लेख

कार्य संस्कृति बदलने के नाम (लेखक- अजित वर्मा / ईएमएस)

11/06/2019

उदारवाद की अवधारणाओं के अनुरूप देश में नयी कार्य संस्कृति विकसित करने के लिए अब एक बार फिर श्रम कानूनों में बदलाव होने वाला है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए श्रम कानूनों में परिवर्तन करने के लिए 100 दिन के अंदर एक कार्य योजना तैयार की है। इस कार्य योजना के लागू हो जाने पर वियतनाम और दक्षिण एशिया के देशों से भारी विदेशी निवेश आने की संभावना मंत्रालय जता रहा है। एशियाई देशों में देसी, विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करने कारपोरेट टैक्स श्रम कानूनों में छूट और बेहतर वातावरण देने का प्रयास इन 100 दिनों में नीति के रूप में किया जाएगा।
श्रम कानूनों की अड़चनों को समाप्त करने के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन कर उन्हें निवेशकों के लिए काफी आसान बनाया जाएगा। इसके लिए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय श्रम मंत्रालय से लगातार संपर्क कर 10 सूत्रीय एक्शन प्लान तैयार कर रहा है, ताकि विदेशी निवेशक बड़ी तेजी के साथ भारत की ओर आकर्षित हों जो संशोधन किए जा रहे हैं। उसके बाद अब बड़ी-बड़ी कंपनियां भी अपने यहां पर पार्ट टाइम जॉब दे सकेगी। वही श्रमिकों की जिम्मेदारी भी तय करने, श्रम कानूनों में संशोधन होगा।
कोई शक नहीं कि आर्थिक विकास को गति देने के लिए देश में विदेशी निवेश बढ़ना आवश्यक है। और इसके लिए देश में कार्य संस्कृति को बदलने की जरूरत सरकार महसूस कर रही है। बड़ी कम्पनियां भारत में लागू श्रम कानूनों को अपने कामकाज को सुगमतापूर्वक करने में बाधक मानती हैं। हमारा मानना है कि कम्पनियों को पार्ट टाइम जाब देने की सुविधा मिलना चाहिए, लेकिन श्रम कानूनों में ऐसे संशोधन नहीं होना चाहिए, जिनसे श्रमिकों के हित प्रभावित हों, या उनके शोषण का मार्ग प्रशस्त हो। देखना होगा कि सरकार क्या संशोधन लागू करती है।
11जून/ईएमएस