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सबसे कम खर्चीला रहा 1957 में हुआ दूसरा लोकसभा चुनाव, केवल 10 करोड़ आया था खर्च

26/03/2019

नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। लोकतांत्रिक परंपरा को जारी रखना कोई हंसी-खेल नहीं है। हर 5 साल में देश को इसके लिए पहले से बड़ी कीमत चुकानी होती है। सन 2019 के लोकसभा चुनाव में कितना खर्च हुआ, इसका पता तो चुनाव के बाद ही चलेगा, लेकिन चुनाव खर्च के लिहाज से 2014 का चुनाव अब तक का सबसे महंगा चुनाव है।
सन 2014 के चुनाव में चुनाव सामग्री और उपकरणों पर खर्च के साथ ही हर मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने के लिए की जानेवाली रकम में भी बहुत बड़ी वृद्धि देखी गई थी। अब तक हुए लोकसभा चुनाव में सबसे कम खर्चीला चुनाव 1957 में हुआ दूसरा लोकसभा चुनाव था। यह चुनाव केवल 10 करोड़ रुपए में संपन्न हो गया था। दूसरी ओर, सन 2014 का चुनाव अब तक का सबसे खर्चीला चुनाव था।
सन 2014 के चुनाव पर पूर्व में हुए सभी लोकसभा चुनावों के कुल खर्च का लगभग तीन चौथाई खर्च आया था। इस खर्च में चुनाव उपकरणों की खरीद, इंस्टॉलेशन, मतगणना स्टाफ और मतदान अधिकारियों की नियुक्ति पोलिंग बूथ और वहां पर अस्थाई फोन सुविधा, मतदान की स्याही, अमोनिया पेपर जैसी चीजों पर हुआ खर्च शामिल है।
प्रति मतदाता होनेवाले खर्च की बात की जाए तो हर चुनाव के साथ इसमें भी वृद्धि देखी गई है। पहले लोकसभा चुनाव में यह कीमत एक रुपया से भी कुछ कम था और अगले छह लोकसभा चुनाव तक यह आंकड़ा एक रुपये के आसपास ही रहा। हालांकि, 2014 लोकसभा चुनावों में वृद्धि की दर पिछले चुनाव की तुलना में तीन गुना अधिक रही। 2014 लोकसभा चुनावों में प्रति वोटर खर्च लगभग 50 रुपये रहा। भारत के पहले लोकसभा चुनाव में करीब 20 करोड़ मतदाताओं ने हिस्सा लिया था। इसके बाद हर चुनाव में मतदाताओं की संख्या में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है। इस बार 900 मिलियन मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे और यह आंकड़ा अमेरिका, ब्राजील और इंडोनेशिया की कुल जनसंख्या से काफी अधिक है। जबकि, ये तीनों ही देश, दुनिया में, जनसंख्या के लिहाज से तीसरे, चौथे और पांचवें सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं।
अनिरुद्ध, ईएमएस, 26 मार्च 2019