लेख

(विचार-मंथन) कनाडा की तरह रहने लायक बनाना होगा भारत को (लेखक-डॉ हिदायत अहमद खान / ईएमएस)

10/07/2019

बेहतर रोजगार की तलाश में देश छोड़कर विदेश जाने का चलन तो पुराना है, लेकिन जिस वादे और दावे के साथ भाजपा नीत एनडीए सरकार की कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संभाली उसके बाद सभी को उम्मीद बंधी थी कि विदेशों से लोग भारत वापस आएंगे और बेहतर जिंदगी जी सकेंगे। अफसोस पांच साल के पहले कार्यकाल में तो ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। अब दूसरे कार्यकाल की भी शुरुआत हो चुकी है, लेकिन कहीं से कोई सकारात्मक संदेश आता दिखलाई नहीं दे रहा है। बल्कि अब पहले से ज्यादा कठिनाइयों का सामना करते हुए देश का बेरोजगार युवा और योग्यतम कामकाजी इंसान विदेश में अपने बेहतर भविष्य को तलाशने में लगा हुआ है। कहने में हर्ज नहीं कि बीते सालों में जिस आसानी से अमेरिका व अन्य देशों का कामकाजी इंसान रुख कर लेता था अब उसे तमाम तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका की ही बात कर लें जिसके बहुत करीब होने का दावा हमारी मादी सरकार करती चली आई है और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रधानमंत्री मोदी को घनिष्ट मित्र बतलाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी है, बावजूद इसके अमेरिका ने एचवनबी वीजा संबंधी नियमों में परिवर्तन करके भारतीय नागरिकों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। ऐसे में खबर आ रही है कि भारतीय लोग अब अमेरिका के स्थान पर कनाडा में रहना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। गौरतलब है कि अमेरिका नंबर वन का नारा देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने ज्यादा से ज्यादा कारोबारियों व कंपनी प्रबंधकों को देश के बेरोजगारों को नौकरी देने और उन्हें आगे बढ़ाने का सख्त संदेश दिया था। इसके बाद अमेरिका में काम करने वाले विदेशी नागरिकों के साथ दोयम दर्जे का बर्ताव किए जाने की खबरें भी आईं, लेकिन इस पर किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, क्योंकि उम्मीद थी कि समय के साथ सब कुछ सही हो जाएगा। अमेरिका में वीजा और अन्य तरह की दिक्कतों के चलते ज्यादातर भारतीय नागरिक अब कनाडा का रुख कर रहे हैं। कनाडा के इमिग्रेशन डिपार्टमेंट के आंकड़े बतलाते हैं कि साल 2017 की तुलना में साल 2018 में 51 फीसदी ज्यादा लोगों ने कनाडा में स्थायी निवास यानी परमानेंट रेजिडेंस हासिल किया है। इन आंकड़ों के मुताबिक, 2018 में कुल 41,675 भारतीयों को स्थायी निवास के लिए आमंत्रण भेजा गया। इसके साथ ही संभावना व्यक्त की जा रही है कि मौजूदा साल 2019 में यह संख्या और ज्यादा बढ़ सकती है। हद यह है कि अमेरिका में रहने वाले भी कनाडा में स्थायी निवास हासिल करना चाहते हैं। एक तरफ अमेरिका में काम करते हुए परेशानियों का सामना करना और दूसरी तरफ नौकरी और बेहतर काम करते हुए स्थाई निवासी बनने की आसानियां। दरअसल कनाडा का रुख करने की एक बड़ी वजह यह भी है कि कनाडा ने जीटीएस यानी ग्लोबल टैलेंट स्ट्रीम को हाल ही में पाइलट स्कीम से बदलकर स्थायी स्कीम बना दिया गया। इसके चलते कनाडाई कंपनियां सिर्फ दो हफ्ते में किसी भी अप्रवासी को कनाडा लाने का अधिकार पा लेती हैं। इस बदलाव के चलते संभावना व्यक्त की जा रही है कि कनाडा में नौकरी के लिए भारतीयों की तादाद तेजी से बढ़ेगी। दरअसल भारत में बेरोजगारी बढ़ी हुई है, काम की उपलब्धता न के बतौर है, जबकि योग्य और प्रशिक्षित लोगों की तादात बढ़ती चली जा रही है। ऐसे में विदेश जाने वालों की पहली पसंद कनाडा रहने वाली है। वैसे कहा यह भी जाता है कि इसके चलते जीटीएस कर्मचारी भविष्य में स्थानीय नागरिकता के लिए आवेदन करते नजर आ जाएं तो आश्चर्य नहीं होगा। इस प्रकार एक अमेरिका है जहां मुश्किलें बढ़ रही हैं वहीं दूसरी तरफ कनाडा है जिसने अपने यहां आने वाले कामकाजी इंसान के लिए आसानियां पैदा करने का काम किया है। दरअसल कनाडा सरकार का एक्सप्रेस एंट्री सिस्टम एक ऐसा सिस्टम है जो कि स्किल्ड और क्वालिफाइड इंसानों को स्थायी निवास के लिए मैनेज करने का काम करता है। इसके तहत स्थायी निवास चाहने वालों का एक ऑनलाइन प्रोफाइल तैयार किया जाता है और उन्हें एंट्री पूल में रखा जाता है। इस बीच सीआरएस में जॉब ऑफर, उम्र, शिक्षा, अनुभव और अंग्रेजी व फ्रेंच के भाषाई ज्ञान को आधार बनाकर चयन कर लिया जाता है। नियमानुसार कटऑफ मार्क वाली लाइन पार करने वालों से स्थायी निवास के लिए आवदेन करने को कहा जाता है। ऐसा करना योग्य और जरुरतमंद के लिए आसान काम होता है, इसलिए लोगों ने अमेरिका की जगह कनाडा को स्थायी निवास स्थल बनाने को तरजीह देने का काम किया है। यह तो रही विदेश में बेहतर भविष्य की तलाश करते हुए ग्रीन कार्डधारी होने की बात, लेकिन यही स्थिति देश में देखने को कब मिलेगी? अब सवाल यह भी उठता है कि भारत सरकार इस मामले में क्या कर रही है या आगे क्या करना चाहेगी? क्योंकि जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ेगी समस्याएं और बढ़ती चली जाएंगी और इससे पहले कि विदेश में रहना मुश्किल हो जाए देश में ऐसी स्थितियां पैदा करनी होंगी ताकि विदेश गए भारतीय भी वापस आ सकें और अपना बेहतर भविष्य बना सकें। आखिर अपने देश में ही योग्यतम शिक्षित और प्रशिक्षित कामकाजी इंसान को काम का ऑफर क्योंकर नहीं मिल पाता है? यह विचार करने वाली बात है। इसके साथ ही देश में श्रम का बेहतर मूल्य देने की परिपाटी कब शुरु हो पाएगी? केंद्र सरकार को इस मामले में यहां-वहां की बातें करना छोड़ देनी चाहिए और कोशिश की जानी चाहिए कि हर हाथ को काम मिले।
10जुलाई/ईएमएस