लेख

सरकारी कर्मी कैसे सुधरेंगे? (लेखक - डॉ. अरविन्द जैन / ईएमएस)

11/06/2019

मध्य प्रदेश सरकार जिसे मन पसंद सरकार कहते हैं बड़ी गरोबोअजीब स्थिति में हैं जहाँ नियम कानून की धज्जियाँ उड़ाना सामान्य बात हैं। हर सिक्के के दो पहलु ही होते हैं और भी होते हैं पर हमारे यहाँ दसों दिशाओं में बहुत ही अराजकता हैं। अराजकता समाज, परिवार, राजनीती के साथ सरकारी तंत्र में बहुत हैं। वैसे सरकारी तंत्र में सबसे कष्टप्रद विभाग स्वास्थ्य, शिक्षा। बिजली, जल प्रदाय यानी लोक यांत्रिकी विभाग, लोक निर्माण विभाग, महिला बाल विकास आदि औसतन सभी विभाग इस असाध्य रोग से ग्रसित हैं। सरकार ज्यों ज्यों इलाज करती हैं वैसे वैसे रोग बढ़ता जाता हैं।
कभी कभी लगता हैं की आप दादा नाना बन जाते हैं और सरकार आपको प्रशिक्षण देती हैं की हनी मून कैसा मनाया जाता हैं। कभी कभी हमारे विभागों में इतने वरिष्ठ डॉक्टर्स, अधिकारी, कर्मचारी हो गए हैं जो सेवानिर्वृत्ति पर हैं और उनसे अपेक्षा की जाती हैं की वे समय पर ड्यूटी पर आएं और काम करे जबकि उनसे कनिष्ठ लोगों को शिक्षा लेनी चाहिए की समय पर सेवा करे और कार्य के प्रति समर्पित रहे। यहाँ एक बात बहुत महत्वपूर्ण हैं की नौकरी में आपको सिर्फ समय पर आकर अपना काम करना हैं बस इसके अलावा आपको वेतन के लिए व्यापारी जैसे कोई लागत नहीं लगानी पड़ती और और न व्यापार चले तो कोई चिंता नहीं, बस कार्यालय में समय पर आओ, काम निष्ठापूर्वक करो और समय पर जाओ। अपना अधिकार और कर्तव्य का पालन करो। परन्तु जब नौकरी लेनी होती हैं तो आज्ञाकारी होते हैं और नौकरी मिलने के बाद अधिकार के लिए लड़ते हैं। सरकार का सबसे अधिक खर्च स्थापना में होता हैं। एक आवेदन पर नौकरी और नौकरी से निकालने के लिए दस्तावेज़ों का अम्बार और नियमों का हवाला देकर नौकरी पाने की दुहाई देते हैं और वापिस मिल जाती हैं पर प्राइवेट संस्था में काम पूरा लेते हैं और ज़रा हीला हवाला किया तो सेवाएं समाप्त हो जाती हैं ऐसा क्यों ?
भय बिन प्रीत होत न गौसाई। आज सरकार के मंत्री, शिक्षा, स्वास्थय, बिजली, जल प्रदाय सड़क विभागों को चेतावनी, डांट फटकार कर रहे हैं पर अधिकारी, कर्मचारी की इतनी मोटी खाल हो चुकी हैं की उनको भय नहीं हैं। अधिकारी कर्मचारी का सोचना हैं की ये विधायक, मंत्री अस्थायी शासकीय सेवक हैं और उनका कल का पता नहीं रहता हैं की कल रहेंगे या नहीं जबकि हम लोग स्थायी हैं और ६२-६५ वर्ष तक नौकरी करेंगे और उसके बाद पेंशन मिलती रहेंगी।
इस भाव ने सरकार को निक्क्मा बना दिया और यह स्थिति शहरों में हैं, कस्बों और दूरस्थ अंचलों में तो मन पसंद सरकार चलती हैं। आखिर कर्मचारी और अधिकारी सामाजिक प्राणी होता हैं, वे स्थानीय नेताओं को विश्वास में लेकर जितना जैसा काम करना चाहते हैं करते हैं और वेतन मिलता हैं। आजकल यह प्रथा हैं की नौकरी के लिए वेतन मिलता हैं और काम करने के लिए सुविधा शुल्क या पैसा मिलता हैं। इसीलिए वे लोग काम के प्रति समर्पित होते हैं और आज जितने अधिक नियम कानून बने हैं तो उनसे बचने के अधिक उपाय निकल आये हैं।
बिजली की गड़बड़ी के लिए सरकार के मंत्री ने कह दिया की पुराणी सरकार ने ख़राब उपकरण खरीदे उस कारण बिजली का काम ठीक से नहीं हो पा रहा हैं। सड़क ख़राब बनी हैं या हो गयी तो वह पिछली सरकार ने बनाई थी, पिछली सरकार ने हॉस्पिटल में ड्यूटी करने को नहीं कहा था इसलिए डॉक्टर ड्यूटी नहीं कर रहे। जल संकट पिछली सरकार के समय पानी की वर्षा ठीक से नहीं हुई इस कारण जल संकट हैं। पिछली सरकार ने शिक्षकों की भर्ती नहीं की इस कारण हम कुछ नहीं कर पाएंगे। यानी कमल नाथ सरकार का कहना हैं की हमारी स्थिति ऐसी हैं जैसे कोई विधवा और ऊपर से गर्भवती।
जब नयी सरकार जीतकर आयी तो उसे माला पहनकर स्वागत करने का अवसर मिलता हैं तो नाकामयाबी के लिए उसे ----के पहनना चाहिए। ये कोई तर्क नहीं की पुरानी सरकार ने कुछ नहीं किया तब आप भी नहीं करेंगे। यदि सरकार चलाने में योग्यता नहीं हैं तो पद त्यागों और दूसरे योग्य लोगों को पदासीन करो। एक बात सरकारी कर्मचारी और अधिकारीयों से कहना होगा की जब आप वरिष्ठतम पदों पर आ गए हो तो अन्य आप से अपेक्षा रखते और आप उनके आदर्श बने नियमानुसार समय पर जाए और काम करे जिससे कनिष्ठ अपने भविष्य के प्रति सजग रहे।
सरकार कितनो को दण्डित करेंगी, कितनो को स्थान्तरित करेंगी, यह कोई हल नहीं हैं, कमसे कमसे जितना वेतन मिलता हैं उस अनुरूप काम करे चाहे काम के लिए सुविधा शुल्क से आज भी कोई रोक नहीं पा रहा हैं। और न रोक पायेगा। आज भी अन्य-- आय का चलन प्रचुरता से हैं और जो नहीं देता उसके काम वर्षों से लंबित हैं और रहेंगे।, सरकार में काम २४ घंटे, चौबीस दिन, चौबीस महीने और चौबीस साल में होते हैं बस काम कराने वाला चाहिए।
कंप्यूटर थोड़ी काम करता हैं काम करने वाले काले बाल वालेहोते हैं जो करते हैं जबतक सुविधा शुल्क न मिलती तब तक फाइल नहीं चलती। हां यदि आपके विरुद्ध अनुसाशनिक कार्यवाही होना हो तो वह फाइल तुरंत गतिशील हो जाती हैं और कोई लाभ वाली फाइल हो तो वह सबमिशन में हैं और कब तक रहती हैं वह सब सूत्रधारों की मनोवृत्ति पर निर्भर करता हैं। इसीलिए मनपसंद सरकार में न हम सुधरेंगे और न कभी करेंगे।
यहाँ के लोग
वक़्त के
बड़े पाबन्द हैं,
कल का काम
आज नहीं करते।
और कल ?
कल तो कभी नहीं आता,
इसलिए
कभी नहीं करते।
11जून/ईएमएस