राज्य समाचार

" अहिंसामयी धर्म का स्थान सर्वोपरि है : आचार्यश्री आर्जव सागर

05/10/2019


भोपाल (ईएमएस)। आचार्य गूरूवर 108 श्री आर्जव सागर जी महाराज जी के मंगल सानिध्य में अशोका गार्डन में चल रहे चतुर्मास में श्रद्धालु संयम ,भक्ति साधना में लीन हैं। आज प्रवक्ता अंकित जैन ने बताया कि बहार सुरत से पधारे श्रावक श्रेष्ठी एवं श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री को शास्त्र भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया और आचार्य श्री ने विशेष रूप से बच्चों को संदेश देते हुए कहा कि बुरी संगति हमें कभी बदनाम किये बिना नहीं रहती अगर कोई व्यक्ति शराब की दुकान पर खड़ा होकर एक गिलास से दूध पिये तो सामने वाले समझते हैं कि वह शराब पी रहा है। आज आचार्य श्री ने आशीष वचनों में धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सभी धर्म व संप्रदायों में अहिंसा का स्थान सर्वोपरि है।दया ही धर्म का मूल है इसी अहिंसा धर्म का पालन करने के लिए जैन धर्म में रात्रि भोज नहीं करने व पानी छान कर पीने कि बात कही गयी है,क्योकी जैन धर्म अहिंसामयी धर्म है।इसमें सभी जीवों के प्रति दया भाव रखने की वात कही गयी है।
आचार्य श्री ने आगे बताते हुए कहा कि जैनी रात्रि भोजन नहीं करते।यह धार्मिक के साथ वैज्ञानिक दृष्टि से निषेध है,क्योकि दिन की बजाय रात में जीवों की उत्पत्ति ज्यादा होती है।रात्रि में भोजन तैयार करते समय भोज्य पदार्थ के साथ सूक्ष्म जीव मिल जाते हैं और उनका विष व्यक्ति को रोगी बना देता है।दया करूणा धर्म का मूल है इस भाव को आत्मसात कर ही व्यक्ति अपना जीवन सुधार सकता है। आशीष वचन में विराम देते हुए कहा की सत्य व अहिंसा की राह पर चल कर ही महात्मा गांधी जी ने अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाया था।उन्होंने बच्चों को तम्बाकू धूम्रपान व मदिरा जैसी बुराइयों से दूर रहने का भी आव्हान किया।
डेविड/ईएमएस 05 अक्टूबर 2019