राष्ट्रीय

छत्तीसगढ़ विधानसभा 2018 विशेष (06आरएस02एचओ)

06/11/2018


कांग्रेस को पटखनी देने पूरा बल लगाएगी बालौद में भाजपा
बालौद विधानसभा चुनाव - 2018
बालौद ( ईएमएस)। बालोद जिला के तीनों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं। जिला मुख्यालय की विधानसभा होने के कारण संजारी बालोद विधानसभा का अपना महत्व है।बालोद जिले की तीनों विधानसभा क्षेत्र गुंडरदेही, डौंडीलोहारा एवं संजारी बालोद से कांग्रेस पार्टी से चुनाव लडऩे 94 लोगों ने आवेदन जमा किया है। जिसके बाद से भाजपा पार्टी में भी तीनों विधानसभा से सैकड़ों दावेदार चुनाव लडऩे नजऱ आ रहे हैं, गौरतलब हो की पिछले विधानसभा चुनाव में बालोद जिले के तीनों विधानसभा में कांग्रेस के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी, जिसके बाद से बालोद जिला कांग्रेस का गढ़ माना जाता है।बता दें की पिछले विधानसभा चुनाव में संजारी बालोद विधानसभा से कांग्रेस विधायक भैयाराम सिन्हा ने भाजपा से प्रत्याशी रहे प्रीतम साहू को 30 हजार 433 के भारी अंतर से हराया था, जो अब तक के इतिहास में संजारी बालोद विधानसभा से किसी प्रत्याशी की सबसे बड़ी जीत है। वहीं डौंडीलोहारा विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी अनिला भेडिय़ा ने भाजपा प्रत्याशी होरीलाल रावटे को 19 हजार 735 वोटों के अंतर से हराया था, माना जाता है कि डौंडीलोहारा विधानसभा क्षेत्र में इससे पहले इतने ज्यादा अंतरों से हार-जीत का फैसला नहीं होता था।गुंडरदेही विधानसभा से कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी रहे राजेंद्र राय ने भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र साहू को 21 हजार 403 मतों के अंतर से हराया था, गुंडरदेही विधानसभा में अभी तक हार जीत का फैसला बहुत कम मतों के अंतर से ही हुआ है। लेकिन पिछले चुनाव में पिछले 5 विधानसभा चुनाव के रिकार्ड टूटे थे, अगर इन सब आकड़ों पर गौर किया जाए तो प्रतीत होता है कि भाजपा अपने हारे हुए पीटे मोहरों पर दांव नहीं खेलेगी।

संजारी बालोद विधानसभा :
संजारी बालोद विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस पार्टी ने बीजेपी को मात दी थी। 2013 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के भैयाराम सिन्हा ने बीजेपी के प्रीतम साहू को मात दी थी। उन्होंने प्रीतम साहू को करीब 30 हजार वोटों के अंतर से हराया था।संजारी-बालोद सीट से 1993 के चुनाव में कांग्रेस के जालमसिंह पटेल जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 1998 में भाजपा के लोकेन्द्र यादव विधायक चुने गए। राज्य स्थापना के बाद 2003 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां से प्रीतम साहू को मैदान में उतारा तो कांग्रेस ने यादव को टिकट दिया। भाजपा की आंधी में यादव अपनी सीट नहीं बचा पाए और करीब 13 हजार वोटों से हार गए। 2008 में भाजपा ने मदन साहू तो टिकट दिया तो कांग्रेस ने भी मोहन पटेल के स्र्प में नए चेहरे को मैदान में उतारा। कांग्रेस का यह प्रयोग भी सफल नहीं हो सका। पटेल करीब 6636 मतों से हार गए। वर्ष 2011 में इस सीट पर हुए उपचुनाव मंे भाजपा की कुमारी बाई साहू ने कांग्रेस के मोहन पटेल को 9504 मतों से पराजित किया। वर्ष 2013 के चुनाव में कांग्रेस के भैयाराम सिन्हा ने भाजपा के प्रीतम साहू को 30433 मतों से पराजित किया।
2013 विधानसभा चुनाव, भैयाराम साहू, कांग्रेस, कुल वोट मिले 88874 प्रीतम साहू, बीजेपी, कुल वोट मिले 58441
2011 उपचुनाव, कुमारी मदन साहू, बीजेपी, कुल वोट मिले 64185 मोहन पटेल, कांग्रेस, कुल वोट मिले 54520
2008 विधानसभा चुनाव, मदन साहू, बीजेपी, कुल वोट मिले 56620 मोहन पटेल, कांग्रेस, कुल वोट मिले 49984

डौंडीलोहारा विधानसभा :
डौंडीलोहारा में चुनावी रंग भी दिखाई देने लगे हैं। कांग्रेस की इस कब्जे वाली सीट पर बीजेपी जीत दर्ज करने की रणनीतियां बनाने में जुट गई है।. 2013 के चुनावी रण में कांग्रेस ने जीत का डंका बजाया और अनिला भेड़िया विधायक चुनी गईं। अनिला भेडिय़ा ने भाजपा प्रत्याशी होरीलाल रावटे को 19 हजार 735 वोटों के अंतर से हराया था, माना जाता है कि डौंडीलोहारा विधानसभा क्षेत्र में इससे पहले इतने ज्यादा अंतरों से हार-जीत का फैसला नहीं होता था।
गुंडरदेही विधानसभा :
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले की गुंडरदेही सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। सियासत की बात की जाए इस सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच हमेशा ही कड़ी टक्कर रही है। इस बार यहां का सियासी मिजाज बदला हुआ है। मौजूदा विधायक आरके राय के अजीत जोगी की पार्टी में शामिल हो जाने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।गुंडरदेही सीट पर पिछले पांच चुनावों में हर बार नए चेहरे को जीत मिलती रही। गुंडरदेही के सियासी इतिहास की बात की जाए तो ये सीट 1962 में वजूद में आई और इस सीट पर कांग्रेस के उदयराम पहले विधायक बने। इसके बाद 1967 में यहां से कांग्रेस के वासुदेव चंद्राकर, 1972 में घनाराम साहू ने निर्दलीय के रूप में चुनाव जीता। इसके बाद उन्होंने 1977 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत हासिल की थी।कांग्रेस के हरिहर प्रसाद शर्मा 1980 और 1985 में विधायक बने। इसके बाद 1990 और 1993 के चुनाव मे बीजेपी के टिकट पर ताराचंद ने सफलता पाई। 1998 में घनाराम साहू ने फिर यहां कांग्रेस की वापसी कराई 2003 में बीजेपी की रमशीला साहू ने उन्हें मात देकर विधायक बनी। 2008 में बीजेपी के वीरेंद्र साहू विधायक बने और 2013 में कांग्रेस ने फिर कब्जा जमाया।
2013 के नतीजे कांग्रेस के राजेंद्र कुमार राय को 72770 वोट मिले थे। बीजेपी के वीरेंद्र कुमार साहू को 51490 वोट मिले थे।
2008 के परिणाम बीजेपी के वीरेंद्र कुमार साहू को 64010 वोट मिले थे। कांग्रेस के घनाराम साहू को 61425 वोट मिले थे।
2003 के नतीजे बीजेपी के रमशिला साहू को 40813 वोट मिले थे।कांग्रेस के घनाराम साहू को 31523 वोट मिले थे।
----/06 नवम्बर 2018