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(बैतूल) शुभारंभ अवसर पर बोले शशांक मिश्र वन स्टॉप सेंटर का करें प्रचार-प्रसार, सिर्फ औपचारिकता बनकर नहीं रहना चाहिए वन स्टॉप सेंटर: कलेक्टर, भारत सरकार के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने की श

18/09/2018

बैतूल(ईएमएस)/नवल-वर्मा। हिंसा पीडि़त महिलाओं और युवतियों को जिला मुख्यालय पर बहुप्रीतिक्षित और महत्वाकांक्षी सौगात 'वन स्टॉप सेंटर सखीÓ मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया। जिला कलेक्टर शशांक मिश्र और बाल कल्याण समिति सदस्य श्रीमती रश्मि साहू द्वारा वन स्टॉप सेंटर का फीता काटकर सोमवार को सेंटर का शुभांरभ किया। शुभारंभ अवसर पर कलेक्टर शशांक मिश्र ने कहा कि वन स्टॉप सेंटर सिर्फ औपचारिकता बनकर नहीं रहना चाहिए बल्कि पीडि़तों को इसका लाभ मिले इसके लिए इसका अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जाना सुनिश्चित करें ताकि हिंसा पीडि़़त महिलाओंको आसरे के साथ-साथ सुविधा उपलब्ध हो सकें। श्री मिश्र ने कहा कि अन्य जिलों में खुले वन स्टॉप सेंटरों के अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं। इसी तरह से बैतूल के वन स्टॉप सेंटर के भी परिणाम सामने आना चाहिए। इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत क्षितिज सिंघल, सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष प्रशांत मांडवीकर, सदस्य संजय शुक्ला, इरशाद हिन्दुस्तानी, श्रीमती रश्मि साहू, श्रीमती हेमलता कुंभारे, डीपीओ सुमन पिल्लई, डीडब्ल्यूईओ राधेश्याम वर्मा, एसजीपीयू विनोद शुक्ला, सीडीपीओ नीरजा शर्मा, अनामिका तिवारी, बीडब्ल्यूईओ रामबाई गुबरेले, ईसीई टीना शर्मा, समाजसेवी श्रीमती मीरा एंथोनी रामा गार्वे सहित पर्यवेक्षक और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद थीं। कार्यक्रम संचालन अनामिका तिवारी ने किया वहीं आभार प्रदर्शन डीडब्ल्यूईओ राधेश्याम वर्मा ने माना।
इन्होंने किया संबोधित
वन स्टॉप सेंटर के शुभारंभ अवसर पर डीपीओ द्वारा वन स्टॉप सेंटर की आवश्यकता और उद्देश्य के विषय में विस्तार से बताया। वहीं इस अवसर पर सीडब्ल्यूडी अध्यक्ष प्रशांत मांडवीकर, श्रीमती रश्मि साहू, संजय शुक्ला और इरशाद हिन्दुस्तानी द्वारा बेहतरीन तरीके से कैसे वन स्टॉप सेंटर चलाया जा सकता है इससे संबंधित अपने-अपने विचार रखे और सुझाव दिए। वन स्टॉप सेंटर का शुभारंभ पुराने जिला पंचायत भवन में किया गया। वन स्टॉप सेंटर के शुभारंभ के पीछे भारत सरकार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय नई दिल्ली की सोच है कि घरेलू हिंसा से पीडि़त महिलाओं, बालिकाओं के सहायतार्थ आश्रय, पुलिस सहायक, विधिक सहायता, चिकित्सा एवं काउंसलिंग की सुविधा एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसी उद्देश्य के तहत वन स्टॉप सेंटर का शुभारंभ किया गया।
5 दिनों तक मिलेगी आश्रय सुविधा
जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी सुमन पिल्लई ने बताया कि परिवार में महिलाओं, बालिकाओं के प्रति किसी भी प्रकार की हिंसा होती है तो वह यहां आकर निर्भीक होकर अपनी व्यथा लिखित रूप से व्यक्त कर 5 दिनों तक आश्रम प्राप्त कर सकती है। यहां उन्हें आवास के साथ-साथ भोजन, कपड़े, टेलीविजन मनोरंजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। पीडि़त महिलाओं को अधिकतम 5 दिनों तक आश्रय सुविधा दी जाएगी। महिला के साथ में 0 से 7 वर्ष तक के बाल एवं 0 से 18 वर्ष तक की आयु की बालिका को भी आश्रय दिया जाएगा।
यह ले सकेंगे वन स्टॉप सेंटर का लाभ
अक्सर देखा जाता है कि है कि महिलाओं अथवा बालिकाओं के साथ घरेलू अथवा किसी भी प्रकार की हिंसा होने पर वह घर छोड़ देती हैं या फिर उनके सुरक्षित रात्रि विश्राम की समस्या खड़ी हो जाती है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए भारत सरकार के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल विवाह, दहेज प्रथा से पीडि़त, दुष्कर्म से पीडि़त, मानव तस्करी या दुर्रव्यापार से पीडि़त महिला, बालिका को भी आश्रय दिया जाएगा। यहां पर एक बार में अधिकतम 10 महिलाओं को 5 दिनों तक निवास की सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
काउंसलिंग की मिलेगी सहायता
यदि कोई पारिवारिक पृष्ठ भूमि में महिला या बालिका हिंसा से प्रताडि़त होकर वन स्टॉप सेंटर में आती है और फिर से अपने परिवार में पुर्नवास करना चाहती है तो उसके परिवार के सदस्यों को बुलाकर पीडि़त के समक्ष समझाईश दी जाकर महिला-बालिका को पुन: परिवार में पुनर्वास कराने का प्रयास किया जाएगा। यदि 5 दिनों के अंदर महिला अपने परिवार में पुर्नवासित नहीं होती तै उसे महिला स्वाधारगृह में भेजा जाएगा। स्वाधारगृह का संचालन ग्राम भारती महिला मंडल शोभापुर सारणी द्वारा किया जा रहा है। स्वाधार गृह में महिला 6 माह से 1 वर्ष तक निवास कर सकती है। इस दौरान उसे आर्थिक उन्नयन प्रशिक्षण दिया जाकर आत्मनिर्भर भी बनाया जाएगा।
मिलेगी पुलिस/विधिक सहायता
हिंसा से पीडि़त महिला यदि किसी के विरूद्ध थाने में एफआईआर दर्ज करवाना चाहती है तो वन स्टॉप सेंटर में ही उपस्थित महिला डेस्क के समक्ष अपने विरूद्ध हुए अत्याचार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा सकती है जो नि:शुल्क होगी। इसके अलावा महिला या बालिका के द्वारा एफआईआर दर्ज कराने के बाद न्यायालय में प्रकरण भेजा जाएगा। इस दौरान केस लडऩे के लिए विधिक सहायता अधिकारी के माध्यम से विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण में होने वाले व्यय की पूर्ति वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से की जाएगी।
मिलेगी चिकित्सा सुविधा भी
शुभारंभ अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी सुमन पिल्लई ने बताया कि महिला या बालिका के साथ किसी भी प्रकार की ङ्क्षहसा से यदि उसे चोट लगने, फ्रेक्चर होने पर जिला चिकित्सालय के माध्यम से नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। कोई भी महिला या बालिका जिनके विरूद्ध किसी भी प्रकार की हिंसा होती है तो वह वन स्टॉप सेंटर में आकर सहायता प्राप्त कर सकती हैं। वन स्टॉप सेंटर का संचालन भारत सरकार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय नई दिल्ली के सहयोग से संचालित किया जा रहा है जहां महिलाएं, बालिकाएं निर्भीक होकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं।
नवल-वर्मा-बैतूल / 18-सितम्बर-2018