ज़रा हटके

पॉलिश किए गए चावल से हो सकती है दिल की बीमारी

16/09/2020


-बेंगलुरु के शोधकर्ताओं का बडा खुलासा
बेंगलुरु (ईएमएस)। मां का खानपान और गर्भ में पल रहे बच्चे के दिल के बीच लिंक होता है। वह जो खाती हैं उसका असर बच्चे के दिल की धड़कन पर पड़ता है। यह कहना है बेंगलुरु के शोधकर्ताओं का। उन्होंने रिसर्च में पाया है कि दक्षिण भारत की प्रधान खेती पॉलिश चावल से नवजात शिशुओं में विटामिन बी-1 की कमी होती है और उससे उन्हें दिल की बीमारी हो सकती है। श्री जयदेव इंस्टिट्यूट ऑफ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज ऐंड रिसर्च ने यह अध्ययन 6 महीने से कम उम्र के 250 शिशुओं में किया है। इस दौरान अस्पताल में तेज सांस, उल्टियों, स्तनपान करने में असमर्थता वाले बच्चों का मूल्यांकन किया गया। रिसर्चर्स ने इस बात पर रिसर्च किया कि ऐसे क्या कारण हैं जिससे शिशुओं की इस तरह के जानलेवा लक्षण हो रहे हैं। जांच के दौरान पाया गया कि बच्चों के दिल की दाईं तरफ और फेफड़ों में रक्त वाहिकाएं में गंभीर रूप से दबाव बढ़ा हुआ था। इस स्थिति को 'फुफ्फुसीय उच्च रक्तचाप' के रूप में संदर्भित किया गया। जांच में पता चला कि नवजातों की मां का मुख्य आहार चावल था। डॉक्टर ने बताया कि 250 नवजातों में से 231 ठीक हो गए हैं। बच्चों को थियामिन पूरक इंजेक्शन या विटामिन बी 1 दिया गया। सात बच्चों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। 12 ऐसे हैं जिन्हें बी1 इंजेक्शन दिया गया लेकिन उनमें कोई असर नहीं दिखा। बाकी का इलाज अभी चल रहा है। शिशुओं के इलाज के बाद उन्हें 60 महीने तक निगरानी में रखा गया, इस दौरान पाया गया कि बच्चों में कोई कॉम्लिकेशन नहीं हुए। डॉ. उषा ने बताया कि अधिकांश शिशुओं को अस्पताल तब लाया गया जब वह गंभीर हो गए। जो 231 शिशु ठीक हुए हैं उनमें से 4 को वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। जब शिशुओं को थियामिन इंजेक्शन दिया गया तो उनमें अचानक अच्छा सुधार देखने को मिला और वे वेंटिलेटर से बाहर आ गए। शोधकर्ताओं ने बताया कि यह आश्चर्यजनक परिणाम थे कि थियामिन इंजेक्शन देने के महज 5-6 घंटे के अंदर ही बच्चों को लगाए गए वेंटिलेटर बंद कर दिए गए। डॉक्टरों ने बताया कि थियामिन की कमी आंध्र प्रदेश, पूर्वोत्तर, ओडिशा, कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर, कोलार, चित्रदुर्ग और तुमकुरु में बड़े पैमाने पर देखने को मिली। यह वे एरिया हैं, जहां पर मुख्य खाना चावल है। उन्होंने बताया कि इस तरह के केस केरल में देखने को नहीं मिले, क्योंकि वहां पर पॉलिश्ड चावल का प्रयोग नहीं होता है। डॉ. रंगनाथ ने कहा कि यह भी बहुत जरूरी है कि छह महीने तक महिलाएं बच्चों के ब्रेस्ट फीड कराएं और इस दौरान थियामिन सप्लिमेंट्स लें। शोध के अनुसार, अनाज, फलियां, दालें, आलू, लीन मीट, दूध के साथ-साथ नट्स थियामिन का समृद्ध स्रोत हैं। संस्थान के निदेशक डॉ. सीएन मंजूनाथ ने कहा कि इस रिसर्च से लोगों को बहुत फायदा होगा। इससे लोगों को खान-पान और सही डाइट के लिए जागरूक किया जा सकेगा।
सुदामा/ईएमएस 16 सितम्बर 2020