लेख

(विचार मंथन) संक्रमण से बचाव (लेखक/ईएमएस-सिद्वार्थ शंकर)

15/01/2022

महामारी से गंभीर होते हालात के मद्देनजर दिल्ली व दूसरे राज्यों को जिस तरह की पाबंदियां लगाने को विवश होना पड़ रहा है, उसके अलावा कोई विकल्प दिखता भी नहीं है। आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए पाबंदियों को बेहद जरूरी उपायों के रूप में देखना होगा। हालांकि दिल्ली सरकार ने रेस्तरां और शराबखानों के लिए अब तक कुछ रियायतें दी थीं, लेकिन देखने में आ रहा था कि इन जगहों पर भीड़ बढ़ती जा रही है। सख्त पाबंदियां लगाने के पीछे मकसद यही है कि लोग बेवजह घरों से न निकलें और संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके। दिल्ली, मुंबई सहित अन्य छोटे-बड़े शहरों में भी बड़ी समस्या यही है कि सड़कों पर होने वाली भीड़ की समस्या से निपटा कैसे जाए। हालांकि लाखों लोगों के सामने बड़ी मजबूरी रोजाना कमाने-खाने की होती है। इसलिए काम पर जाना विवशता है। ऐसे लोगों की संख्या भी लाखों में है जो छोटे उद्योगों, फैक्टरियों में काम करते हैं। रेहड़ी-पटरी दुकानदारों के लिए मुश्किल यह है कि इस तरह की पाबंदियां उनकी कमाई का जरिया बंद कर देती हैं। हालांकि दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इन बातों का खयाल रखा है और नगर निगम के हर जोन में रोजाना एक साप्ताहिक बाजार लगाने की इजाजत दी है, ताकि छोटे-मोटे काम करने वालों की रोजी-रोटी भी चलती रहे। देश के ज्यादातर हिस्सों से संक्रमण के चिंताजनक आंकड़े आ रहे हैं। इसलिए ज्यादातर राज्यों ने अपने यहां रात का कर्फ्यू लगाया है। दफ्तरों में पचास फीसद लोगों को ही आने दिया जा रहा है। पर इतने भर से काम नहीं चलने वाला। संक्रमण से बचाव के लिए कोरोना व्यवहार के उपायों जैसे मास्क लगाने, सुरक्षित दूरी रखने और बार-बार हाथ धोने के अलावा सबसे ज्यादा जोर टीकाकरण पर रहा है। हालांकि सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए टीकाकरण को अनिवार्य बनाया भी। लेकिन ऐसे कर्मचारी अभी कम नहीं हैं जिन्होंने टीका नहीं लगवाया है। कई राज्यों में यह स्थिति काफी खराब है। इसलिए तीसरी लहर के हालात को देखते हुए सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे हर कर्मचारी के लिए टीकाकरण अनिवार्य करें, खासतौर से पुलिस बल और उनके परिवारों को। दफ्तरों में मास्क और सुरक्षित दूरी के पालन को लेकर सख्ती हो। कर्मचारियों की नियमित जांच हो। संक्रमितों के संपर्क में आने वालों का पता लगाया जाए। हालांकि यह कवायद तभी संभव और कारगर होगी, जब लोग भी इसे अपनी जिम्मेदारी समझेंगे। ओमीक्रान चिंता का कारण इसलिए भी बन गया है कि अब तक इसके ज्यादातर मामले महाराष्ट्र और दिल्ली में मिले हैं। हालांकि कर्नाटक, तेलंगाना और गुजरात में भी मामले कम नहीं हैं। जिन राज्यों में अभी यह आंकड़ा बीस से कम है, उन्हें भी इसे मामूली मान कर नहीं चलना चाहिए। यह नहीं भूलना चाहिए कि कोरोना विषाणु के डेल्टा स्वरूप ने भी इसी तरह लोगों को चपेट में लिया था। डेल्टा स्वरूप ब्रिटेन से भारत में आया था। भारत में ओमीक्रान के अब तक जितने मामले सामने आए हैं उनमें से ज्यादातर लोग दूसरे देशों से भारत में आए हैं। इसलिए हवाई अड्डों पर गहन जांच में जरा भी कोताही नए संकट को जन्म दे सकती है। संकट अब यह भी है कि दूसरी लहर के बाद देश के लगभग सभी हिस्सों में गतिविधियां सामान्य हो चली हैं। बाजारों में पहले की तरह भीड़ अब सामान्य बात है। ऐसे में ओमीक्रान का खतरा डेल्टा के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़ा नजर आ रहा है।
ईएमएस/15जनवरी2022