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एलएसी पर जरूरत पड़ी तो गोलियां चलाने से भी नहीं चूकेंगे हमारे सैनिक : भारत की चीन को चेतावनी

25/09/2020

नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत ने चीन से दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कह दिया है कि हमारे सैनिक खुद की सुरक्षा और पूर्वी लद्दाख में अपनी सीमा की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। भारत ने बिल्कुल साफ-सुथरी भाषा में चीन से कहा कि अगर क्षेत्र में हालात नियंत्रण से बाहर हुए तो हमारे सैनिक गोलियां चलाने से भी तनिक भी नहीं हिचकेंगे। कुल मिलाकर चीन को सीधा संदेश दे दिया गया है कि मजबूर किया गया तो भारत संघर्ष से पीछे नहीं हटेगा। एक अधिकारी ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर कहा, 'चीन को साफ संदेश दिया गया है कि धक्का-मुक्की और झड़प की कार्रवाई अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्हें साफ समझा दिया गया है कि अगर चीनी सैनिकों की तरफ से पारंपरिक हथियारों का इस्तेमाल हुआ तो भारतीय सैनिक गोलियां चलाने में देर नहीं करेंगे।'
हालांकि, दोनों पक्षों ने अग्रिम मोर्चों पर अतिरिक्त सैनिक भेजकर तनाव और नहीं बढ़ाने पर सहमति जताई, लेकिन कई दौर की कूटनीतिक और सैन्य स्तरीय बातचीत के बावजूद पूर्वी लद्दाख में महीनों से जारी तनाव कम किए जाने का अब तक कोई बड़ा रास्ता नहीं खुल सका है। दोनों देशों की सेना घनघोर सर्दियों के मौसम में भी अपने-अपने मोर्चों पर कायम रहने को तैयार हैं। 10 दिन बाद 14 कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और साउथ शिनजियांग मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट चीफ मेजर जनरल लियु लिन की अगुवाई वाले प्रतिनिधिमंडलों के बीच सातवें दौर की बातचीत होनी है ताकि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से सटे अग्रिम मोर्चों से अतिरिक्त सैनिकों की वापसी सुनिश्चित की जा सके। एक सूत्र ने गुरुवार को बताया, '21 सितंबर को छठे दौर की बातचीत में भारत ने चीन के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी और कहा कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पाएलए) को कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं करनी चाहिए, वरना भारतीय सैनिक अपनी रक्षा के लिए कदम उठाएंगे और आत्मरक्षा में फायरिंग भी करेंगे।'
ध्यान रहे कि पीएलए ने पैंगोंग सो-चुशूल में 29-30 अगस्त की रात हासिल कई रणनीतिक चोटियों को हटाने की कोशिश की तो भारतीय सैन्य दल ने चेतावनी देने के लिहाज से कम-से-कम चार गोलियां दागीं। तब से वहां पीएलए ने कुछ नहीं किया है, लेकिन माहौल तनावपूर्ण है। दोनों पक्षों ने बीते सोमवार को इस बात पर सहमति जताई कि अब अग्रिम मोर्चों पर अतिरिक्त फौजें नहीं भेजी जाएंगी। सूत्र ने बताया, 'दोनों पक्ष कर्नल और ब्रिगेडियर स्तर पर हर दिन एक-दूसरे से बात कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी से बचा जा सके।' उन्होंने कहा, 'जरूरत पड़ी तो सर्दियों में भी हमारे सैनिक अग्रिम मोर्चों पर तैनाती को तैयार हैं। पीएलए भी तैयार जान पड़ती है।'
विपिन/ ईएमएस/ 25 सितंबर 2020