लेख

एकता और शक्ति के संदेश को घर से राष्ट्र तक विस्तार की आवश्यकता (लेखक- विवेक रंजन श्रीवास्तव / ईएमएस)

30/06/2020


फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट का एक प्रसिद्ध कथन है "इतिहास में जिस बिंदु पर हम खड़े हैं वो वादों और खतरों से भरा है। दुनिया या तो एकता और व्यापक रूप से साझा समृद्धि की ओर बढ़ेगी या इससे अलग हो जाएगी"।
जब भी मानवीय एकता में कोई हलचल पैदा हुई है दुनिया ने बहुत आतंक और अस्थिरता देखी है। प्रायः ही नोबल शांति पुरस्कार वैश्विक मंच पर मानवीय एकता के विस्तार हेतु किये गये कार्यो के लिये दिया जाता रहा है।
भारतीय संदर्भो में एकता का बड़ा महत्व है क्योकि भारत पाकिस्तान का बंटवारा कर अंग्रेजो ने धर्म के आधार पर पाकिस्तान का निर्माण किया था, जबकि शेष भारत विभिन्नता में एकता के स्वरूप में मुखरित हुआ है। देश में अनेको भाषायें, ढ़ेरों बोलियां, कई संस्कृतियां, विभिन्न धर्मावलम्बी, क्षेत्रीय राजनैतिक दल हैं। यही नही नैसर्गिक दृष्टि से भी हमारा देश रेगिस्तान, समुद्र, बर्फीली वादियों और मैदानी क्षेत्रो से भरा हुआ है। हम विविधता में देश के रूप में एकता के जीवंत उदाहरण के लिए सारी दुनियां के लिये पहेली है। जाति, वर्ग, धर्म आदि अनेक व्यैक्तिक मान्यताओं में भेद होने के बावजूद एकता और परस्पर शांति, प्रेम सद्भाव के अस्तित्व पर हमारी शासन व्यवस्था और समाज का ताना बाना केंद्रित है।विविधता में यह एकता ही राष्ट्र की शक्ति है। विशिष्ट रीति-रिवाजों के साथ लोग हमारे देश में शांत तरीके से अपना जीवनयापन करते हैं, यहाँ मुसलमान, सिख, हिंदू, यहूदी, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी सहअस्तित्व के संग जोश और उत्साह के साथ अपने धार्मिक त्यौहार मनाते हैं।
जब इस तरह का परस्पर सद्भाव होता है तो विचारों में अधिक ताकत, बेहतर संचार और बेहतर समझ होती है। अंग्रेजों के भारत पर शासन के पहले दिन से लेकर भारत की आज़ादी के दिन तक भारतीयों की आजादी का संघर्ष सभी समुदायों की धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के अलग होने के बावजूद जनता के संयुक्त प्रयास किए बिना आजादी संभव नहीं थी। जनता सिर्फ एक लक्ष्य से प्रेरित थी और यह भारत की आजादी प्राप्त करने का उद्देश्य था। यही कारण है कि भारत की स्वतंत्रता संग्राम विविधता में एकता का एक अप्रतिम उदाहरण है।
आजादी के तुरंत बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इस बुद्धिमत्ता से देश की ५६५ छोटी बड़ी रियासतो का संविलयन भारत गणराज्य में करवाया कि वे एकता के प्रतीक पुरुष बन कर उभरे। कृतज्ञ राष्ट्र ने गुजरात में नर्मदा पर बने सरदार सरोवर बांध के जलाशय के बेट टापू पर सरदार पटेल की १८२ मीटर ऊँची प्रतिमा का निर्माण किया है, जिसे स्टेच्यू आफ यूनिटी नाम दिया गया है। गर्व की बात है कि यह मूर्ति दुनिया की अब तक स्थापित मूर्तियो में सबसे बड़ी है। एकता वह अद्भुत शक्ति है जो हमें नैतिक रूप से समृद्ध करती है। उदाहरण के लिए एक परिवार की इकाई में परस्पर प्रेम, बंधन और सद्भाव एकता का प्रतीक हैं, इन्ही मूलभूत भावनात्मक लगावों के कारण सारा परिवार एक छत के नीचे एक साथ रहता है।परिवार जन एक-दूसरे के साथ अपनी परेशानियों और दुःखों को, खुशियो को साझा करते हैं यही एकता की मूल शक्ति है। एकता का महत्व निर्विवाद है, पानी की बूंदें ही महासागर बना देती हैं और बूंदें ही अथाह जल की एकता की इकाई हैं।एकता एकल और संयुक्त लक्ष्य के लिए एकजुटता व सद्भाव की भावना है।
एकता के संदर्भ में किसान और उसके पुत्रों की प्रसिद्ध कहानी हम सब ने सुनी है, किसान ने अपने कट्टरपंथी व परस्पर बिखरे हुये विचारो वाले ४ पुत्रों को लकड़ी के एक बंडल को तोड़ने के लिए कहा और बेटे ऐसा करने में विफल हो गए। बाद में किसान ने उन्हें प्रत्येक छड़ी को अलग-अलग तोड़ने के लिए कहा और उन्होंने बिना कोई अतिरिक्त प्रयास किए ही अलग अलग लकड़ी को तोड़ दिया। इस उदाहरण से पिता ने उन्हें महत्वपूर्ण सबक सिखाया कि अगर वे एकजुट होकर खड़े रहे तो कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा और अगर विभाजित हो गए तो वे बिखर कर टूट जाएंगे। तार्किक दृष्टि से पूछा जा सकता है कि आखिर वह रस्सी किस चीज की बनी होती है जिससे लकड़ियों के बंडल को बांधा गया था, इसका सरल उत्तर ही एकता में शक्ति प्रदर्शित करता है, वह रस्सी प्रेम, सद्भाव परस्पर सामंजस्य और एक दूसरे के लिये भावनात्मक लगाव के सूत्रो से बनी होनी चाहिये, तभी एकता शक्ति में रूपांतरित होती है। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि मानव जीवन के प्रत्येक चरण में एकता बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जबकि घृणा और ईर्ष्या एकता को कमज़ोर करती है जिसका परिणाम बर्बादी और तबाही ही होता है। एकता समूह के सभी सदस्यों के लिए समान अधिकार प्रदान करती है। एक साथ खड़े रहना कार्यस्थल, निजी जीवन और विभिन्न संगठनों में हमारे मनोबल को बढ़ाता है। एकता संबंधों को मज़बूत करने और टीम वर्क पर जोर देने में मदद करती है, जिससे प्रदर्शन में सुधार, काम की गुणवत्ता और जीवन शैली बेहतर परिणामी बन जाती है। आईये हम सब आत्म चिंतन करें और संकल्प लें कि हम घर, परिवार अपने परिवेश समाज और देश के व्यापक हित में सदैव एकता पूर्ण व्यवहार करेंगे।
30जून/ईएमएस