क्षेत्रीय

नशे की गिरत में कसमसा रहा शहर,बर्बाद हो रहे नौनिहाल और युवा

17/01/2021

अलीगढ़ (ईएमएस)। बिजली, पानी, गंदगी और तमाम तरह की समस्याओं के बीच शहर इन दिनों नशे की गिरत में कसमसा रहा है। यहां गांजा, भांग, चरस, पंचर जोड़ने वाला सिलोचन और नशे की दवाएं और इंजेक्शन खुलेआम बिकते हैं, जिस पर किसी तरह की कोई रोकटोक नहीं है। कथित तौर पर पुलिस, आबकारी और स्वास्थ्य विभाग की मिली भगत से होने वाला नशे का यह कारोबार करोड़ों में पहुंच गया है। कार्रवाई के नाम पर संबंधित विभागों द्वारा सिर्फ खानापूरी की जाती है, जिसके परिणाम स्वरूप यहां के नौनिहाल जिनकी उम्र पढ़ाई लिखाई की है वह और युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है और अभिभावक परेशान हैं।
एक सर्वेक्षण के मुताबिक स्कूल कालेजों में पढ़ने वाले छात्र छात्राएं सबसे ज्यादा नषे के आदी बनते जा रहे हैं। शहर की दवा की दुकानों पर आसानी से उन्हें सस्ते दामों पर विभिन्न तरह की नशीली दवाइयां मिल जा रही है। इतना ही नहीं दवा दुकानदार अपने मुनाफे के लिए बेखौफ होकर युवाओं के बीच नशा बेच रहे हैं। सबसे चौकाने वाला तथ्य यह है कि सब कुछ जानते हुए भी जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंदे हुए है। आरोप है कि इस ओर से आंखें मूंदने की एवज में उसे नशे के कारोबारियों की ओर से मोटी रकम दी जाती है।
युवाओं को शाम के समय आसानी से देखा जा सकता है। वैसे शहर के अंदर अब कई स्पॉट बन चुके हैं, जहां शाम ढलते ही युवा जमा होते हैं और नशीली दवाइयों का सेवन करते हैं।
यह हैं नशीली दवाइयां
कोरेक्स कफ सीरप, फोर्टविन व डाइजापाम इंजेक्शन, एटी भान, वेस्प्रेक्स,मेंड्रेक्स, अल्प्रेक्स, लोनाजेप, क्लोना जेपाम टेबलेट आदि नशीली दवाइयां यहां के बाजारों में बिना डॉक्टर के पर्चे के आसानी से उपलब्ध हैं। इन नशीली दवाइयों के अलावा ड्रग्स के रूप में सुलोशन, व्हाइटनर, आयोडेक्स, कोकिन, चरस, ब्राउनशुगर,अफीम आदि का भी यहां आसानी ने मिल जाती है।
यह है प्रावधान
उक्त प्रतिबंधित नशीली दवाइयों की बिक्री सिर्फ रजिस्टर्ड डाक्टर के पर्चे पर ही की जा सकती है, लेकिन मौजूदा समय में शहर के किसी भी मेडिकल स्टोर से इन्हें बिना पर्चे के खरीदा जा सकता है।

क्या सोचते हैं आमलोग
नगर निवासी व्यावसायी भुवनेष गुप्ता ने कहा कि आज समाज के 80 फिसद लोग विभिन्न तरह के नशे की गिरत में हैं। जिसके कारण लोगों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा व्यर्थ में बर्बाद हो रहा है। अगर वह उन पैसों को सृजनात्मक कार्य में लगाएं तो निश्चित रूप से समाज की रूपरेखा बदल जाएगी।
प्रवेष उर्फ देवेन्द्र यादव कहते हैं कि आज नशा सेवन को लोगों ने आदत के साथ साथ प्रचलन बना दिया है। इसको लेकर जागरूकता की घोर कमी है। माता पिता अपने बच्चों की दिनचर्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। यही वजह है कि हमारे बच्चे आज भटकाव के रास्ते पर अग्रसर हैं।
सपा के वरिश्ठ नेता जयसिंह प्रजापति अवतार नगर कहते हैं कि युवाओं का नशे के प्रति बढ़ता झुकाव बेहद चिंता का विषय है। नशे का बढ़ते प्रचलन को देखकर ऐसा लगता है कि हमारा आने वाला कल निश्चित रूप से अंधकारमय है। सरकार के साथ साथ जिला प्रशासन को भी इस दिशा में गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
मनोज यादव भगतानी कहते हैं कि सरकार अपना राजस्व बढ़ाने के लिए गांव गांव व घर घर तक नशा का सामान बेच रही है। समाज के भोले भाले लोग इसकी गिरत में फंसते चले जा रहे हैं। नशा के चक्कर में लोग अपना घर जमीन तक बेच ले रहे हैं। नशा ने तो समाज में बड़े छोटे का अंतर भी मिटा दिया है। बेटा शराब के लिए बाप को गालियां दे रहा है।

कहते हैं चिकित्सक
सुप्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डा. प्रदीप बंसल कहते हैं कि कुछ लोग दवा का प्रयोग बीमारियों को भगाने के लिए करते हैं तो कुछ लोगों ने इसे अपनी आदत में शामिल कर लिया है, और जिनको ऐसी नशीली दवाइयों की लत लग गई वो ड्रग एडिक्ट हो गए। उन्होंने बताया कि नशीली दवाइयों के अत्यधिक सेवन से ब्लड प्रेशर, ब्रेन हेमरेज, नसों से संबंधित बीमारियां, मानसिक संतुलन खोना, लीवर से संबंधित बीमारी, किडनी फेल होना, कैंसर सहित अन्य बीमारियां हो सकती है। नशीली दवाइयां सिर्फ चिकित्सक की सलाह से ही लेनी चाहिए। दवा दुकानदार बगैर मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन के इसे बेचते हैं तो यह अपराध है।

सूचना दीजिए कार्रवाई होगी: एसपी सिटी
एसपी सिटी कुलदीप सिंह गुणावत का कहना है कि अवैध रूप से बेची जा रही नशे की सामग्रियों पर तो प्रतिबंध लगाया जा सकता है, परंतु पुलिस किसी की आदत को नहीं बदल सकती है। नशे से मुक्ति पाने के लिए .ढ इच्छा शक्ति की आवश्यकता होती है। समाज से नशे की सामग्रियों के उन्मूलन हेतु आम लोगों का सहयोग पुलिस के लिए अतिआवश्यक है। अगर आम जनता इसकी सूचना देती है तो अविलंब कार्रवाई की जाएगी।
धर्मेन्द्र राघव/17/01/2021