राज्य समाचार

दूध के दाम क्यों नहीं तय कर रही सरकार

15/03/2019


हाईकोर्ट ने चार सप्ताह में किया जवाब तलब
भोपाल (ईएमएस)। मप्र हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जबाब तलब किया है कि उन्होंने दूध के दाम तय क्यों नहीं किए है। हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी कर राज्य शासन, नागरिक आपूर्ति मंत्रालय और फुड कंट्रोलर से चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है। मालूम हो कि बीते सोमवार को न्यायमूर्ति आरएस झा व जस्टिस संजय द्विवेदी की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान जनहित याचिकाकर्ता नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के प्रांताध्यक्ष डॉ.पीजी नाजपांडे की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय व शांति तिवारी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि 2003 में दूध के रेट नियंत्रित व निर्धारित करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। 2006 में आदेश आया कि दूध को आवश्यक वस्तु में शामिल नहीं कर सकते। इसके बाद 2006 में नए सिरे से एक जनहित याचिका दायर की गई। जिस पर 7 जनवरी 2007 को आदेश आया, जिसमें हाईकोर्ट ने माना कि दूध आवश्यक वस्तु में शामिल किए जाने योग्य है, इसलिए राज्य शासन दूध के रेट तय करे।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह व्यवस्था भी दी थी कि दूध का अतिरिक्त स्टॉक होने की सूरत में ही बाहर भेजे जाने की अनुमति दी जाए। पहले स्थानीय आवश्यकता पूरी की जाए। इस निर्देश का पालन करते हुए राज्य शासन ने 17 अप्रैल 2007 में दूध का रेट 18 रुपए प्रतिलीटर निर्धारित कर दिया। हाईकोर्ट के उक्त आदेश को दूध विक्रेताओं व राज्य शासन ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) के जरिए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। जिस पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद स्टे लगा दिया गया। हालांकि बाद में स्टे खत्म करते हुए याचिका खारिज कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद तत्कालीन कलेक्टर जबलपुर ने दूध का रेट 44 रुपए प्रति लीटर तय किया। इसके खिलाफ भी दूध विक्रता सुको चले गए। यह मामला भी लंबे समय तक विचाराधीन रहने के बाद निराकृत हो गया। इसीलिए नए सिरे से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राज्य शासन से रेट निर्धारित करने की मांग की गई है। इसी याचिका के परिप्रेक्ष्य में हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर महीने भर में जवाब देने को कहा है।
सुदामा नर-वरे/15मार्च2019