध हालात में उनकी मौत हो गई थी। उन्होने अपने कार्यकाल के दौरान देश को कई संकटों से उबारा । 18 महिने तक देश के प्रधानमंत्री रहे। वह एक प्रसिद्ध भारतीय राजनेता, महान स्वतंत्रता सेनानी और जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे. वे एक ऐसी हस्ती थे, जिन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में देश को न सिर्फ सैन्य गौरव का तोहफा दिया, बल्कि हरित क्रांति और औद्योगीकरण की राह भी दिखाई. शास्त्री जी जात-पात के सख्त खिलाफ थे. तभी उन्होंने अपने नाम के पीछे सरनेम नहीं लगाया. शास्त्री की उपाधि उनको काशी विद्यापीठ से पढ़ाई के बाद मिली थी. वहीं अपनी शादी में उन्होंने दहेज लेने से इनकार कर दिया था. लेकिन ससुर के बहुत जोर देने पर उन्होंने कुछ मीटर खादी का दहेज लिया.। 10 जनवरी, 1966 को ताशकंद में पाकिस्तान के साथ शांति समझौते पर करार के महज 12 घंटे बाद 11 जनवरी को तड़के उनकी अचानक हुई मौत पर सवाल आज भी अनसुलझे हैं.जब उनकी मौत हुई तो उनके परिवार ने मौत पर सवाल उठाए थे। उनके बेटे के मुताबिक लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद उनका पूरा चेहरा नीला हो गया था, उनके मुंह पर सफेद धब्बे पाए गए थे। उन्‍होंने कहा था कि शास्‍त्री के पास हमेशा एक डायरी रहती थी, लेकिन वह डायरी नहीं मिली। इसके अलावा उनके पास हरदम एक थर्मस रहता था, वो भी गायब था। इसके अलावा पोस्टमार्टम भी नहीं हुआ था, जिससे उनकी मौत संदेहजनक मानी जाती है। शास्त्री जी को 1966 में मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा गया था. आज भी लोग मानते हैं कि शास्त्री जी की मौत के बाद कई सवालों के उत्तर नहीं दिए जा सके हैं. कुछ लोग मौत के बाद उनके शरीर पर दिखने वाले निशानों और पंचनामा न कराए जाने की बात का जिक्र भी करते हैं. ऐसे में आज भी कई सारी शक की सुईयां उस दिशा में मंडराती रहती हैं।