लेख

ग्वालियर क्या हेरिटेज शहर घोषित नहीं हो सकता ? (लेखक-नईम कुरेशी/ईएमएस) (06एलके07एचओ)

06/12/2018

ग्वालियर शहर आगरा, दिल्ली, जयपुर के बाद सबसे ज्यादा प्रमुख स्मारकों व इतिहास के गवाहों वाला शहर माना जाता है। यहाँ का किला विश्व प्रसिद्ध किलों में जाना जाता है। यहाँ के किले पर बने मंदिर, महल व मकबरे भी देश दुनिया में जाने माने जाते हैं। मानसिंह तोमर के महल (1486-96) पर मुगल बादशाह बाबर तक लिख चुके हैं। शून्य की इजाद से जुड़ा चतुर्भुज मंदिर इसी किले पर 8वीं सदी का वहीं 9वीं सदी का तेली का मंदिर भी काफी भव्य स्मारक है। महाराज बाड़ा, अकबर व अमर गायक तानसेन के गुरु मुहम्मद ग़्ाोस साहब का मकबरा भी देश भर में जाना जाता है, जहाँ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने गत 20 सालों में काफी काम भी किया है फिर भी भोपाल, इन्दौर, जबलपुर की तंज पर इस शहर को हेरिटेज शहर नहीं कहा जाता।
भोपाल को संवारने में 1970-80 में तत्कालीन वहाँ के प्रशासक नीलकंठ बुच ने अहम काम किया। इन्दौर में प्रकाश चन्द्र सेठी से लेकर चन्द्र प्रभाष शेखर व विजयवर्गीय साहब ने काफी दिलचस्पी से काम किया। पर ग्वालियर में 20 साल पहले माधवराव सिंधिया साहब के बाद कुछ खास नहीं हो सका। स्मार्ट सिटी जरूर बनाया गया पर बजट का 10 फीसद भी यहाँ 3 सालों में खर्च न हो सका। दर्जनभर स्मारक दिल्ली के लाल किले के स्तर के होने पर भी राजनैतिक इच्छाशक्ति ही खत्म सी दिखाई देती है हमारे शहर ग्वालियर के लिये इन्दौर की तर्ज पर ग्वालियर के विकास में सभी दल वाले एक मंच पर ही नहीं दिखाई देते। रोप-वे जैसे काम को कराने में 15 साल लगा दिये गये, सिर्फ एन.ओ.सी. नहीं मिल सकीं। 20 साल पहले इसी ग्वालियर शहर में 4 बड़े-बड़े ओवरब्रिज बनाये गये, 2 अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम बन गये, 3 राष्ट्रीय स्तर के शिक्षण संस्थान टेक्नोलाॅजी व टूरिज्म के बन गये पर फिर भी हिस्ट्री व हेरीटेज पर काम खास नहीं हो पाया। इसके लिये एक बड़े अखबार ने 20 शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर गत दिनों अच्छी पहल कर ग्वालियर की नई पहचान हेरिटेज सिटी बनाने की व इसे घोषित करने की बात कही है जो स्वागत योग्य है।
ईएमएस/प्रवीण/06/12/2018