क्षेत्रीय

चम्बल की सुरक्षा में लगी एसएएफ की बटालियन भेजी बालाघाट, अब बेखौफ होगा रेत का उत्खनन

23/06/2022

-जलीय जीवों पर मंडराया खतरा
मुरैना (ईएमएस) । जलीय जीवों व रेत की सुरक्षा में चम्बल नदी के घाटों पर मुस्तैदी के साथ तैनात एसएएफ की बटालियन बालाघाट भेजने के बाद अवैध रेत के कारोबार में लगे माफिया अब चम्बल नदी को पूरी तरह से छलनी कर देंगे, जिससे चम्बल नदी में जलीय जीवों के लिए खतरा मंडराता नजर आ रहा है ।
क्योंकि अब रेत के धंधे से जुड़े लोगों को चम्बल के अवैध रेत का खनन करने से रोकने वाला कोई नहीं होगा। अभी तक चम्बल में लगी एसएएफ की 26 बटालियन के कारण वे अवैध खनन खुलेआम नहीं कर पा रहे थे लेकिन अब नगरीय निकाय चुनाव के मद्देनजर इस बटालियन को बालाघाट भेजा गया है। इस बटालियन को यहां उच्च न्यायालय के आदेश पर नियुक्त किया गया था लेकिन पुलिस मुख्यालय भोपाल ने आदेश जारी कर बालाघाट भेजने के आदेश जारी कर दिए हैं। उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद बटालियन को क्यों भेजा जा रहा है, इसका जवाब न तो पुलिस अधिकारियों के पास है और न ही वन विभाग के। फिलहाल यह मामला संदेह के घेरे में आ गया है।
बता दें, कि रेत माफिया द्वारा चंबल के राजघाट सहित अन्य घाटों पर भारी मात्रा में रेत का अवैध खनन किया जा रहा था। जिससे राजघाट का क्षेत्र पूरी तरह छलनी हो गया था। अवैध खनन से चंबल के जलीय जीवों घड़ियाल तथा बाटागुर कछुओं के अंडे फूट रहे थे तथा जलीय जीव मरने लगे तो यह मामला हाई लेवल तक जा पहुंचा लेकिन माफिया पर अंकुश नहीं लगाया गया। इस पर अभिभाषक राखी शर्मा ने उच्च न्यायालय की जबलपुर खण्डपीठ में एक जनहित याचिका दायर की तथा अवैध खनन को रोकने व जलीय जीवों के संरक्षण की मांग उठाई। इस जनहित याचिका को गंभीरता से लेते हुए उच्च न्यायालय ने मध्यप्रदेश शासन को आदेश जारी किया कि अवैध खनन को रोकने के लिए वहां एसएएफ की तैनाती की जाए। न्यायालय के आदेश पर राज्य शासन ने वहां एसएएफ की 26 वीं बटालियन की तैनाती कर दी। इस बटालियन की तैनाती के बाद अवैध खनन पर काफी हद तक रोक लग गई। बटालियन
नगरीय निकाय चुनाव के मद्देनजर पुलिस मुख्यालय भोपाल ने एक आदेश जारी कर चंबल की सुरक्षा में लगी 26 वीं एसएएफ बटालियन को बालाघाट भेजने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस आदेश के मद्देनजर अब बटालियन बालाघाट के लिए रवाना हो गयी। जिससे अब रेत की खुली लूट शुरु हो जाएगी।
क्या उच्च न्यायालय से ली गई है अनुमति
उच्च न्यायालय के आदेश पर पदस्थ एसएएफ बटालियन को बालाघाट भेजने से पहले क्या पुलिस मुख्यालय ने न्यायालय से अनुमति ली है, इस मामले में पुलिस के आला अधिकारी फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं जिससे यह मामला संदेह के घेरे में आ गया है। वहीं वन विभाग के अधिकारी भी इस मामले में कुछ नहीं बता पा रहे हैं।
होगी न्यायालय के आदेश की अवहेलना
अधिकारियों की माने तो अगर पुलिस मुख्यालय द्वारा उच्च न्यायालय से बिना अनुमति लिए एसएएफ की बटालियन को बालाघाट भेजा जा रहा है तो यह उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना होगी जिसको लेकर याचिकाकर्ता द्वारा पुलिस पर न्यायालय की अवहेलना करने की याचिका दायर की जा सकती है। फिलहाल इस मामले में कोई भी बोलने को तैयार नहीं है।
कहते हैं डीएफओ
उच्च न्यायालय के आदेश पर एसएएफ की बटालियन की पदस्थी यहां की गई थी। जाहिर है जब बटालियन चली जाएगी तो अवैध खनन पर रोक लगाना संभव नहीं होगा क्योंकि विभाग के पास इतना सशत्र बल नहीं है। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय ने न्यायालय की अनुमति ली है कि नहीं, मैं कुछ नहीं बता सकता ह्।ं
स्वरुप दीक्षित, डीएफओ, मुरैना
मुझे नहीं जानकारी
इस संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। बटालियन को हटाने का आदेश पुलिस मुख्यालय ने दिया है। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की बात मुझे नहीं पता है। आपने मेरे संज्ञान में मामला ला दिया है तो मैं इसकी जानकारी लेता हूं।
राजेश चावला, एडीजी, ग्वालियर
मुकेश शर्मा/23जून2022