राष्ट्रीय

मध्यप्रदेश विधानसभा 2018 विशेष (09 आरएस01एचओ)

09/11/2018


बदलते रहते हैं सियासत के समीकरण
(उज्जैन विधानसभा चुनाव - 2018 )
उज्जैन ( ईएमएस)। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में 7 विधानसभा आती हैं जिनमें नागदा-खाचरौद, महिदपुर, तराना, घटिया, उज्जैन उत्तर, उज्जैन दक्षिण और बड़नगर की सीटें शामिल हैं। ये सभी विधानसभा सीटें लोकसभा क्षेत्र उज्जैन के अंतर्गत आती हैं। तराना और घटिया विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित हैं।उज्जैन जिले में आने वाली सभी 7 विधानसभा सीटों पर अभी भाजपा काबिज है। नागदा-खाचरौद से दिलीप सिंह शेखावत, महिदपुर से बहादुरसिंह चौहान, तराना से अनिल फिरोजिया, घटिया से सतीश मालवीय, उज्जैन उत्तर से पारसचंद्र जैन, उज्जैन दक्षिण से डॉ. मोहन यादव और बड़नगर से मुकेश पांड्या विधायक हैं। शुरुआती दौर से इन सातों विधानसभा क्षेत्रों में सियासती समीकरण उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार तब्दील होते रहे। मतदाताओं ने समय के साथ बराबर परिवर्तन किया। किसी एक दल का कब्जा कभी नहीं रहा। एक-दो चुनाव के बाद यहां तब्दीलियां होती रही हैं। जिले से कई दिग्गज नामचीन राजनेता भी निकले हैं। वर्तमान में कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस चुनाव में विजयी रही। एक-दो स्थानों पर तो बराबर की टक्कर ही चल रही है। एक क्षेत्र में जरुर भाजपा कमजोर हुई है।
नागदा-खाचरौद विधानसभा
नागदा-खाचरौद औद्योगिक क्षेत्र के रुप में भी पहचान रखता है। सन् 1957 से 2013 तक के उपलब्ध चुनाव परिणाम पर अगर नजर मारी जाए तो यही कहा जाएगा कि समय के साथ धीरे-धीरे यह सीट भाजपा के हाथ से सरक गई। काफी जोर-आजमाइश के बाद भी भाजपा यहां पिछले चुनाव में काबिज हो पाई है। स्थिति यह है कि एक बार तो निर्दलीय के रुप में भी यहां दिलीप गुर्जर विजयी रहे। ऐसा नहीं है कि वे अकेले यहां से निर्दलीय निर्वाचित हुए, इससे पूर्व सन् 1962 में भैरव भारतीय भी निर्दलीय निर्वाचित हुए थे। चुनाव के इतिहास के मुताबिक कभी यहां भाजपा और उसके सहयोगी दल का वजूद था। अब स्थितियां बदल गई हैं। नागदा-खाचरौद सीट पर 25 नवंबर 2013 को मतदान और 8 दिसंबर 2013 को मतगणना हुई थी, जहां भाजपा के दिलीप सिंह शेखावत ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस प्रत्यासी दिलीप गुर्जर सिंह दूसरे और सपा के कंवर नायाब उद्दीन झिरनया तीसरे स्थान पर रहे थे। उन्होंने कांग्रेस के दिलीप गुर्जर को 16115 मतों से हराया था। 2008 के चुनाव में कांग्रेस के दिलीप सिंह गुर्जर ने भाजपा के दिलीप सिंह शेखावत को 9892 वोटों से हराया था ।
महिदपुरविधानसभा
जिले में कभी आजादी का केन्द्र रहा यह विधानसभा क्षेत्र बराबरी की टक्कर के लिये भी जाना जाता है। महिदपुर सीट पर 25 नवंबर 2013 को मतदान और 8 दिसंबर 2013 को मतगणना हुई थी, जहां भाजपा के बहादुरसिंह चौहान ने जीत हासिल की थी। जबकि 2008 के चुनावों में इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा था। ऐसे में यह सीट कांग्रेस के लिए दोबारा वापसी करने के लिहाज से प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है 2013 के चुनाव में बहादुर सिंह ने निर्दलीय दिनेश जैन बोस को 20634 वोटों से हराया था ।कांग्रेस की कल्पना परुलेकर तीसरे स्थान पर रही । 2008 के चुनाव में कांग्रेस की कल्पना परुलेकर ने भाजपा के बहादुर सिंह चौहान को 1849 वोटों से हराया था।
तराना विधानसभा
शाजापुर जिले से लगी हुई विधानसभा क्षेत्र तराना के उपलब्ध इतिहास अनुसार सन् 1962 से लेकर 2013 तक के चुनाव परिणाम में कांग्रेस यहां पिछड़ी हुई रही है। अनुसूचित जाति आरक्षित होने के बावजूद इस सीट पर कांग्रेस की पकड़ कभी कुछ खास नहीं रही। भाजपा ने अधिकतम दोहरी पारी यहां से खेली है। प्रदेश की तराना विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षति है। यहां पर 25 नवंबर 2013 को मतदान और 8 दिसंबर 2013 को मतगणना हुई थी, जहां भाजपा के अनिल फिरोजिया ने जीत हासिल की थी। हालांकि 2008 के चुनावों में भी इस सीट पर भाजपा का ही कब्जा था। इस लिहाज से देखा जाए तो सत्ता विरोधी लहर के दौर में तराना सीट पर भाजपा के लिए तीसरी बार चुनाव जीतना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। 2013 के चुनाव में भाजपा के अनिल फिरोजिया ने कांग्रेस के राजेंद्र राधाकिशन मालवीय को 16135 वोटों से हराया था । 2008 के चुनाव में भाजपा के रोडमल राठौड़ ने कांग्रेस के बाबूलाल मालवीय को 12061 वोटों से हराया था।
घटिया विधानसभा
मध्य प्रदेश की घटिया विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षति है। यहां पर 8 दिसंबर 2013 को मतगणना हुई थी, जहां भाजपा के सतीश मालवीय ने जीत हासिल की थी। जबकि 2008 के चुनावों में इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा था। सियासी समीकरण बताता है कि राज्य की सत्ता पर चौका लगाने की कोशिश में जुटी भाजपा इस सीट पर फिर काबिज होने की कोशिश करेगी। 2013 के चुनाव में भाजपा के सतीश मालवीय ने कांग्रेस के रामलाल मालवीय को 17369 वोटों से हराया था । 2008 के चुनाव में कांग्रेस के रामलाल मालवीय भाजपा के प्रभुलाल जाटव को 2111 वोटों से हराया था।
उज्जैन उत्तर विधानसभा
उज्जैन के पुराने शहर पर पूरी तरह से काबिज उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र अनारक्षित है। इस क्षेत्र से कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा ने विजयश्री वरण की। शुरुआत कांग्रेस से रही। धीरे-धीरे यहां वर्तमान भाजपा और उसके समर्थित पुराने दल यहां अपना अस्तित्व बनाने में पूरी तरह कामयाब रहे। वर्तमान में यहां से भाजपा के विधायक हैं। यहां पर 2013 के चुनाव में भाजपा के पारसचंद्र जैन ने जीत हासिल की थी। जबकि 2008 के चुनावों में भी इस सीट पर भाजपा का कब्जा था और पारस जैन विधायक थे। शिवराज सिंह चौहान की सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर के बावजूद भाजपा इस सीट पर फिर दबदबा कायम करने की कोशिश करेगी। 2013 के चुनाव में भाजपा के पारसचंद्र जैन ने कांग्रेस के विवेक जगदीश यादव को 24849 वोटों से हराया था । 2008 के चुनाव में भाजपा के पारस जैन ने कांग्रेस के डॉ. बटुकशंकर जोशी को 21912 वोटों से हराया था।
उज्जैन दक्षिण विधानसभा
मध्य प्रदेश की उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट सामान्य है। यहां पर 8 दिसंबर को मतगणना हुई थी, जहां भाजपा के डॉ. मोहन यादव ने जीत हासिल की थी। जबकि 2008 के चुनावों में भी इस सीट पर भाजपा का ही कब्जा था। मध्य प्रदेश में सत्ताधारी दल होने की वजह से सत्ता विरोधी लहर के बावजूद भाजपा इस सीट पर फिर जीत कायम करना चाहेगी। वहीं कांग्रेस इस सीट पर 2008 के चुनावों में शीर्ष तीन में जगह नहीं बना पाई थी। ऐसे में वह अपनी प्रतिष्ठा वापस पाना चाहेगी जिससे आगामी चुनाव के दिलचस्प होने के आसार हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में नये उज्जैन का शहरी क्षेत्र के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र भी शामिल हैं। 2013 के चुनाव में भाजपा के डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस के जयसिंह दरबार को 9652 वोटों से हराया था । 2008 के चुनाव में भाजपा के शिव नारायण जागीरदार ने निर्दलीय-जयसिंह जागीरदार को 12000 वोटों से हराया था।
बड़नगर विधानसभा
बड़नगर विधानसभा क्षेत्र उौन जिले की विधानसभा क्षेत्रों में वजूदमंद सीट मानी जाती है। यहां हिसाब बराबरी का चल रहा है। सन् 1957 से 2013 तक के उपलब्ध चुनाव परिणामों के मुताबिक इस सीट पर काफी कम मतों से जीत-हार के फैसले हुए हैं।मध्य प्रदेश की बड़नगर विधानसभा सीट सामान्य है।2013 के चुनाव में भाजपा के मुकेश पांड्या ने जीत हासिल की थी। जबकि 2008 के चुनावों में भी इस सीट पर भाजपा का ही कब्जा था। मध्य प्रदेश में सत्ताधारी दल होने की वजह से सत्ता विरोधी लहर के बावजूद भाजपा इस सीट पर फिर जीत कायम करना चाहेगी। इस सीट पर कांग्रेस, भाजपा को रणनीतिक तौर पर चुनौती देना चाहेगी क्योंकि 2013 और 2008 के चुनावों में उसका वोट बंटा था जिसे एकजुट करने में वह नाकाम रही थी।2013 के चुनाव में भाजपा के मुकेश पांड्या ने कांग्रेस के महेश पटेल को13135 वोटों से हराया था । 2008 के चुनाव में भाजपा के शांतिलाल धाबाई ने कांग्रेस के मुरली मोरवाल को 6070वोटों से हराया था।
----------/09 नवम्बर 2018