लेख

अभिनेत्री से अधिवक्ता बनी कुनिका सदानंद (लेखक- रहीम खान / ईएमएस)

15/03/2019

किसी ने सच ही कहा है कि यदि इंसान में कुछ करने की इच्छा हो, आत्मविश्वास मजबूत हो और लक्ष्य प्राप्ति के प्रति गंभीरता हो तो सफलतायें हमेशा उनके कदम चूमती है। इसी तरह की कुछ कहानी है हिन्दी फिल्मों एवं टी.व्ही. की कलाकार कुनिका सदानंद की। जिन्होंने अभिनय के साथ समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रियता को बनाये रखते हुए गत दिवस 27 फरवरी को उन्होंने सीडब्ल्यूसी काॅलेज मुम्बई से विधि संकाय की शिक्षा को पूर्ण करते हुए अधिवक्ता की डिग्री प्राप्त की। अभिनय का संसार बेहद सक्रिय और जटिल है ऐसे वातावरण में रहते हुए विधि संकाय की शिक्षा को पूर्ण करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि कही जायेगी।
हिन्दी फिल्म जगत में ना जाने कितने कलाकार आते है और जाते है उनमें वहीं कलाकार अपनी पहचान बनाने में सफल रहते है जो अपनी प्रतिभा से दर्शकों को प्रभावित करने में सक्षम है। एयर वाईस मार्शल मंजूनाथ की पुत्री कुनिका अनुशासन और देशभक्ति के वातावरण में पली बढ़ी और संयोगवश उन्होंने अभिनय की ओर अपना कदम बढ़ाया। बहुमुखी प्रतिभा की धनी कुनिया ने भले ही रजतपट पर बड़े रोल न किये हो पर जब भी उनको जहां अभिनय का मौका मिले उन्होंने अपने किरदार के साथ न्याय करते हुए दर्शकों के बीच अपनी छाप छोड़ने में जरूर सफलता प्राप्त की। 1987 में मंजू असरानी द्वारा दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले धारावाही कशमकश में उन्हें पहली बार अभिनय करने का अवसर प्रदान किया उसके बाद 1988 में हरार फिल्म कब्रिस्तान से उन्होंने फिल्मी दुनिया में प्रवेश किया। 100 से ज्यादा फिल्में और 25 से ज्यादा टी.व्ही. सीरियल में काम करनी वाली कुनिया ने अभिनय के रजत पट में सभी तरह की भूमिका निभाई है। माँ, बहन, प्रेमिका, पत्नी के साथ खलनायिका के रोल में भी उन्होंने अभिनय किया है। कहने का आशय है कि जिस तरह का भी उन्हें रोल मिला उसे निभाने में कोई कमी नही रखी।
समाजसेवी कार्यो में अपनी अलग पहचान बनाने वाले कुनिया की प्रमुख फिल्में मुजरिम, जैसी करनी वैसी भरनी, बंद दरवाजा, दूध का कर्ज, अग्निकाल, थानेदार, बागी, हक, जंगल ब्यूटी, जीना तेरी गली में, दुश्मन देवता, आई मिलन की रात, दो मतवाले एक कुर्बान, बेटा, बेवफा से वफा, खिलाड़ी, मीरा का मोहन, आज का गुंडाराज, घर आया मेरा परदेशी, गुमराह, कोहरा, मोहरा, जवाब, छोटी बहु, अंदाज, तड़ी पार, जोड़ी क्या बनाई वाह वाह रामजी, दाग द फायर, शादी करके फंस गया यार, इंसान इत्यादि एवं सीरियल में स्वाभिमान, टीपू सुल्तान, स्पर्श, डाॅलर बहु, सीआईडी, संयोग से बनी संगनी, कानाफूसी, प्यार का दर्द है मीठा मीठा, अकबर बीरबल, ससुराल सिमरा का, बाक्स क्रिकेट लीग इत्यादि शामिल है।
दबंग और बेबाक विचारों की धनी अभिनेत्री कुनिका को कुछ वर्ष पूर्व रिलीज हुई फिल्म पदमावती को लेकर करणी सेना द्वारा चलाये गये विरोध अभियान पर जब उन्होंने अपने विचार रखे तो उनको करणी सेना के विरोध का सामना करना पड़ा। परन्तु अपने विचारों पर अडिग कुनिका किसी भी तरह से सेना के दवाब में नहीं आई और वह व्यक्त विचारों पर कायम रही। न्यूज चैनल पर प्रसारित होने वाले सामाजिक मुद्दों के बहस पर अनेक कार्यक्रमों में उपस्थिति देकर अपने विचारों के माध्यम से अलग पहचान बनाने वाली कुनिया ने भोजपुरी फिल्मों में भी कार्य किया साथ ही टाईम्स म्यूजिक कंपनी के माध्यम से उन्होंने गायन के क्षेत्र में किस्मत आजमाया और उनके पाॅप एलबम भी रिलीज हुए। दुनिया भर में 100 से अधिक स्टेज शो में अपनी प्रस्तुती देनी वाली कर्मा इंवेस्ट एवं इंटरटेंमेंट नामक एक सफल इंवेट कंपनी चलाने के साथ वह भारत और पाकिस्तान के बीच शांति के लिये आयोजित पहले सैलेब्रेटी क्रिकेट मैच जो 2004 में शारजाह में आयोजित किया गया था उसमें भी उन्होंने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। साथ ही शारीरिक एवं मानसिक रूप से विकलांग लोगों के सहायतार्थ भी उन्होंने कार्यक्रम किये।
यह उपलब्धि है कि 1989 में भारत में एडस से लड़ने के लिये चलाये गये अंांदोलन में उन्होने प्रमुखता के साथ भाग लेकर अपनी सेवाएं दिया। जिसके फलस्वरूप उन्हें सद्भावना राजदूत का सम्मान प्रदान किया गया। पीपुल्स हेल्थ आर्गेनाईजेशन के माध्यम से सामाजिक सुधार के कार्यो की संस्था में उन्हें सदस्य के रूप में भी शामिल किया गया। जिसके अध्यक्ष युवा और खेल मंत्री सुनील दत्त थे ये 1996 की बात है। अपनी सामाजिक सक्रियता को बनाये रखते हुए वह मुम्बई में कई छात्रों, डाक्टर, नर्सो, सामाजिक कार्यकर्ताओं और काऊंसलर के साथ निरंतर अपनी सक्रियता को बनाये हुए है। वह मुम्बई में पीएचओ के राजीव गांधी मोबाइल एचआईवी कांऊसलिंग परीक्षण सेवा के सलाहकार बोर्ड से जुड़ी है जिसका संबंध राजीव गांधी फाऊंडेशन से है। इतना ही नहीं देश विदेश में अनेक कार्यक्रमों में भाग लेकर उन्होने एडस के खिलाफ चलाई जा रही मुहीम में सराहनीय योगदान दिया है। साम्प्रदायिक दंगों के दौरान मेडिकोश साइकोलाॅजिकल उपायों में शाति बहाली के कार्यक्रमों में सक्रिय सेवा देनी वाली कुनिका ने 2001 में गुजरात में आये गुजरात भूकंप के बाद राहत और पुनर्वास सेवाओं में सक्रिय योगदान दिया।
वहीं 2004 के आम चुनाव में कुनिका उन नागरिकों की लड़ाई लड़ी जिनका नाम मुंबई में मतदाता सूची से हट गया था, जिसके परिणाम स्वरूप पहली बार चलाये गये इस अभियान में वह उन मतदाताओं को स्थान दिलाने में सफल रही जिनका नाम मतदाता सूची से कट गया था। इतना ही नहीं नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिये नागरिक जागरूकता मंच का भी गठन किया। अपराधियों को टिकट मिलने और राजनीति में प्रवेश करने के खिलाफ उन्होंने अपनी आवाज बुलंद किया। एक गैर सरकारी संगठन चीप नाम के विशेषाधिकार प्राप्त बच्चों की संस्था के लिये भी वह सचिव के रूप में अपनी सेवाएं देती है। मंुबंई बाढ के समय उन्होने सामाजिक सगठनों के साथ राहत और पुनर्वास कार्यो में भी सक्रिय भूमिका निभाई। इतना ही नहीं गैर कार्यशील शासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ 2005 के चुनाव के दौरान पटना और बिहार के अंदरूनी इलाके में बड़े पैमाने में अभियान चलाया। यह उन सभी कार्यक्रमों में शामिल हुई जिनका उद्देश्य शासन कराधान, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और बीएमसी में राजनीतिक व प्रणालीगत परिवर्तन को लक्षित करना है।
15 अगस्त,2005 को तारा चरित्र परीक्षण नाम की संस्था शुरू की। इस ट्रस्ट का उद्देश्य निराश्रित लोगों का जीवन का पुर्ननिर्माण करना ओैर वंचितों की मदद करना है, जरूरतमंदों को चिकित्सा शैक्षणिक और भावनात्मक सहायता प्रदान करना है। जब मुम्बई बाढ़ में बड़े पैमाने परन गरीब परिवार इससे प्रभावित हुए थे उस समय तारा चेरिटेबल ट्रस्ट पहला चिकित्सा केम्प था जिसमें एक दिन के भीतर 1000 से ज्यादा मरीजों का इलाज किया जाता था उस दरमियान बाढ़ प्रभावितों को खाना और कपड़े तक उपलब्ध कराये। इतना ही नहीं इस ट्रस्ट ने एक श्रवण बधित लड़की को गोद लिया और उसे उसका इलाज करते हुए अत्यधिक डिटिजल सुनवाई सहायता प्रदान की, उस सफलता को देख कर इस ट्रस्ट द्वारा 90 से अधिक ऐसे बच्चे जो कान की बीमारी के कारण सुन नहीं सकते थे श्रवण यंत्र उपलब्ध कराया और यह कार्य निरंतर चल ही रहा है।
अभिनेत्री, प्लेबेक सिंगर एवं सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में लंबा रास्ता तय करने वाली कुनिका ने भोजपुरी फिल्मों में भी अपना हाथ अजमाया। वर्तमान समय वह विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से समाज सेवी कार्यो में अपनी सक्रियता को बनाये हुए है। इतने व्यस्त जीवन में भी उनके द्वारा विधि संकाय का शिक्षा ग्रहण कर अधिवक्ता की डिग्री को प्राप्त करने का मुख्य उद्देश्य महिला अधिकारों के लड़ाई लड़ना और समाज के वंचित वर्ग को उचित न्याय दिलाना है। हिन्दी फिल्म जगत के अनेक लोकप्रिय अभिनेत्रियों में से एक कुनिका अभिनय से अधिवक्ता बनकर एक नई भूमिका में समाज के समाने प्रकट हुई है। कार्य के प्रति समपर्ण, इमानदार रहकर सफलता के चुनौतीपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त करनी वाली कुनिका मुम्बई फिल्म नगरी का एक चिरपरिचत चेहरा है जो अभिनय के रजतपट से बाहर भी अपने कार्यो से एक नई पहचान स्थापित करने में सफल व्यक्तित्व के रूप में पहचान रखता है।
15मार्च/ईएमएस