लेख

राजस्थान में कैसे रूकेगी किसानो की आत्महत्याएं ? (लेखक - रमेश सर्राफ धमोरा)

10/07/2019

राजस्थान में आए दिन कर्ज से परेशान होकर किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। वहीं सरकार की किसानों के कर्ज माफी की घोषणाएं कागजी बनकर रह गई हैं। किसान कर्जमाफी का वादा कर सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने कुर्सी संभालते ही 10 दिनों के भीतर कर्जमाफी के कागजी आदेश तो निकाल दिए थे लेकिन इसका सीधा लाभ किसानों को मिलता हुआ नजर नहीं आ रहा है। पिछले 7 महीनों में कर्ज के चलते कई किसानो के आत्महत्या की खबरें सामने आई हैं। किसान खुदकुशी के मामले लगातार बरकरार है। एक मामले में अजमेर के भिनाय में तेलाड़ा गांव में कर्ज से परेशान किसान ने विषाक्त पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या करने की घटना सामने आई है।
ऐसा ही एक मामला झुंझुनू जिले के बिसाऊ थाना क्षेत्र के कोलिंडा का बास (उत्तर) में सामने आया है। कर्ज से परेशान किसान ताराचंद मेघवाल (45) ने बेटी व दो बेटों की शादी से तीन दिन पहले ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि किसान ने किसान क्रेडिट कार्ड से 2.10 लाख रुपए के दो लोन ले रखे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि शादी में भी रिश्तेदार मदद कर रहे थे। 20 दिन पहले भी बैंक से लोन चुकाने के लिए फोन आया था। इससे ताराचंद तनाव में था। ताराचंद मेघवाल की बेटी संगीता की शादी 8 जुलाई को यानी आज है। दो बेटों रविंद्र व वीरेंद्र की शादी नो जुलाई को है। ताराचंद खुद भी चार-पांच दिन से उत्साह के साथ शादी की तैयारियों में जुटा था, लेकिन इससे पहले ही खुशियां मातम में बदल गई।
राजस्थान के बारां जिले में 42 वर्षीय एक किसान अपने खेत में पेड़ से लटका हुआ मिला। किसान प्रत्यक्ष तौर पर खराब आर्थिक हालत और दो बच्चों की बीमारी की वजह से परेशान चल रहा था। पुलिस ने 2 जुलाई को यह जानकारी दी। किसान पर बैंक के साथ-साथ अन्य लोगों का भी कर्ज था। बोहत कस्बे में एक किसान ने आर्थिक तंगी और पारिवारिक समस्याओं के चलते परेशान होकर फांसी के फंदे पर लटककर जान दे दी। परिजन आत्महत्या के पीछे आर्थिक तंगी, केसीसी कर्ज व लोगों की रकम उधार होना बता रहे हैं। पुलिस के अनुसार बोहत निवासी हजारीलाल (42) पुत्र रघुनाथ गुर्जर ने खेत पर स्थित पेड़ पर रस्सी से फंदा लगाकर जान दे दी।
परिजनों ने बताया कि तीन साल से खेत में फसल भी ठीक नहीं हो रही थी। बैंक से बनवाए गए क्रेडिट कार्ड के ब्याज को भी किसान इधर-उधर बाजार से रकम लेकर जमा करवाता था। वह सरकार की ओर से ऋण माफी योजना में कर्ज माफ होने की आस लगाए हुए था जो पूरी नहीं होने से वह परेशान था।
श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर इलाके के गांव ठाकरी के एक किसान सोहन लाल कड़ेला के जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। सोहनलाल ने आत्महत्या करने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा, साथ ही उसने अपने मोबाइल से एक वीडियो भी बनाया। सुसाइड नोट में उसने राजस्थान सरकार द्वारा कर्ज माफी का वादा पूरा न करने को अपनी मौत की वजह का कारण बताया है।
सुसाइड नोट में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के नाम हैं। लेकिन पुलिस ने दोनों के ही खिलाफ एफआईआर करने से इंकार कर दिया। सुसाइड नोट में नाम लिखे होने के मामले पर सचिन पायलट ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। राजस्थान सरकार राज्य में किसानों के लिए बेहतर भविष्य हासिल करने में मदद के लिए प्रतिबद्ध है। सोहनलाल ने जहर खाने से पहले वीडियो भी बनाया। वीडियो में उसने आह्वान किया कि बाकी किसान उसके शव को तब तक स्वीकार न करें, जब तक सरकार सभी किसानों का कर्जा माफ नहीं करती।
राजस्थान के राजसमंद जिले के कांकरोली पीपली आचार्यान गांव में एक किसान ने फसल बर्बाद होने की वजह से आत्महत्या कर ली। यह घटना 30 दिसंबर की है। परिजनों ने बताया कि ज्यादा ठंड पडऩे की वजह से उसकी बैंगन की फसल बर्बाद हो गई थी और इसी वजह से 48 वर्षीय किसान ने खुदकुशी कर ली। राज्य में कांग्रेस की नई सरकार बनने के बाद यह पहली किसान आत्महत्या का मामला था।
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में एक किसान ने कर्ज से परेशान होकर जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने पेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना 21 जुलाई सुबह की बताई जा रही है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मृतक किसान सुरजाराम (48) हनुमानगढ़ जिले के किकरालिया गांव का रहने वाला है। मृतक किसान के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। सुरजाराम पर एक बैंक का साढ़े सात लाख रुपए का कर्ज था। जिसे माफ करवाने के लिए वह कई दिनों से चक्कर काट रहा था। लेकिन बैंककर्मी ब्याज की गणना को लेकर उसे कई दिनों से चक्कर लगवा रहे थे। इस कारण वह कई दिनों से परेशान था। परिजनों ने बताया कि बैंककमिर्यों की शिकायत उसने जिला कलेक्टर को भी की थी,लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला।
राजस्थान में किसानों की आत्महत्या के आंकड़ों को लेकर राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार खुद घेरे में आ गई है। दिसंबर 2018 में हुए राजस्थान विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने राज्य में किसानों की आत्महत्या को बड़ा मुद्दा बनाया था और उस समय कहा था कि राज्य में 80 किसानों ने आत्महत्या कर ली है। लेकिन अब राज्य में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के शासन में किसान लगातार आत्म हत्या कर रहे है और सरकार लचर नजर आ रही है।
गौरतलब है कि गत विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत होने के बाद राजस्थान सरकार ने अपने चुनावी वादे के मुताबिक किसान कर्ज माफी का ऐलान किया था। किसानों के द्वारा आत्महत्या करने की ये घटनाएं बताती है कि गहलोत सरकार ने महज चुनावी वादा पूरा करने के लिए किसानों की कर्जमाफी को लेकर आदेश तो निकाल दिए हैं, लेकिन हकीकत में अभी तक बड़ी संख्या में किसानों का कर्ज माफ नहीं हो पा रहा है। कर्ज माफी की आस में बैठे किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर है लेकिन उन्हें कर्ज माफी का फायदा नहीं मिल पा रहा है।
किसानों को लेकर देश में लगातार कई बड़ी-बड़ी बातें होती हैं लेकिन उन पर अमल लगभग न के बराबर ही हो पाता है। कर्जमाफी का वादा करके कांग्रेस ने सत्ता हासिल की लेकिन वो अपने वादे को निभाने में कामयाब नहीं हो पाई। नतीजा ये है कि किसान परेशान होकर आत्महत्या करने को मजबूर हैं।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने समर्थको से खुद को राजस्थान का गांधी कहलवाना पसंद करते हैं। वो स्वयं को एक संवेदनशील नेता मानते हैं। ऐसे में राजस्थान में ऐक संवेदनशील मुख्यमंत्री की सरकार में कर्ज से परेशान होकर किसानों के आत्महत्या करने की घटनाये मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता पर प्रश्रचिन्ह खड़ा कर रही है। इन घटनाओं से उनकी स्वनिर्मित गांधी वाली छवि भी धुधलाने लगी है। यदि समय रहते सरकार ने इन घटनाओं को रोकने की दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो राजस्थान में किसान आत्म हत्याओं का सिलसिला बढ़ता ही चला जायेगा। जिसकी जिम्मेवार राज्य सरकार ही होगी।
ईएमएस/10 जुलाई19