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(विचार मंथन) पीएम की सार्थक पहल (लेखक-ईएमएस/सिद्वार्थ शंकर)

14/09/2021

भारत ने टोक्यो पैरालंपिक में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 19 मेडल जीते। इनमें 5 गोल्ड, 8 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे। यह किसी भी पैरालिंपिक में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। टीम के वापस लौटने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को खिलाडिय़ों से मुलाकात की। इस मुलाकात का वीडियो रविवार को जारी किया गया। मोदी ने कहा कि भारतीय पैरा एथलीट्स ने टोक्यो में बेहतरीन प्रदर्शन किया। आगे भी वे अच्छा प्रदर्शन करें इसके लिए हर संभव उपाय किए जाएंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि 130 करोड़ देशवासी अपने पैरा एथलीट्स के साथ हैं पीएम इससे पहले टूर्नामेंट के दौरान भी ऐथलीटों के प्रदर्शन पर पैनी नजर बनाए हुए थे और उनकी लगातार हौसला अफजाई कर रहे थे। हर मेडल विनर को उन्होंने सोशल मीडिया पर बधाई दी और फोन कर बात भी की। प्रधानमंत्री ने यही क्रम टोक्यो ओलंपिक में भाग लेने गए खिलाडिय़ों के साथ दोहराया था। हर विजेता को बधाई दी और हारने वाले को प्रोत्साहित किया। नतीजा यह हुआ कि भारत के लिए टोक्यो ओलंपिक सबसे सफल आयोजन रहा। दल के वापस आने के बाद खुद सबसे मिले। नीरज चोपड़ा से लेकर मीराबाई चानू तक से उन्होंने मुलाकात की। पीवी सिंधू को आइसक्रीम खिलाने का वादा पूरा किया। जो नहीं जीत पाए उन्हें आगे के लिए प्रेरणा दी। यही अब पैरालंपिक के खिलाडिय़ों के साथ हुआ। सम्मान समारोह में वैसे एथलीट भी पहुंचे थे जो टोक्यो में मेडल नहीं जीत पाए। प्रधानमंत्री ने उनसे कहा कि यह बात दिल से निकाल दीजिए कि आप मेडल नहीं जीत पाए। आपने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और देश के लिए यह भी गौरव की बात है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय पैरा एथलीट्स ने टोक्यो में भारत का मान ऊंचा किया। संवाद के दौरान एक खिलाड़ी ने पीएम मोदी से कहा- मेडल न जीत पाने का अफसोस है, लेकिन इस हार ने हमें और मजबूत बना दिया है। हम अगली बार फिर से जीतने के लिए जी जान लगा देंगे। जब तक मेडल मिलेगा नहीं, तब तक कोशिश करना नहीं छोड़ेंगे। प्रधानमंत्री ने खेल में हारने वाले खिलाडिय़ों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि हमारी सबसे बड़ी ताकत हार कर जीतना होता है। इसलिए हार से कभी मनोबल को कम करने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री की यह पहल देखने में एक आयोजन भर हो सकती है, मगर इसके मायने बेहद गंभीर हैं। इस पहल से हर उस खिलाड़ी का मनोबल बढ़ा होगा, जो निराश है या प्रतिभा सामने नहीं ला पा रहा है। यह पहल समाज को भी संदेश है कि खेलों के प्रति लोग आगे आएं। बच्चों को पढ़ाई के साथ खेल के प्रति जागरूक करें। यह नहीं भूलना चाहिए कि शिक्षा से समाज की पहचान होती है और खेल से देश की। आज टोक्यो में जिस तरह से भारत का डंका बजा है, वह हम सभी के लिए बड़ी सीख है। खिलाडिय़ों में जिस तरह का मनोबल आज प्रधानमंत्री बढ़ा रहे हैं, वैसा ही सबको करना होगा। टोक्यो पैरालिंपिक से पहले 53 साल में 11 पैरालिंपिक्स में 12 मेडल आए थे। 1960 से पैरालिंपिक हो रहा है। भारत 1968 से पैरालंपिक में भाग ले रहा है। वहीं 1976 और 1980 में भारत ने भाग नहीं लिया था। भारत ने इस बार सभी तरह के मेडल जीतने का भी रिकॉर्ड कायम कर दिया। इस बार भारत के नाम 5 गोल्ड रहे। इससे पहले भारत किसी भी पैरालंपिक गेम्स में 2 से ज्यादा गोल्ड नहीं जीत पाया था। इसी तरह भारत ने टोक्यो में 8 सिल्वर जीते। भारत ने इससे पहले कुल मिलाकर 4 सिल्वर जीते थे। एक पैरालंपिक में इससे पहले कभी 2 से ज्यादा सिल्वर नहीं आए थे। ब्रॉन्ज इस बार 6 जीते। इससे पहले कुल 4 ब्रॉन्ज जीते थे। ब्रॉन्ज भी इससे पहले किसी एक पैरालिंपिक में 2 से ज्यादा नहीं मिले थे। पैरालंपिक खेलों में देश के लिए सबसे पहला गोल्ड शूटिंग स्पर्धा में अवनि लेखरा ने जीता। जयपुर की अवनि ने महिलाओं की आर-2 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग स्॥1 में पहला स्थान हासिल करके गोल्ड मेडल जीता। भारत के लिए दूसरा गोल्ड जेवलिन थ्रो में सुमित अंतिल के खाते में आया। सुमित ने जेवलिन थ्रो की एफ64 कैटेगरी में वल्र्ड रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने फाइनल में 68.55 मीटर के बेस्ट थ्रो के साथ मेडल जीता।
सिद्वार्थ शंकर, 14 सितम्बर, 2021 (ईएमएस)