लेख

सहभागिता से बनता है काम (लेखक- डॉ. अरविन्द जैन / ईएमएस)

15/03/2019

( १६ मार्च २०१९ राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस पर विशेष)
भारत वर्ष में राष्ट्रीय टीकरण दिवस १६ मार्च को प्रतिवर्ष मनाया जाता है। राष्ट्रीय टीकरण दिवस भारत में पहली बार १६ मार्च १९९५ से शुरू हुआ था जिस दिन प्रथम बार पोलियो वैक्सीन की खुराक दी गयी थी। इसका मुख्य लक्ष्य हैं की जनता में जागरूकता के साथ इस पृथ्वी को पोलियो विहीन किया जाए और करोड़ों शिशुओं को टीकाकरण करने से रोग से बचाया जाए। से
अज्ञान से, निरक्षर से, या उपलब्ध ना हो पाने से यदि टीका नहीं लिया गया तो अनेक शिशुओ की ऐसी हालत हो सकती हैं. बच्चो को खासकर शिशुओ को और नवजात बालको को सिफारिश किया गया टीकाकरण समय पर कराना जरुरी हैं. नवजात शिशुओ के पास नैसर्गिक रोगप्रतिकारक शक्ति होती हैं जो उन्हें अपनी माता से और स्तनपान कराने से प्राप्त होती है किन्तु वो पर्याप्त नहीं होती बच्चा जैसे जैसे बढ़ता जाता हैं रोगप्रतिरोधक क्षमता कम होती जाती हैं।
इसलिए आपके बालक का टीकाकरण करने से उसे जानलेवा बीमारियों से रक्षण मिलता हैं इसलिए टीकाकरण अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. अपनी संतान स्वस्थ रहकर अच्छी तरह से बड़ी हो जाए यही हुमारी इच्छा रहती हैं संक्रमण रोगों से अपने शरीर को प्रतिरोगात्मक शक्ति करना या बचाना सबसे आसन और सुरक्षित तरीका हैं. तो यदि भविष्य में आपका इन बीमारियों से संसर्ग जाएगा तो येटीकाकरण आपके शरीर को उनका मुकाबला करने में सहायता करेगा।
सामान्यतः अनेक बीमारियों के संदर्भ में उस रोग के जन्तुओ का शरीर में प्रवेश हो जाने पर बीमारीयाँ पैदा हो जाती हैं. तभी प्रतिउत्तर के रूप में इन जन्तुओ का सामना करने हेतु एक प्रतिकारक शक्ति तैयार करती हैं. जो उन जन्तुओ को नष्ट कर देती हैं फिर बच्चे बीमारियों से मुक्त हो जाते हैं. इसमें एक चीज़ हमारी समझ में आती हैं की बच्चे में रोग की शुरुवात होने पर ही रोगप्रतिकारक क्षमता सिद्ध हो जाती हैं।
टीका यानी कोई सम्पूर्ण रोग्जन्तु या उसका कुछ अंश जिसपर प्रक्रिया करने के पश्चात उसे इस तरीके से बदला गया हैं की उसके रोग निर्माण करने की क्षमता नष्ट हो जाए परन्तु इसी वजह से शरीर की रोगप्रतिकारक शक्ति जब वो शरीर में दाखिल हो जाती हैं तब तैयार होती हैं. अब आप समझ गए होंगे की टीका लगाने से आपके बच्चे का उसकी बाल्यावस्था में हो जाने वाली कई जानलेवा बीमारियों से रक्षण होता।
टीकाकरण के बाद स्तनपान कराये --टीका लगने के तुरंत बाद स्तनपान करवाने से उसे शांत करने में मदद मिलती हैं। स्तनपानसे मिलने वाले शारीरिक अहसास व नजदीकी शिशु को रहत पहुंचा सकती हैं। उसे आराम देने और दर्द भुलाने में मदद करेगा।
ध्यान बंटाएं ----शिशु को उसके पसंदीदा खिलोने दें और दर्द से उसका ध्यान बांटने के लिए उसके साथ खेले। घर के आसपास के कुछ बच्चों के साथ कुछ समय बिताने दे।
बर्फ लगाए ----बहुत से डॉक्टर इंजेक्शनलगाने वाले स्थान पर बर्फ लगाने की सलाह दते हैं। इससे शिशु को हो रहे दर्द को कम करने में मदद मिल सकती हैं हालांकि इंजेक्शन लगाए गए स्थान पर मालिश करने या मलने से बचे। इससे शिशु की तकलीफ बढ़ सकती हैं। कड़ो दिन में टीके का दर्द अपने आप कम हो जाता हैं।
इस पुण्य कार्य में सबकी सहभागिता जरूरी हैं। बचाव ही इलाज़ हैं।
15मार्च/ईएमएस