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कोरोना संक्रमण में आंध्र दो लाख के पार, देश में ठीक होने वालों की संख्या 14 लाख से ऊपर

07/08/2020


नई दिल्‍ली (ईएमएस)। शुक्रवार को आंध्रप्रदेश दो लाख से अधिक कोरोनावायरस मरीजों वाला तीसरा राज्य बन गया। आंध्रप्रदेश से पहले महाराष्ट्र और तमिलनाडु में दो लाख से अधिक कोरोनावायरस मरीज मिल चुके हैं।
आंध्रप्रदेश में लगातार 10,000 अथवा उसके आसपास नए संक्रमित मरीज प्रतिदिन मिल रहे हैं। महाराष्ट्र में भी यही हालत है। जिस गति से आंध्रप्रदेश में संक्रमण बढ़ रहा है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि अगले 10 - 12 दिन में आंध्रप्रदेश संक्रमण के मामले में दूसरे नंबर पर पहुंच जाएगा।
जहां तक पूरे देश का प्रश्न है, शुक्रवार को रात 10 बजे तक देश में 58,465 नए संक्रमित मिलने के साथ ही पीड़ितों की संख्या बढ़कर 20 लाख 83 हजार 874 हो गई। शुक्रवार को देश भर में कोरोना से 889 लोगों की मौत हुई और मृतकों की संख्या बढ़कर 42,530 हो गई। सुखद खबर यह है कि देश में शुक्रवार को 1 दिन में 46,117 मरीज ठीक हुए और ठीक होने वालों की कुल संख्या 14 लाख 23 हजार 399 हो गई। इस तरह भारत का रिकवरी रेट 67% से अधिक हो गया है। वर्तमान में एक्टिव मामलों की संख्या शुक्रवार को रात 10 बजे तक 6 लाख 14 हजार 59 थी। कोरोनावायरस के फैलाव का आंकलन करें तो महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश ऐसे दो राज्य हैं जहां प्रतिदिन 10,000 अथवा उसके आसपास मरीज मिल रहे हैं। शुक्रवार को महाराष्ट्र में 10,483 और आंध्रप्रदेश में 10,171 नए कोरोना संक्रमित मिले। इसके अलावा तमिलनाडु में 5880, कर्नाटक में 6670, उत्तरप्रदेश में 4404, तेलंगाना में 2707, बिहार में 3646, ओडिशा में 1833, केरल में 1251, दिल्ली में 1192 नए संक्रमित मरीज मिले हैं। असम - गुजरात- पंजाब जैसे राज्यों में भी प्रतिदिन 1000 से अधिक नए संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। देश में प्रतिदिन 50 से 60 हजार के बीच नए संक्रमित मरीजों की संख्या सामने आ रही है और संक्रमण के नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं। भारत के रिकवरी रेट में लगातार सुधार और मृत्यु दर में लगातार कमी के कारण यह तो कहा जा सकता है कि भारत में कोरोना उतना खतरनाक नहीं है जितना अमेरिका जैसे देशों में है। खासकर भारत की जनसंख्या के आकार को देखते हुए भारत में कोरोना के फैलाव की स्थिति असंतोषजनक नहीं कही जा सकती। हालांकि दुनिया की सर्वाधिक आबादी वाले देश चीन के सरकारी आंकड़ों से तुलना करें तो भारत कोरोना संक्रमण में चीन से कई गुना आगे निकल चुका है। संभवत: चीन में जिस तरह सूचनाओं को दबाया जाता है और सही तस्वीर सामने नहीं आ पाती उसे देखते हुए यह आशंका भी सच प्रतीत होती है कि चीन ने कोरोना को लेकर दुनिया के सामने सही स्थिति प्रस्तुत नहीं की है।
इन सारी बातों के अलावा भारत में सुकून की बात यह है कि यहां वेंटिलेटर पर जाने वाले गंभीर मरीजों की संख्या बहुत कम है। अमेरिका और यूरोप के देशों के मुकाबले जहां बड़ी संख्या में मरीजों को वेंटिलेटर पर रखना पड़ा था, भारत में वेंटिलेटर का उपयोग बहुत कम हुआ है। स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाली एजेंसियों के लिए यह सुकून की बात है, क्योंकि बड़ी संख्या में मरीजों के वेंटिलेटर पर जाने की स्थिति में भारत के पास वेंटिलेटर की कमी हो सकती थी। लेकिन यह खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। जिस तरह प्रतिदिन एक्टिव मरीजों की संख्या बढ़ रही है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि अगले माह 15 तारीख तक भारत में 10 लाख से ऊपर एक्टिव मरीज हो सकते हैं। ऐसे हालात में गंभीर स्थिति में पहुंचे मरीजों के लिए भारत की तैयारी क्या है यह जानना दिलचस्प होगा। आगामी स्थिति को देखते हुए देशभर में बड़ी संख्या में अस्पतालों में बिस्तर कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व किए गए हैं। लगभग सभी प्रांतों में कोरोनावायरस संक्रमित अथवा संभावित व्यक्तियों के क्वॉरेंटाइन और उपचार के लिए नई व्यवस्थाएं की गई हैं। इस बीच कोरोना वैक्सीन की पहली खैप जल्द से जल्द बाजार में आने की संभावना लगातार बढ़ती जा रही है। इंग्लैंड और रूस कोरोना वैक्सीन के अनुसंधान में सबसे आगे हैं। भारत में भी अनेक कंपनियां कोरोनावायरस के वैक्सीन की तलाश कर रही हैं।
सुबोध\०७\०८\२०२०