लेख

राजयोग शिक्षा से युग प्रवर्तक बने ब्रह्मा बाबा! (लेखक- डॉ. श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट/ईएमएस)

18/01/2021

आबू की धरती है न्यारी
शिव सानिदय मिलता है
जगत पिता जो दुनिया के
उनका सुख यहां मिलता है
सतयुग को इस धरा पर
शिव परमात्मा ही लाएंगे
हम जो पतित बन गए है
शिव प्रभु ही पावन बनायेगे
निमित्त बने है ब्रह्मा बाबा
जो सोये है उन्हें जगाने को
ज्ञान,योग,सेवा,धारणा से
युग परिवर्तन को आए है।
जी हां,यह सच है।सन 1936 में कराची (अब पाकिस्तान में)से अध्यात्म व चरित्र निर्माण की अलख ओम मंडली के माध्यम से जगाने वाले दादा लेखराज जो ब्रह्मा बाबा के नाम से विख्यात हुए ,ने सन 1950 में भारत के माउंट आबू आकर ओम मंडली से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रूप में परिवर्तित हुई संस्था को दुनिया भर में फैलाया और राजयोग का ईश्वरीय ज्ञान देकर युग परिवर्तन का आधार स्तम्भ खड़ा किया।
ब्रह्माकुमारीज की राजयोग शिक्षा को आत्मसात करे तो पता चलता है कि व्यक्ति का अस्तित्व उसके शरीर से न होकर आत्मा से है।शरीर केवल एक यन्त्र की तरह है।व्यक्ति के आत्मस्वरूप से मिलन हो जाये तो रूहानियत का सहज ही आभास हो जाता है।आत्मा का स्वरूप एक ज्योति बिंदू की तरह है और वही स्वरूप परमात्मा का भी है।तभी तो आत्मस्वरूप में रहकर परमात्मा से लौ लगाना आसान है।यानि आत्मा का कनेक्शन परमात्मा से जुड़ जाए तो व्यक्ति में विकार भाव समाप्त होकर पवित्रता जन्म ले लेती है और व्यक्ति ,व्यक्ति न होकर देवत्व में परिवर्तित हो जाता है।राजयोग के इसी रहस्य के बारे में अवगत कराने हेतु ब्रह्मा बाबा ने दुनिया को नैतिकता का पाठ पढ़ाया। उनकी संस्था द्वारा स्कूल,कालेज व विश्वविद्यालय स्तर के लिए तैयार मूल्यपरक शिक्षा पाठ्यक्रम जिसे देश के 19 विश्वविद्यालयों द्वारा पढाया जा रहा है,को देशभर के युवाओं के लिए सभी शिक्षण संस्थानों में लागू कराये जाने हेतु इन पाठ्यक्रमो का केंद्रीय शिक्षा मंत्री डा रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने भी अध्ययन किया है। ये पाठ्यक्रम देश के युवाओं की दिशा और दशा बदलने में सक्षम है।डॉ निशंक ने जब ब्रह्माकुमारीज द्वारा तैयार पाठ्यक्रम देखे और पढ़े तो उन्होंने भी पाठ्यक्रम को लोकोपयोगी बताया और उनको सरहाया भी। नई पीढ़ी के भविष्य को लेकर उनके द्वारा किये गए विचार मंथन में राजयोग के अभ्यास व मूल्यपरक शिक्षा पर जोर दिया गया। वही हिंदी को राजभाषा के रूप में देशभर में , व्यवसायिक व व्यवहारिक भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने को लेकर भी ब्रह्माकुमारीज का अहम योगदान है। डा निशंक ने ब्रह्माकुमारीज के इस सुझाव पर कि देश के भविष्य युवाओं के चरित्र निर्माण के लिए मूल्य परक शिक्षा पाठ्यक्रम आवश्यक किए जाए,साथ ही हिंदी को उसका सम्मान हासिल हो,इसपर अपने सकारात्मक दृष्टिकोण से अवगत कराया। ब्रह्माकुमारी संस्था का विश्व के 140 देशों में चेतना जागृति, ध्यान, आत्म सशक्तिकरण, राजयोग मेडिटेशन का अनवरत रूप से चल रहा कार्य साधारण नहीं है, यह परमसत्ता का ही कार्य है। परमसत्ता की सच्चाई अविभाज्य है। आंतरिक भाव से ही सत्य को खोजा जा सकता है। स्वामी रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी आदि ने अपने- अपने तरीके से सत्य की खोज की। भारत ने दुनिया को युद्ध नहीं बल्कि बुद्ध दिया है।
ब्रह्माकुमारीज व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करती है। चरित्र निर्माण के लिए आंतरिक परिवर्तन की शक्ति राजयोग से प्राप्त होती है। आध्यात्म में भी पर्यावरण को सुखद बनाने की परंपरा रही है जिसके परिणामस्वरूप भारतीय संस्कृति में पेड़ों का भी सम्मान होता है।
ब्रह्माकुमारीज जो व्यक्ति चारित्रिक उत्थान, आध्यात्मिक विकास और संपूर्ण मानव जाति के कल्याण के लिए कार्य कर रही है ।संस्था मानती है कि जो मानवीय मूल्य कम हो रहे हैं। कई देश आपस में लड़ रहे हैं, हिंसा का वातावरण फैला रहे हैं। एक देश से दूसरे देश में युद्ध का तनाव बढ़ रहा है, ऐसे में भारत ही है जो सकारात्मक सोच को विकसित करके संपूर्ण विश्व में शांति, सद्भाव और समृद्धि का संदेश दे रहा है। भारत का विश्व में मान-सम्मान बढ़ रहा है। महात्मा गांधी जी ने भी वर्षों पहले विश्वभर में शांति और अहिंसा का संदेश दिया था जिसे आज भी दुनिया मानती है। शांति, सद्भाव, नैतिकता, परोपकार, सतकर्म तो हमारी संस्कृति रही है। सदियों से भारत विश्व में आध्यात्म की गंगा बहा रहा है।ब्रह्मा बाबा मानते थे कि युवाओं में ऊर्जा होती है और उन पर सभी की नजर होती है। भारत युवा है, जो देश के केंद्र बिंदु हैं। युवा भौतिकता को छोड़ आध्यात्मिकता से जुड़ें। युवा ही संदेश दे सकते हैं। यदि भारत को सही दिशा देनी है तो युवा को सही दिशा देनी होगी।उनके मार्गदर्शन में ब्रह्माकुमारीज ने विश्वविद्यालयों से जुड़कर मूल्य शिक्षा एवं आध्यात्म को पाठ्यक्रम में शामिल किया है जो बहुत ही सराहनीय कार्य है। इससे युवाओं में आध्यात्मिकता के प्रति रुझान बढ़ेगा, उन्हें नई दिशा देगा। युवाओं की ऊर्जा को ये संस्था सही दिशा में लगा रही है, उन्हें आध्यात्म से जोड़कर समाज सुधार के कार्य से जोड़ा जा रहा है। संस्था के युवा भाई-बहनों ने हजारों किमी की पैदल यात्रा निकालकर लाखों लोगों को नैतिकता का संदेश दिया। आज ऐसे कार्यों की जरूरत है। यहां की शिक्षा लेकर प्रेरणास्त्रोत नौजवान तैयार हो रहे हैं। यहां की शिक्षा शांति पर आधारित है। वर्षों पहले लगाया गया छोटा सा पौधा आज वटवृक्ष बन गया है।
ब्रह्मा बाबा मानते थे कि बिना मानसिक स्वास्थ्य के कोई देश या राष्ट्र समृद्धि की ओर नहीं बढ़ सकता है। आध्यात्म से आंतरिक शांति आती है। यही संदेश सबको देना है कि परमात्मा एक हैं और हम सब आत्मा रूप में परमात्मा की संतान।इस अलौकिक ज्ञान से जिन्होंने अभिभूत किया, उनके बारे में चंद पंक्तियां,
एक फ़रिश्ता धरा पर आया
60 बरस में प्रभु को पाया
वानपरस्ती जीवन था उनका
छोड़ दी सब मोह और माया
हीरो का व्यापार छोड दिया
भरा पूरा परिवार छोड़ दिया
धन दौलत न्यास मे निहित की
उसकी चाबी बच्चियो को सोंप दी
बच्चियां ब्रह्माकुमारी कहलाई
चरित्र निर्माण की अलख जगाई
सिंध कराची से आबू आये
शांतिदूत जग मे फैलाये
वही फ़रिश्ता दादा लेखराज है
पूरी दुनिया को उनपर नांज है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)
ईएमएस/18/01/2021