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(छतरपुर) नहर में पानी नहीं, किसानों का भला कैसे होगा

06/12/2018

छतरपुर (ईएमएस)। सरकार ने करोड़ें रूपए खर्च कर हर खेत को पानी देने की उम्मीद से नहरें बनवाईं लेकिन कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां पानी न मिलने से नहरें का कोई फायदा नहीं दिख रहा। कई ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां जल संसाधन विभाग की उदासीनता और लापरवाही के कारण नहर फूटने से खेत तालाब बनकर रह गए हैं। इस विसंगति से किसानें का भला नहीं हो रहा। पानी न मिलने से फसल प्रभावित हो रही है तो वहीं अधिक पानी का खेतें में भराव होने से फसल सड़ रही है। कुल मिलाकर विभाग और कंपनी की मनमानी से किसान बुरी तरह प्रभावित है।
260 करोड़ रूपए खर्च कर सिंहपुर बैराज से लवकुशनगर क्षेत्र को पानी देने की व्यवस्था की गई है लेकिन जल संसाधन विभाग की उदासीनता आड़े आ रही है। धरमपुर माइनर अंतर्गत ग्राम टहनगा के किसानें ने बताया कि एक माह पहले नहर में पानी छोड़े जाने की जानकारी दी गई थी लेकिन अब तक उनके खेतें के लिए एक बूंद पानी नहर में नहीं आया। ग्रामीणें ने यह भी बताया कि जगह-जगह नहरें और नालियां फूटी पड़ी हैं जिससे पानी बर्बाद हो रहा है। मुख्यमंत्री की 181 हेल्पलाईन में शिकायत करने के साथ ही जल संसाधन विभाग के लवकुशनगर एसडीओपी हेमंत गुप्ता से भी शिकायत की गई थी पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। किसानें को पानी आने का आश्वासन मिला है लेकिन सिर्फ आश्वासन ही उनके हाथ लगा। पानी न मिलने से खेतों में बोयी गई फसल सूख रही है। ज्यादातर खेत पानी के इंतजार में बुवाई के लिए पड़े हैं।
तीन साल तक मरम्मत की जिम्मेदार कंपनी भी लापता
सिंहपुर बैराज से पानी खेतें तक पहुंचाने के लिए केईसी कंपनी द्वारा नहर का निर्माण कराया गया था। नहर बनाकर कंपनी अपना बोरिया बिस्तर समेटकर चली गई है। खेतें में तालाबें जैसा पानी भरा रहे या खेत पानी को तरसते रहें यह कंपनी के ठेंगे से हैं। केईसी कंपनी की कुछ राशि जल संसाधन विभाग के सिक्योरिटी के तौर पर जहा हैं लेकिन इससे यह अपेक्षा भी नहीं की जा सकती कि कंपनी नहरें की रिपेयरिंग करा पाएगी। आम तौर पर तीन साल तक नहरें की देखरेख और साफ-सफाई के साथ मरम्मत की जिम्मेदारी कंपनी की होती है लेकिन कंपनी काम करने के बाद यहां से चली गई। विभाग द्वारा सिर्फ यह कहा जा रहा है कि कंपनी से काम कराएंगे। कंपनी की गड़बड़ी का खामियाजा किसानें को भुगतना पड़ रहा है।
इनका कहना-
चुनाव में व्यस्त रहने के कारण नहरें की सफाई कराए बिना पानी छोड़ना पड़ा। अब नहरें की गड़बड़ी को दिखवाता हूं।
हेमंत गुप्ता, एसडीओ, जल संसाधन विभाग, लवकुशनगर
ईएमएस/ चन्द्रबली सिंह / 06 दिसम्बर 2018