राज्य समाचार

प्रदेश में प्रगति और खुशहाली का संदेश लेकर आई है कांग्रेस सरकार : शोभा ओझा

11/09/2019

- पत्रवार्ता में कमलनाथ सरकार की पिछले आठ महीनों की उपलब्धियॉ बताई
भोपाल (ईएमएस)। प्रदेश कांग्रेस में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मीडिया विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा ने कहा कि जैसा कि आप सब जानते हैं, देश इस समय भयानक मंदी के दौर से गुजर रहा है, पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं, रुपये की कीमत रसातल में पहुंच चुकी है, जीडीपी धराशायी हो चुकी है, मैन्युफैक्चरिंग, बैंकिंग, रियल स्टेट, आॅटोमोबाइल सेक्टर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है, सार्वजनिक सेक्टर खस्ताहाल है और बढ़ती बेरोजगारी से देश में कोहराम मचा हुआ है, केंद्र सरकार की इन घोर विफलताओं के बावजूद ‘‘बंसी बजा रहे नीरो’’ के अक्षम नेतृत्व के कारण, देश की अर्थव्यवस्था के हालात, इतनी बुरी स्थिति में पहुंच गए हैं। इस मौके पर मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा प्रवक्ता जेपी धनोपिया और संतोष सिंह गौतम भी मौजूद रहे।
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार ने, पिछले 8 महीनों में ऐसे ठोस, दूरदर्शी, ऐतिहासिक और लोक कल्याणकारी फैसले लिये हैं, जिनसे प्रदेश मंदी की मार से अछूता रह कर, प्रगति के पथ पर तेजी से अग्रसर हो चला है, बावजूद इसके कि जब उसे प्रदेश की जनता की सेवा का अवसर मिला, तब खजाना खाली था। इस खाली खजाने के बाद भी, मुख्यमंत्री श्री नाथ ने मजबूत इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए, अपने शपथ-ग्रहण के दो घंटे के भीतर ही, किसानों की कर्ज माफी की फाइल पर दस्तखत कर, कांग्रेस पार्टी द्वारा दिए गए वचन को पूरा कर दिया। इसके अलावा, पिछड़े वर्ग के आरक्षण को बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के साथ ही, सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान, कन्या विवाह की राशि को 28 हजार से बढ़ा कर 51 हजार रुपये करना, राइट टू हेल्थ, राइट टू वाटर जैसे बुनियादी और ठोस कदम उठाकर, जनता को लाभान्वित करने की सोच के साथ ही, नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के 36 जिलों की चालीस नदियों का चयन कर, 21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सघन रूप से जल संरक्षण एवं संवर्धन का काम प्रारंभ किया गया है। ग्रामीण बसाहटों में 3 हजार से भी अधिक नए हैंडपंप लगा कर, पेयजल की व्यवस्था को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया है।
कमलनाथ सरकार ने जहां पुलिसकर्मियों को सप्ताह में एक दिन अनिवार्य अवकाश देने का ऐतिहासिक फैसला लिया है, वहीं उसने शिक्षकों को उनकी पसंद की वरीयता अनुसार स्थानांतरित करने के निर्णय से, प्रदेश के हजारों शिक्षकों के जीवन में खुशहाली का संचार किया है। अब तक कुपोषण से जूझते आ रहे मध्यप्रदेश में, सरकार ने कई ऐसे कदम उठाये हैं, जिनसे कुपोषण और शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके, अपने इसी प्रयास के अंतर्गत सरकार ‘मदर मिल्क बैंक’ शुरू करने जा रही है, ऐसे नवजात, जो चिकित्सकीय कारण से मां का दूध नहीं पी पाते, उन बच्चों को मिल्क बैंक का मिल्क दिया जा सकेगा। इससे प्री-मैच्योर बच्चों को डायरिया और बुखार से बचाने के साथ ही, शिशु मृत्यु दर में 22 प्रतिशत की कमी लाई जा सकेगी। जनता के जीवन व स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे मिलावटखोरों के खिलाफ, कमलनाथ सरकार जिस तरह से कहर बन कर टूट पड़ी है, वह प्रदेश के नागरिकों के प्रति उसकी चिंता और संवेदनशीलता का जीवंत प्रमाण है।
कमलनाथ सरकार के मात्र 8 महीनों के कार्यकाल की सैकड़ों उपलब्धियों में से, कुछ का, यहां पर मैंने वर्णन किया है, अगर इस समयावधि में से आदर्श चुनाव आचार संहिता के दो-तीन महीने और कम कर दिये जाएं तो सरकार को केवल 5-6 महीनों का ही वास्तविक समय मिल पाया है और केवल इतनी अल्पावधि में मिली, इतनी उपलब्धियों को, किसी भी सरकार के लिहाज से, बेहतर प्रदर्शन ही माना जाना चाहिये, लेकिन आश्चर्य तो इस बात का है कि कमलनाथ सरकार का अभी से हिसाब, वे लोग मांग रहे हैं, जो 15 वर्षों के लंबे कार्यकाल के बावजूद, प्रदेश को बीमारू से विकसित राज्य में तब्दील नहीं कर पाए। हर वक्त प्रदेश के विकास का झूठा ढिंढोरा पीटते रहने के बाद भी, हकीकत यह थी कि मध्यप्रदेश विकास की दौड़ में केवल बिहार और झारखंड से ही आगे था और देश के विकसित राज्यों की सूची में भी वह 27 क्रम पर था, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान सहित भाजपा के अन्य पुरोधा, यह कभी नहीं बताते कि हमारा प्रदेश, डेढ़ दशक तक महिला अत्याचारों, किसान आत्महत्याओं, बेरोजगारी और कुपोषण में लगातार अव्वल क्यों बना रहा, वे यह भी नहीं बता पाते कि क्यों इस प्रदेश में नए उद्योग नहीं लग पाये, क्यों यहां से लगातार प्रतिभा पलायन होता रहा, क्यों आलीराजपुर इस देश का सबसे गरीब जिला बना रहा और क्यों यहां के श्योपुर जिले को, कुपोषण के चलते, भारत का ‘इथियोपिया’ कहा जाने लगा था!
ये सभी आरोप, कांग्रेस ने इन पर नहीं लगाए बल्कि केंद्र सरकार और मीडिया की रिपोर्टों के साथ ही, विभिन्न निष्पक्ष एजेंसियों के सर्वे, समय-समय पर इन तथ्यों की पुष्टि करते रहे हैं। अनवरत 15 वर्षों तक सत्ता की मलाई खाने और प्रदेश के संसाधनों व खनिज संपदा की बंदरबांट का जो खेल, इस प्रदेश में खेला गया, वह व्यापमं, डंपर, ई-टेंडरिंग और अवैध उत्खनन के आईनों में साफ देखा जा सकता था। बेहतर होता कि प्रदेश में हुए विभिन्न महाघोटालों के साथ ही, 21 हजार से अधिक किसानों की आत्महत्याओं, छह किसानों के नरसंहार, 47 हजार से अधिक महिलाओं के साथ हुई दुष्कर्म की घटनाओं, व्यापमं घोटाले से संबंधित 50 से अधिक लोगों की संदिग्ध मौतों पर, भाजपा प्रायश्चित स्वरूप, कोई श्वेत-पत्र लाती।
भाजपा और उसके नेता, वर्तमान सरकार से कोई सवाल पूछें, इसका उनके पास कोई नैतिक तो नहीं, हां, संवैधानिक अधिकार जरूर है और हम उनके इस अधिकार का सम्मान करते हुए, उनसे केवल यही आग्रह करते हैं कि वे कमलनाथ सरकार के द्वारा उठाए जा रहे लोक कल्याणकारी कदमों की सकारात्मक आलोचना करें, लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाली हमारी इस सरकार को, प्रशंसाओं के साथ ही, रचनात्मक सुझावों और सकारात्मक आलोचनाओं की भी उतनी ही जरूरत है, आखिर हम मध्यप्रदेश के विकास का, स्वर्णिम अध्याय जो लिखने जा रहे हैं।
डेविड/ईएमएस 11 सितंबर 2019