लेख

मकर संक्रांति (लेखक-प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे / ईएमएस)

13/01/2021


सूर्यदेव की मृदु किरण,जब उत्तर की ओर
मकर राशि पर सूर्य का,हो प्रभाव घनघोर
तब आती संक्रांति,लेकर तेज, प्रताप,
नदिया,पोखर,ताल में,डुबकी का हो ज़ोर।

पर्व बहुत पावन बने,व्यापक है अध्यात्म
उड़ें पतंगें,रौनकें,खुश होवें परमात्म
मेलों-ठेलों से समाँ,हो जाता मदमस्त,
जीवन हो आनंदमय,आह्लादित निज आत्म।

तिल्ली के लड्डू बनें,पकवानों का शोर
मुन्गौड़ी और पापड़ी,नाचे मन का मोर
बहुत भला-चोखा लगे,सबको ही यह पर्व,
हर इक हो उत्साह में,मस्ती पर हो ज़ोर।

मकर पर्व अति नीक है,सूर्यदेव का मान
हर इक उनकी धूप का,करते हैं सम्मान
अर्घ्य देंय,वंदन करें,मांगें नित वरदान,
हे देवों के देव तुम,रहना दयानिधान।।

सूर्यदेव की ही दया,पाते हम आलोक
जगमग होता है सतत्,जिससे सारा लोक
अंधकार को चीरकर,जो बाँटें उजियार,
अन्न पके,मौसम बनें,परे हटे सब शोक।
13जनवरी/ईएमएस