लेख

न थम, कदम बढ़ाये जा (लेखक/ईएमएस-प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध)

23/02/2021

न थम, कदम बढ़ाये जा
प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध
शिला कुंज , नयागांव , जबलपुर ४८२००८
ये जिन्दगी है एक सफर - हैं राह में हजार डर
पहुँचने अपने लक्ष्य पर सधे कदम बढ़ाये जा
प्रसन्न गुनगुनाये जा
भटक न तू इधर - उधर , अभीष्ट पे ही रख नजर ,
समय के साथ चल मगर , खुशी से मुस्कराये जा
न थम, कदम बढ़ाये जा
चलें भी आंधियां अगर , न धुन्ध में दिखे डगर
तो भी तू रह सदा निडर , नई उमंग जगाये जा
विजय के गीत गाये जा
हैं भीड़ भड़भड़े जिधर , वहीं तो हैं बसे नगर
वहाँ पहुँच बनाने घर , तू हौसला बढ़ाये जा
तू शक्ति आजमाये जा
तू धुन को नित सम्हाल कर , धूप छांव पार कर
लगन को अपनी प्यार कर , तू जीत को बुलाये जा
विजय के भाव लाये जा
जो श्रम से न हुये विकल , वही हुये सदा सफल
संकल्प तेरा हो अटल , नवीन पथ बनाये जा
तू आत्म बल बढ़ाये जा
न थम कदम बढ़ाये जा ....
ईएमएस/23फरवरी2021