लेख

(विचार-मंथन) कोरोना का खतरा (लेखक- सिध्दार्थ शंकर / ईएमएस)

13/07/2020

अनलॉक-2 के बीच देशभर में बढ़ रहे कोरोना के मरीजों की संख्या ने हर किसी को डरा दिया है। 10 दिनों में मरीजों की संख्या में हुई बढ़ोतरी के बाद सरकारें लॉकडाउन की तरफ जाने लगी हैं। कोरोना के संक्रमण से महानायक अमिताभ बच्चन और उनके बेटे अभिषेक बच्चन तक नहीं बच पाए हैं। क्या खास और क्या आम कोरोना किसी को नहीं छोड़ रहा है। इस बीमारी से बचाव के लिए सुरक्षित दूरी और मास्क ही एकमात्र उपाय है। यह सभी जानते हैं, बावजूद इसके अनलॉक में इसका सभी ने पालन नहीं किया। कई जगह से तस्वीरें आईं, जिसमें दिखा लोग कितने इत्मीनान से घूम रहे हैं। इसी का खामियाजा आज पूरा देश भुगत रहा है। सरकार कह जरूर रही है कि कोरोना के खिलाफ भारत की लड़ाई को पूरी दुनिया देख रही है, लेकिन हमने अब लापरवाही की आदत नहीं छोड़ी तो दुनिया हमें हारते भी देखेगी। इसमें कोई संदेह नहीं।
अभी अच्छी बात सिर्फ यह है कि देश में कोविड-19 मरीजों की मृत्यु दर भी दुनिया की अपेक्षा इसका मतलब कतई नहीं है कि हम बेफिक्र होकर बैठ जाएं। हमारी बड़ी आबादी अब भी खतरे में है, इसलिए संक्रमण तेजी से फैल सकता है। ऐसे में हमें इलाज और दवाइयों के इतर बचाव की सारी सावधानियां बरतने पर जोर देना होगा। शहरों के स्लम एरिया में संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है। सरकारों को स्थानीय स्तर पर लॉकडाउन लागू करना होगा। उन्होंने कहा कि कंटेनमेंट जोन में संक्रमण का स्तर बहुत ज्यादा पाया गया है। सरकार कोरोना से लडऩे के हर कदम उठा रही है, लेकिन ये प्रयास तभी फलीभूत होंगे, जब नागरिक स्वयं तकलीफ सहने की हद तक सतर्कता बरतेंगे। मानव व्यवहार के कई अध्ययनों के अनुसार ग्रामीण भारत में हर चौथा व्यक्ति बच्चों को खिलाने से पहले हाथ नहीं धोता। गरीबी की वजह से साबुन का इस्तेमाल न करना और बीमारी के लक्षण छिपाना, ताकि रोजी-रोटी के लिए बाहर निकलने पर रोक न लगे। स्वच्छता-शून्य गंदी बस्तियों का जीवन इस चरण में देश को बेहद खतरनाक मोड़ पर ला चुका है। इस चरण में बीमारी का प्रसार बेहद तेजी से होता है।
भारत के तमाम राज्यों में हाथ धोने के लिए साबुन और पानी की भारी कमी है। दूसरे चरण में कोरोना के प्रसार की रफ्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हर तीसरे दिन मरीजों की संख्या दूनी हो जाती है। जिन देशों में संक्रमण चरम पर है, वहां इसी दौर में जबरदस्त प्रसार देखा गया है। फिर भारत में कोरोना के मामले अब जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, वे हालात की गंभीरता को बताने के लिए काफी हैं। देश का शायद ही कोई राज्य ऐसा बचा होगा जहां से कोरोना संक्रमित व्यक्ति के मिलने की खबर न आ रही हो। सबसे ज्यादा खराब हालात तो महाराष्ट्र में है जहां संक्रमित लोगों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। पूरे देश में सरकार लोगों जागरूक कर रही है, मीडिया के माध्यम से जानकारियां दे रही है, हाथ धोने से लेकर मास्क पहनने जैसी अपील कर रही है, इसके बावजूद लोग लापरवाही बरत रहे हैं और इसका सीधा असर यह हो रहा है कि महामारी को फैलने से रोकने के जरूरी कदम बेकार साबित हो रहे हैं। कोरेाना से लड़ाई सरकार और जनता दोनों की है, जब एक भी गंभीर नहीं होगा, महामारी का खतरा बढ़ता जाएगा।
ईएमएस/ 13 जुलाई 2020