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ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन की विश्वसनीयता पर उठे सवाल, बाजार में आने में और होगी देरी

27/11/2020

लंदन (ईएमएस)। कोरोना महामारी के लिए महीने तीन प्रभावशाली वैक्सीन चर्चा में चल रही थीं। बायोटेक फर्म मॉर्डेना और फाइजर एंड बायोटेक के अलावा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन भी काफी सुर्खियों में थी। ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन को एस्ट्राजेनका कंपनी सपोर्ट कर रही है। लेकिन अब वैक्सीन की विश्वसनीयता पर खतरा मंडराता दिख रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वैक्सीन के डेवलपर्स का कहना था कि वैक्सीन या तब 90 प्रतिशत प्रभावशाली थी या 62 प्रतिशत। जिन लोगों को वैक्सीन का हाफ डोज मिला और फिर एक महीने बाद फुल डोज मिला, उनमें इस वैक्सीन का प्रभाव 90 प्रतिशत तक देखने को मिला। हालांकि जिन लोगों को दो बार फुल डोज दी गई उनमें सिर्फ 62 प्रतिशत प्रभाव देखने को मिला।
एस्ट्राजेनका ने घोषणा की थी कि हाफ और फुल डोज लेने वाले लोगों की संख्या 2800 से कम थी, वहीं दो फुल डोज लेने वालों की संख्या 8900 थी। सवाल ये था कि आखिर छोटी डोज और बड़ी डोज के चलते नतीजों में इतना बड़ा अंतर क्यों दिखाई दे रहा था। मामले में एस्ट्राजेनका और ऑक्सफोर्ड के रिसर्च का कहना था कि वे इस बारे में कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं। इसके अलावा भी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों की कमी देखने को मिली।
एस्ट्राजेन्का की रिसर्च एंड डेवलपमेंट के अधिकारी ने भी कंपनी की मुसीबतों को बढ़ाते हुए कहा था कि कंपनी का लोगों को सिर्फ फुल डोज देने का प्लान था और उन्होंने हाफ डोज देने की तैयारी नहीं की थी लेकिन गलती से ऐसा हो गया। हालांकि उन्होंने अपनी इस गलती को अपने लिए फायदेमंद बताया क्योंकि डोज में हुई गड़बड़ी ने उन्हें काफी पॉजिटिव नतीजे दिए हैं।
एस्ट्राजेन्का-ऑक्सफोर्ड ने वैक्सीन ट्रायल रिपोर्ट्स के जो आंकड़े पेश किए हैं, उनमें पारदर्शिता की कमी देखने को मिल रही है। हालांकि मामले में फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) का कहना था कि वे किसी भी वैक्सीन से 50 प्रतिशत प्रभावशाली होने की उम्मीद कर रहे हैं।
आशीष/ईएमएस 27 नवंबर 2020